खाड़ी देश अमेरिका से हथियार खरीद कम कर दक्षिण कोरिया की ओर रुख
आपूर्ति में होने वाली देरी के कारण खाड़ी देश अब अमेरिका से हथियार खरीदने में अपनी रुचि कम करने लगे हैं और इसके बजाय दक्षिण कोरिया के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। यह बदलाव खाड़ी क्षेत्र की रणनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है जहां संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अन्य देश अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए नए विकल्पों की खोज कर रहे हैं।
गत कुछ वर्षों में अमेरिका की ओर से हथियारों और सैन्य उपकरणों की डिलीवरी में बार-बार देरी हुई है। इस समस्या के चलते खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएं हुई हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश जो दशकों से अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर पर निर्भर रहे हैं, अब इस निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिकी आपूर्ति में समस्याएं
अमेरिका की ओर से हथियारों की डिलीवरी में आने वाली देरी के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले तो अमेरिकी रक्षा उद्योग की अपनी घरेलू प्रतিबद्धताएं हैं जहां यूरोप में नाटो सदस्य देशों को भी प्राथमिकता दी जाती है। दूसरा, अमेरिकी कांग्रेस विभिन्न राजनीतिक कारणों से सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों को हथियार बिक्री पर सवाल उठाती है। तीसरा, कोविड-19 महामारी के बाद की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं।
इस स्थिति का परिणाम यह हुआ कि खाड़ी देशों के पास बड़े रक्षा सौदे अधूरे रह गए हैं। कुछ मामलों में तो सालों की देरी हुई है। संयुक्त अरब अमीरात को एफ-35 लड़ाकू विमान की डिलीवरी में कई साल का इंतजार करना पड़ा। सऊदी अरब के भी कई महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण समय पर नहीं मिल सके।
दक्षिण कोरिया की ओर रुख
खाड़ी देशों का दक्षिण कोरिया की ओर रुख करना किसी भी तरह से एक अचानक फैसला नहीं है बल्कि एक सोच-समझकर किया गया कदम है। दक्षिण कोरिया रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष निर्माताओं में से एक है। देश ने अपने घरेलू उद्योग के माध्यम से उच्च मानक के सैन्य उपकरण विकसित किए हैं।
दक्षिण कोरिया के पास विभिन्न प्रकार के हथियार हैं जो खाड़ी देशों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इसमें लड़ाकू विमान, रडार सिस्टम, मिसाइलें, और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दक्षिण कोरिया अपने ग्राहकों को तुरंत डिलीवरी और समय पर सेवा प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है।
संयुक्त अरब अमीरात पहले ही दक्षिण कोरिया के साथ अपने सैन्य संबंध बढ़ाने के लिए कदम उठा चुका है। देश ने एल-सैम मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए बातचीत की है। सऊदी अरब भी दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनियों के साथ जुड़ने के लिए गंभीर विचार कर रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना है। खाड़ी देश अपने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए दक्षिण कोरिया के साथ दीर्घकालीन भागीदारी स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा भारत, इजरायल और फ्रांस जैसे देश भी खाड़ी क्षेत्र में अपनी रक्षा उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि वह अपने मित्र देशों को समय पर हथियार और सैन्य उपकरण प्रदान नहीं करेगा तो वह इस क्षेत्र में अपना प्रभाव खो सकता है। खाड़ी देश वर्षों से अमेरिका के सबसे विश्वस्त सहयोगी रहे हैं, लेकिन अब उनके विकल्प बढ़ गए हैं।
दक्षिण कोरिया की ओर खाड़ी देशों का झुकाव इस बात को भी दर्शाता है कि रक्षा बाजार में विविधता आ रही है। अब देश केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए विभिन्न स्रोतों से सामग्री खरीदना चाहते हैं। यह दृष्टिकोण उन्हें अधिक आत्मनिर्भर और कम असुरक्षित बनाता है।
खाड़ी देशों की यह रणनीतिक पारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण विकास है जो आने वाले समय में और भी स्पष्ट होगी।




