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Friday, 05 June 2026
धर्म

गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

author
Komal
संवाददाता
📅 14 May 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 249 views
गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
📷 aarpaarkhabar.com

आज की तारीख को हिंदू पंचांग के अनुसार एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर मनाया जा रहा है। चौदह मई को गुरु प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है, जो कि एक दुर्लभ और विशेष संयोग माना जाता है। इस दिन को भगवान शंकर और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत को संस्कृत में प्रदोष व्रत भी कहते हैं, और यह हर महीने में दो बार आता है। लेकिन जब यह व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है, जो बेहद शुभकारी माना जाता है। इस वर्ष का यह संयोग विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें कई ग्रहों की विशेष स्थिति है।

प्रदोष का अर्थ संध्या होता है, अर्थात दिन और रात के संधि काल को प्रदोष कहते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी समय में भगवान शंकर की पूजा करने से विशेष फल मिलते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शंकर के दर्शन और पूजन से समस्त बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख और समृद्धि आती है। आज के दिन जो भी व्यक्ति श्रद्धापूर्वक भगवान को पूजता है, उसके सभी दुःख और कष्ट दूर हो जाते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त शाम के समय आ रहा है। प्रदोष काल आमतौर पर सूर्यास्त के बाद से लगभग दो घंटे तक रहता है। इस बार प्रदोष काल शाम छः बजकर पचास मिनट से लेकर रात नौ बजे तक माना जा रहा है। हालांकि, स्थानीय समय और भौगोलिक स्थिति के अनुसार यह समय भिन्न हो सकता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि प्रदोष काल में की गई पूजा सामान्य दिनों की पूजा से सौ गुना अधिक फलदायक होती है। इसलिए इस समय में भगवान शंकर को जल, दूध, दही, घी और फल का भोग लगाने की परंपरा है। आप अपने घर के पूजा घर में बैठकर भी इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ मना सकते हैं।

गुरु प्रदोष के दिन व्रत रखने वाले लोगों को सोमवार के प्रदोष व्रत की तरह ही नियमों का पालन करना चाहिए। इस दिन सूर्योदय से लेकर प्रदोष काल तक व्रत रखा जाता है। फिर प्रदोष काल में भगवान शंकर को फल और दूध का भोग लगाकर व्रत को तोड़ा जाता है। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि अन्य लोग फलाहार करते हैं। यह व्यक्तिगत क्षमता और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि बेहद सरल और पवित्र है। सबसे पहले घर को साफ-सुथरा करके पूजा घर को तैयार किया जाता है। फिर पूजा घर में भगवान शंकर की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित किया जाता है। इसके बाद गंगाजल से पूरे घर को शुद्ध किया जाता है। फिर भगवान को फूल, अगरबत्ती, दीप और धूप का प्रस्ताव किया जाता है।

पूजा के समय सबसे पहले भगवान को जल से स्नान कराया जाता है, फिर उन्हें कपड़े पहनाए जाते हैं और फूलों से सजाया जाता है। इसके बाद भगवान को दूध, दही, घी, शहद और चीनी का अभिषेक किया जाता है। फिर भगवान को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाया जाता है। पूजा के अंत में आरती की जाती है। कुछ परिवारों में गुरु प्रदोष व्रत की कथा भी सुनी जाती है।

गुरु प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में देवताओं को राक्षसों से बहुत नुकसान हुआ। तब सभी देवता भगवान शंकर के पास गए और उनसे रक्षा करने की प्रार्थना की। भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना सुनी और उन्हें आशीर्वाद दिया। उसी समय प्रदोष काल था। तब से भगवान शंकर को प्रदोष काल में पूजने की परंपरा शुरू हुई।

एक अन्य कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब भगवान शंकर ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था और संपूर्ण ब्रह्मांड को नाचते हुए दिखाया था। इस दौरान प्रदोष काल में उन्होंने अपनी महिमा दिखाई थी। तब से ही यह समय भगवान शंकर के लिए सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। जो भी व्यक्ति इस समय में भगवान शंकर को याद करता है, उसे परम शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

गुरु प्रदोष व्रत रखने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के सभी क्षेत्रों में सुख और समृद्धि भी आती है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए हिंदू धर्म में गुरु प्रदोष व्रत को एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर माना जाता है। आप भी इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर की पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।