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Tuesday, 18 August 2026
खेल

बोरवेल में गिरे बच्चे की दुखद मौत, 21 घंटे बाद बाहर निकाला गया

author
Komal
संवाददाता
📅 01 July 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 581 views
बोरवेल में गिरे बच्चे की दुखद मौत, 21 घंटे बाद बाहर निकाला गया
📷 aarpaarkhabar.com

हरियाणा के अंबाला जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। धनेओरा गांव में 220 फीट की गहराई वाले खुले बोरवेल में गिरे मात्र 4 वर्षीय बच्चे को 21 घंटे की लंबी और मशक्कत भरी रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला तो गया, लेकिन अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना समाज में बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है और खुले बोरवेलों के खतरों की याद दिलाती है।

धनेओरा गांव में हुई दुःखद घटना

यह दुःख भरी घटना शनिवार को धनेओरा गांव में घटी थी। बच्चे का नाम निर्वैर सिंह था और वह महज 4 साल का था। बच्चा अपने घर के पास के खेत में खेलते-कूदते हुए था। खेत की जमीन पर कहीं कहीं पानी भरा हुआ था और मिट्टी काफी नरम थी। जहां बोरवेल लगा हुआ था, वहां की मिट्टी बिल्कुल गीली और धंसी हुई थी। छोटे निर्वैर सिंह का पैर उसी गीली मिट्टी में धंस गया और वह सीधा 220 फीट गहरे बोरवेल के अंदर जा गिरा।

जैसे ही बच्चा गायब हुआ, आस-पास के लोगों में भारी चहल-पहल मच गई। परिवार के लोगों ने तुरंत इलाके के पुलिस को सूचित किया। घटना की सूचना सुनते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। अंबाला के जिला प्रशासन ने तुरंत राष्ट्रीय आपातकालीन बल यानी एनडीआरएफ, राज्य आपातकालीन बल यानी एसडीआरएफ और सेना के जवानों को सूचित किया। यह एक बेहद नाजुक और असंवेदनशील मामला था क्योंकि एक जान दांव पर थी।

21 घंटे की मशक्कत भरी रेस्क्यू ऑपरेशन

बोरवेल में फंसे बच्चे को निकालने के लिए शुरू किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन अत्यंत मुश्किल और जोखिमपूर्ण था। 220 फीट की गहराई काफी ज्यादा गहरी थी और बोरवेल इतना संकरा था कि बड़े उपकरण भी आसानी से अंदर नहीं जा सकते थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के जवानों ने आधुनिक तकनीकें और उपकरण का इस्तेमाल करते हुए 21 घंटे तक निरंतर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

रेस्क्यू टीम ने सावधानी से बोरवेल के अंदर उतरकर बच्चे को तलाशना शुरू किया। गहराई, तंग जगह और अनिश्चितता से भरा हुआ यह ऑपरेशन वाकई चुनौतीपूर्ण था। रेस्क्यू टीम के सदस्यों को हर समय इस बात का डर था कि बोरवेल की दीवारें गिर न जाएं या कोई और खतरनाक स्थिति न बन जाए। लेकिन उनके हौसले और जिद्द ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अंततः, 21 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम को बच्चे का शरीर मिल गया।

अस्पताल में मृत घोषित किया गया

जब बच्चे को बोरवेल से निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। निर्वैर सिंह को तुरंत अंबाला के निकटतम अस्पताल में ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे पर तुरंत प्राणोपचार के प्रयास किए, लेकिन बहुत बड़े नुकसान और 21 घंटे की उपेक्षा के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के चिकित्सकों ने आखिरकार बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

यह खबर पूरे अंबाला जिले में दुःख की लहर दौड़ा गई। परिवार का दर्द और उनका क्रंदन किसी के भी दिल को तोड़ देने वाली थी। रेस्क्यू टीम के सदस्य भी इस त्रासदी से गंभीरता से प्रभावित हुए क्योंकि बावजूद उनकी सभी कोशिशों के, जान नहीं बच सकी।

खुले बोरवेलों का खतरा और भविष्य की चेतावनी

यह घटना खुले और संरक्षित न किए गए बोरवेलों के खतरों को रेखांकित करती है। भारत में हजारों ऐसे बोरवेल हैं जो खुले हैं और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह सभी खतरनाक बोरवेलों को तुरंत सीमांकित करे और उन्हें सुरक्षित बनाए। इसके अलावा, लोगों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सचेत रहना चाहिए।

धनेओरा गांव में हुई यह दुःखद घटना न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक दर्दनाक सबक है। हम प्रार्थना करते हैं कि निर्वैर सिंह की आत्मा को शांति मिले और उसके परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति मिले। साथ ही, आशा करते हैं कि सरकार और समाज खुले बोरवेलों को तुरंत सुरक्षित करने के लिए कदम उठाएगा ताकि भविष्य में ऐसी दुःखद घटनाओं को रोका जा सके।