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Thursday, 04 June 2026
राजनीति

दिल्ली नोएडा स्कूलों में लू से बचाव योजना ORS

author
Komal
संवाददाता
📅 27 April 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
दिल्ली नोएडा स्कूलों में लू से बचाव योजना ORS
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली में ओआरएस से बच्चों की सुरक्षा

दिल्ली के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में तेज गर्मी और लू की मार से बचाव के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल खत्म होने से पहले सभी बच्चों को ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन साल्यूशन) का घोल पिलाया जाए। यह कदम बच्चों को डीहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए बेहद जरूरी माना गया है।

मई की शुरुआत से ही दिल्ली में लू की घोषणा की जा चुकी है और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा गया है। ऐसे में बच्चों का ध्यान रखना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बन जाती है। ओआरएस घोल में नमक, चीनी और पानी का मिश्रण होता है जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को दूर करता है। दिल्ली के शिक्षा विभाग ने माना है कि यह छोटा सा कदम बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकता है।

प्रत्येक स्कूल में स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था की जाएगी जो बच्चों को ओआरएस पिलाने की जिम्मेदारी लेंगे। साथ ही, शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी बच्चे को गर्मी से संबंधित कोई समस्या दिखे तो तुरंत स्कूल प्रबंधन को सूचित करें। बुखार, चक्कर आना, बेहोशी जैसी स्थितियों में तुरंत चिकित्सक से संपर्क किया जाएगा।

दिल्ली के स्कूलों में एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है - कक्षाओं में पर्याप्त पानी की व्यवस्था। प्रत्येक कक्षा में ठंडे पानी के कूलर लगाए गए हैं ताकि बच्चे पूरे दिन पानी पी सकें। स्कूल के आंगन में छायादार जगहें बनाई गई हैं जहां बच्चे दोपहर की गर्मी से बच सकें। खेल के समय को भी सीमित किया गया है और सुबह-शाम के ठंडे समय में खेलकूद करवाया जाएगा।

नोएडा में स्कूल के समय में बदलाव

जहां दिल्ली ने ओआरएस घोल की व्यवस्था की है, वहीं नोएडा के सभी स्कूलों में शिक्षा विभाग ने कक्षाओं के समय में बदलाव किया है। नोएडा के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में सुबह 7:30 बजे कक्षाएं शुरू होंगी जबकि पहले 8 बजे से शुरुआत होती थी। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि बच्चों को सुबह की ठंडी हवा में स्कूल जाने और पढ़ने का मौका मिले।

इसके अलावा, नोएडा के स्कूलों में दोपहर 2 बजे के बाद कक्षाएं नहीं होंगी। यह व्यवस्था करते हुए शिक्षा विभाग ने माना है कि दोपहर का समय बेहद गर्म होता है और इस समय बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं है। नोएडा के कई स्कूलों में रविवार और सोमवार को अतिरिक्त अवकाश दिए जाने की घोषणा की गई है ताकि गर्मियों में बच्चों को आराम मिल सके।

नोएडा के स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के लिए पर्याप्त पानी, छाया और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए। स्कूल बसों में भी एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। शारीरिक शिक्षा के समय को कम किया गया है और वजन घटाने वाले व्यायाम को रोका गया है।

माता-पिता और स्कूल की जिम्मेदारी

लू की इस घातक गर्मी में बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि माता-पिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को स्कूल भेजते समय उन्हें हल्के और सूती कपड़े पहनाएं। स्कूल बैग में अतिरिक्त पानी की बोतल रखें ताकि बच्चे दिन भर पानी पी सकें।

स्कूलों को भी एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए जिसमें लू के दिनों में बच्चों की देखभाल की विस्तृत व्यवस्था हो। हर स्कूल में एक चिकित्सा कक्ष होना चाहिए जहां हीट स्ट्रोक के मरीजों का तुरंत इलाज किया जा सके। शिक्षकों को नियमित रूप से गर्मी से संबंधित बीमारियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

दिल्ली और नोएडा की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सकती है। गर्मियों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ओआरएस घोल, सही समय पर कक्षाएं, पर्याप्त पानी और छाया - ये सभी बातें मिलकर बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं।

गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन को मिलकर काम करना होगा। बच्चों को गर्मी की बीमारियों के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। अगर हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझे और उसे पूरा करे तो इस घातक लू से बच्चों को बचाया जा सकता है।