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Wednesday, 20 May 2026
टेक

गूगल के पूर्व CEO की स्पीच में छात्रों का विरोध

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Komal
संवाददाता
📅 20 May 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 221 views
गूगल के पूर्व CEO की स्पीच में छात्रों का विरोध
📷 aarpaarkhabar.com

गूगल के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट जब किसी विश्वविद्यालय में अपना भाषण दे रहे थे, तभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम सुनते ही छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। यह घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस विषय पर व्यापक चर्चा कर रहे हैं।

श्मिट ने अपने भाषण में तकनीकी विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य के बारे में बात कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने एआई प्रौद्योगिकी का विस्तार से वर्णन करना शुरू किया, विश्वविद्यालय के सभागार में मौजूद छात्रों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। छात्रों के चेहरे पर असंतोष और चिंता स्पष्ट नजर आ रही थी। यह दृश्य पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया।

छात्रों के विरोध का मुख्य कारण यह था कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अपनी नौकरियों खोने का खतरा महसूस कर रहे हैं। आजकल हर युवा को यह चिंता सताती है कि भविष्य में एआई उनके काम को ले लेगा। इसलिए जब श्मिट जैसे तकनीकी विशेषज्ञ एआई के फायदों के बारे में बोल रहे थे, तो छात्रों को लगा कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

एरिक श्मिट कौन हैं और क्या है उनका योगदान

एरिक श्मिट गूगल कंपनी के लिए एक किंवदंती माने जाते हैं। उन्होंने गूगल को एक छोटी सी कंपनी से विश्व की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक के रूप में विकसित होते देखा। श्मिट ने गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कई सालों तक काम किया। उन्होंने खोज इंजन तकनीक में क्रांति लाई और विश्व भर में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया।

गूगल के अलावा, श्मिट विभिन्न तकनीकी पहलों में भी शामिल रहे हैं। वह एक सफल उद्यमी और विचारक माने जाते हैं जिनके विचार तकनीकी जगत में काफी महत्व रखते हैं। लेकिन इस बार उन्हें एक ऐसा विरोध का सामना करना पड़ा जो उन्होंने शायद पहले कभी नहीं देखा होगा।

श्मिट के आने से पहले ही विश्वविद्यालय के प्रबंधन को विद्यार्थियों की ओर से आशंका की जानकारी मिल गई थी। छात्र संगठनों ने पहले से ही घोषणा कर दी थी कि वे इस भाषण का विरोध करेंगे। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि विरोध इतना तीव्र और जोरदार होगा। जब श्मिट मंच पर पहुंचे, तो भीड़ से ही विरोध की आवाजें उठने लगीं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नौकरियों का डर

छात्रों का विरोध पूरी तरह से उचित है क्योंकि एआई वास्तव में एक ऐसा विषय है जो आने वाले समय में सभी को प्रभावित करेगा। विশ्वविद्यालयों में आज पढ़ रहे छात्र ही भविष्य के कर्मचारी होंगे। वे जानते हैं कि जब वह नौकरी के बाजार में आएंगे, तो उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहां एआई उनके कई काम कर रहा होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत यह है कि यह बहुत तेजी से सीखता है। कंप्यूटर प्रोग्राम्स और एआई एल्गोरिदम ऐसे काम कर सकते हैं जो पहले सिर्फ इंसान ही कर सकते थे। डेटा विश्लेषण से लेकर ग्राहक सेवा तक, एआई हर जगह अपनी मौजूदगी बना रहा है। कानूनी सलाह से लेकर चिकित्सा निदान तक, एआई अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है।

इसलिए छात्रों की चिंता एकदम जायज है। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यह केवल भारत का मामला नहीं है बल्कि विश्व भर में छात्र और युवा इसी तरह की चिंता से जूझ रहे हैं। हर जगह नौकरियां कम हो रही हैं और एआई का दायरा बढ़ता जा रहा है।

विश्वविद्यालय में विवाद और सोशल मीडिया प्रतिक्रिया

श्मिट का भाषण पूरी तरह से बाधित हुआ। छात्रों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। कुछ छात्र मंच के पास पहुंच गए और अपनी मांगें रखने लगे। विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मचारियों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंच पर आना पड़ा। पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया। अंत में, आयोजकों को भाषण को रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया।

इस घटना का विडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इस विषय पर लाखों टिप्पणियां आ रही हैं। कुछ लोग छात्रों का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका विरोध सही था। दूसरी ओर, कुछ लोग कह रहे हैं कि इस तरह का विरोध सभ्य नहीं है और सवाल पूछने का तरीका अलग होना चाहिए था।

मीडिया भी इस घटना को व्यापक कवरेज दे रहा है। समाचार चैनलों पर विभिन्न विशेषज्ञ इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि छात्रों को सही मंच दिया जाना चाहिए ताकि वह अपनी चिंताओं को शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त कर सकें। बहुत से लोग सहमत हैं कि एआई से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है और सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।

यह घटना दिखाती है कि आने वाली पीढ़ी कितनी चिंतित है। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वह अपने छात्रों की चिंताओं को सुनें और उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करें ताकि वह भविष्य में एआई के साथ काम कर सकें। शिक्षा प्रणाली को भी इस बदलाव के लिए तैयार होना चाहिए। छात्रों के विरोध से भले ही श्मिट का भाषण बाधित हुआ हो, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समाज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावों के बारे में गंभीरता से सोचना होगा।