पहाड़ों पर बारिश का कहर, जम्मू-कश्मीर-हिमाचल में बादल फटे
मानसून के जोरदार आगमन के साथ उत्तरी भारत के पहाड़ी राज्यों में बेहद गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी वर्षा और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। सभी जिलाप्रशासनों को उच्च सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
उत्तराखंड राज्य इस मानसून में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है क्योंकि खराब मौसम के कारण उड़ान भरना असंभव हो गया है। धर्मशाला क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के कारण कई सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। छोटे गांवों तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है। स्थानीय प्रशासन राहत कार्य में लगा हुआ है लेकिन खराब मौसम के कारण काम धीमा हो गया है।
पहाड़ी राज्यों में विनाशकारी बारिश का असर
जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। श्रीनगर और गुलमर्ग के रास्तों पर जगह-जगह पत्थर गिर रहे हैं जिससे यातायात बाधित हुआ है। सेना और स्थानीय कर्मचारियों की टीमें मलबे को हटाने में लगी हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू और किन्नौर जिलों में भी भारी बारिश हो रही है। शिमला जिले में बादल फटने से छोटे नाले बड़ी नदियों में तब्दील हो गए हैं। कई पुरानी इमारतें इस तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हुई हैं।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों में बारिश की तीव्रता और भी बढ़ सकती है। जिला प्रशासनों को निम्न इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बहुत अधिक है इसलिए लोगों को सचेत रहने के लिए कहा गया है।
असम और पूर्वोत्तर में बाढ़ की विभीषिका
इस बीच असम राज्य में बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर है। ब्रह्मपुत्र नदी अपने उच्चतम स्तर पर बहने लगी है। करीब 47 हजार लोग बाढ़ के पानी में फंसे हैं। कई गांव पूरी तरह जलभराव से घिर गए हैं। लोग अपने घरों की छतों पर बैठे हैं और बचाव दल की प्रतीक्षा कर रहे हैं। असम के 12 जिले इस बार बाढ़ की चपेट में हैं। सबसे अधिक क्षति नगांव, गोलाघाट और डिब्रूगढ़ जिलों में हुई है।
आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में भी तेजी आई है। गत दो दिनों में अकेले असम में बिजली गिरने से कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है। ग्रामीण इलाकों में लोगों को आंधी-तूफान और बारिश से बचाव के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। लेकिन बहुत सी जगहों पर विद्युत व्यवस्था टूट जाने से जानकारी पहुंचना मुश्किल हो गया है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक और मुंबई में मानसून की मार
दक्षिण भारत में भी मानसून का असर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में भारी वर्षा हो रही है। मुंबई में लगातार बारिश से जलभराव की समस्या बढ़ गई है। कई इलाकों में 3 से 4 फीट तक पानी भर गया है। ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और बसें भी सड़कों पर चल नहीं पा रही हैं। स्कूल और कार्यालय कई दिन बंद रहे हैं।
कर्नाटक के तटीय जिलों में भी भारी बारिश की रिपोर्ट आ रही है। बेंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों में मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। वर्षा की मात्रा औसत से अधिक है। किसानों के लिए यह अच्छी खबर है लेकिन शहरी इलाकों में यह समस्या बन गई है।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बारिश से पहली बार थोड़ी राहत मिली है। भीषण गर्मी में कमी आई है। हालांकि, अभी बारिश सामान्य से कम है लेकिन मौसम विभाग के अनुसार आने वाले हफ्ते में इस क्षेत्र में भी बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी राज्य सरकारों को चेतावनी दी है कि वे आपातकालीन सेवाएं सक्रिय रखें। हेलीकॉप्टर, नाव और अन्य बचाव सामग्री तैयार रखी जाए। प्राकृतिक आपदाओं में प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे जरूरत से ज्यादा बाहर न निकलें और मौसम की चेतावनियों पर ध्यान दें।
इस मानसून के दौरान लोगों को अपने घरों की छतों और दीवारों की जांच करवानी चाहिए। नालियों को साफ रखना चाहिए ताकि पानी ठीक से बह सके। बिजली के उपकरणों को सूखी जगह पर रखें। खानपान में सावधानी बरतें क्योंकि ऐसे समय में बीमारियां तेजी से फैलती हैं। घर के आसपास मच्छरों के प्रजनन के लिए पानी जमा न होने दें।
मानसून देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की अधिकांश बारिश होती है और जल संसाधन की पूर्ति होती है। लेकिन असामान्य वर्षा से कई समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग सचेत रहें और आपदा से बचाव के नियमों का पालन करें। सभी को सलाह दी जाती है कि मौसम संबंधी सभी अलर्ट सरकारी एजेंसियों से प्राप्त करें और उन पर अमल करें।




