उत्तराखंड के छिपे हुए हिल स्टेशन जहां भीड़ नहीं है
अगर आप हर बार मनाली और शिमला जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाकर थक चुके हैं, तो यह लेख आपके लिए खास है। इस बार हम आपको उत्तराखंड के उन छिपे हुए हिल स्टेशनों के बारे में बताएंगे जहां भीड़ नहीं है, लेकिन खूबसूरती और शांति की कोई कमी नहीं है। ये जगहें आपको अपने आप से जुड़ने का मौका देंगी और प्रकृति की गोद में शांतिपूर्ण समय बिताने का अनूठा अनुभव देंगी।
चोपता - स्विजरलैंड ऑफ इंडिया
चोपता उत्तराखंड का वह रत्न है जिसे अभी भी ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। समुद्र तल से लगभग 2680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जगह देवप्रयाग जिले में आती है। यहां की हरियाली, घने बुग्याल और बर्फ से ढकी चोटियां आपको स्विजरलैंड जैसी महसूस कराएंगी। सर्दियों में यहां बर्फ गिरती है और पूरी घाटी सफेद चादर से ढक जाती है। यहां आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, चन्द्रशिला शिखर तक जा सकते हैं या बस प्रकृति की सुंदरता को निहार सकते हैं।
चोपता आने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से अक्टूबर तक है। यहां आप साधारण होटलों में ठहर सकते हैं जो बहुत सस्ते हैं। स्थानीय लोग बहुत मिलनसार हैं और आपको घूमने के लिए सही रास्ते बताएंगे। चोपता की खूबसूरती ऐसी है कि आप जब इसे देखेंगे तो अपने कैमरे में इसे कैद करने से नहीं रोक पाएंगे।
औली - स्कीइंग का स्वर्ग
औली चमोली जिले में स्थित है और यह भारत का एकमात्र प्रमुख स्कीइंग रिसॉर्ट है। समुद्र तल से 2500 से 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है। यह जगह एडवेंचर प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आप स्कीइंग कर सकते हैं, ट्रेकिंग कर सकते हैं या बस पहाड़ों की गोद में समय बिता सकते हैं।
औली में रहने के लिए कई होटल हैं और यहां की सुविधाएं भी अच्छी हैं। सर्दियों के मौसम में यहां विदेशी पर्यटकों की भीड़ होती है, लेकिन गर्मियों में यह जगह बहुत शांत रहती है। औली की एक खासियत यह है कि यहां से आप नंदा देवी पर्वत को देख सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां की सुंदरता अतुलनीय है।
बिनसर - शांति और प्रकृति का संगम
बिनसर जागेश्वर के पास स्थित है और यह जगह उत्तराखंड के सबसे कम भीड़ वाले स्थानों में से एक है। समुद्र तल से 2420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बिनसर चारों ओर से घने देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है। यहां की हवा इतनी शुद्ध है कि आपके फेफड़े खुशी से भर जाएंगे। बिनसर में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की सीमा है, इसलिए यहां वन्यजीवन को देखने का भी मौका मिलता है।
यहां आप बिनसर महादेव मंदिर जा सकते हैं, जो पुराने समय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। बिनसर में होटलों की संख्या कम है, लेकिन जो हैं वे बहुत आरामदायक हैं। यहां आप स्थानीय खाने का स्वाद ले सकते हैं और जनजातीय संस्कृति को समझ सकते हैं। बिनसर की यात्रा आपको बिल्कुल अलग ही दुनिया में ले जाएगी।
खिरसू - प्रेम की देवभूमि
खिरसू पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित है और यह जगह अपनी शांति के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तल से 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गांव देवदार और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है। खिरसू की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। यहां बिजली और पानी की समस्या नहीं है, लेकिन आप शहर की भाग-दौड़ से पूरी तरह दूर हो जाते हैं।
खिरसू में आप पहाड़ियों पर ट्रेकिंग कर सकते हैं, प्राचीन मंदिरों को देख सकते हैं और स्थानीय लोगों से उनकी जीवनशैली के बारे में जान सकते हैं। यहां की मिट्टी इतनी उपजाऊ है कि हर ऋतु में कोई न कोई फल या सब्जी तैयार होती है। खिरसू की महिलाएं बहुत कुशल हस्तकारी करती हैं और आप यहां से हाथ से बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं।
कैसे पहुंचें और क्या सावधानियां बरतें
ये सभी स्थान दिल्ली से 300-500 किलोमीटर की दूरी पर हैं। आप बस या अपनी गाड़ी से इन तक पहुंच सकते हैं। सर्दियों में इन रास्तों पर बर्फ पड़ती है, इसलिए उस समय जाते हुए सावधानी बरतें। स्थानीय मार्गदर्शक लगवाएं और हमेशा किसी को बताकर जाएं कि आप कहां जा रहे हैं। ये सभी जगहें प्रकृति के करीब हैं, इसलिए प्रकृति का सम्मान करें और कोई कचरा मत फेंकें। ये हिडन हिल स्टेशन आपको वह शांति देंगे जो आप शहर में कभी नहीं पा सकते। तो इस बार अपनी अगली छुट्टी की योजना इन जगहों के लिए बनाएं।




