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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

लेबनान में हिज्बुल्लाह की 200 मीटर सुरंग, 50 ड्रोन बरामद

author
Komal
संवाददाता
📅 22 June 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 427 views
लेबनान में हिज्बुल्लाह की 200 मीटर सुरंग, 50 ड्रोन बरामद
📷 aarpaarkhabar.com

लेबनान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ते हुए एक बार फिर से भारी घटनाक्रम सामने आया है। इजरायल की सेना ने लेबनान के माजदल जौन गांव में आतंकवादी संगठन हिज्बुल्लाह की एक विशाल भूमिगत सुरंग का पता लगाया है। यह सुरंग लगभग 200 मीटर लंबी है और इसमें बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और 50 ईरानी ड्रोन मिले हैं। इस अभियान में इजरायली सेना ने 20 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है।

यह खोज मध्य पूर्व में चल रहे संकट को और गहरा करने वाली है। हिज्बुल्लाह की ऐसी भूमिगत सुरंगें दशकों से लेबनान में बनाई जा रही हैं। ये सुरंगें मुख्य रूप से इजरायल के विरुद्ध हमले का केंद्र मानी जाती हैं। माजदल जौन गांव दक्षिणी लेबनान में स्थित है, जहां हिज्बुल्लाह का मजबूत प्रभाव है।

इजरायली सैन्य अभियान की विस्तृत जानकारी

इजरायल की सेना ने अपने सैन्य अभियान के दौरान इस सुरंग को खोजा जो अत्यंत सुरक्षित तरीके से बनाई गई थी। यह सुरंग भूमिगत किलेबंदी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। इजरायली सेना की खुफिया जानकारी के अनुसार, यह सुरंग नेटवर्क कई महीनों से सक्रिय रूप से उपयोग में था।

जब इजरायली सैनिकों ने इस सुरंग में प्रवेश किया, तो उन्हें हिज्बुल्लाह के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। लड़ाई काफी तीव्र थी और इसमें 20 से अधिक हिज्बुल्लाह के सदस्य मारे गए। सुरंग के अंदर जो सामग्री मिली, वह बेहद खतरनाक और अत्याधुनिक थी।

50 ईरानी ड्रोन की खोज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ये ड्रोन ईरान द्वारा हिज्बुल्लाह को सरबराह किए गए थे। ये ड्रोन सरीख-मापूर्ण, हुथिस और अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा भी उपयोग किए जाते हैं। इन ड्रोनों की क्षमता काफी उन्नत है और ये दूर से ही निर्देशित किए जा सकते हैं।

ईरान की भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं

यह खोज ईरान द्वारा आतंकवादी संगठनों को सहायता प्रदान करने का पुष्ट प्रमाण है। ईरान लंबे समय से हिज्बुल्लाह को वित्तीय, सैन्य और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इन 50 ड्रोन की मौजूदगी दर्शाती है कि ईरान कितने बड़े पैमाने पर इस संगठन को समर्थन दे रहा है।

एंटी-टैंक मिसाइलें भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। ये मिसाइलें इजरायल के मुख्य टैंकों को नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। सुरंग में मिली अन्य सैन्य सामग्री में राइफलें, गोला-बारूद और विस्फोटक भी शामिल थे। इस पूरी स्थिति से यह स्पष्ट है कि हिज्बुल्लाह बड़े पैमाने पर सशस्त्र है और इजरायल के विरुद्ध किसी बड़ी घटना की तैयारी कर रहा था।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ईरान द्वारा हिज्बुल्लाह को दी जा रही सहायता इस प्रयास को असफल बना रही है।

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

यह घटना मध्य पूर्व में जारी संकट का एक नया अध्याय है। इजरायल और इसके विरोधी संगठनों के बीच संघर्ष दशकों पुराना है। लेकिन हाल के वर्षों में यह संघर्ष अधिक तीव्र हो गया है। गाजा की स्थिति, सीरिया में चल रहे युद्ध और लेबनान में हिज्बुल्लाह की बढ़ती ताकत ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है।

हिज्बुल्लाह न केवल लेबनान में बल्कि पूरे मध्य पूर्व में खतरा बना हुआ है। यह संगठन सीरिया, इराक और यमन में भी सक्रिय है। ईरान द्वारा इसे दी जा रही सहायता इसकी क्षमता को लगातार बढ़ा रही है। इजरायल इस खतरे को समझता है और इसीलिए वह इस तरह के सैन्य अभियान चला रहा है।

लेबनान की आम जनता इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत चुका रही है। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और लाखों लोग खतरे में हैं। देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर थी और यह संकट इसे और भी गहरा बना रहा है।

इजरायल की सेना इस सुरंग की खोज के साथ ही क्षेत्र में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगी। भविष्य में और भी ऐसी सुरंगें और छिपे हुए हथियार मिल सकते हैं। इस पूरी स्थिति का समाधान केवल तभी संभव है जब ईरान अपनी आतंकवादी संगठनों को सहायता प्रदान करना बंद करे और मध्य पूर्व में शांति की ओर कदम बढ़े।

इस घटना ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मध्य पूर्व में संकट कितना गहरा है और इसका समाधान कितना जटिल है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। लेबनान की जनता को शांति और स्थिरता की जरूरत है, न कि आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष की।