🔴 ब्रेकिंग
तमिलनाडु: सीएम विजय को वाम दलों का अल्टीमेटम|कन्या राशि आज का राशिफल २० मई २०२६|राहुल गांधी ने UP चुनाव का बिगुल फूंका, महंगाई पर हमला|दिल्ली से भाजपा बेदखल होगी: ममता बनर्जी|ट्रंप के युद्ध अधिकार सीमित करने प्रस्ताव पास|नॉर्वे में मोदी ने पांच देशों के प्रमुखों से की मुलाकात|ट्रंप का विवादास्पद बयान: धर्म पर अमेरिका की बुनियाद|337 करोड़ चढ़ावा फिर भी मंदिर का हाल बेहाल|महिलाओं में UTI का खतरा: लक्षण और घरेलू उपाय|ट्विशा शर्मा मामले में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग|तमिलनाडु: सीएम विजय को वाम दलों का अल्टीमेटम|कन्या राशि आज का राशिफल २० मई २०२६|राहुल गांधी ने UP चुनाव का बिगुल फूंका, महंगाई पर हमला|दिल्ली से भाजपा बेदखल होगी: ममता बनर्जी|ट्रंप के युद्ध अधिकार सीमित करने प्रस्ताव पास|नॉर्वे में मोदी ने पांच देशों के प्रमुखों से की मुलाकात|ट्रंप का विवादास्पद बयान: धर्म पर अमेरिका की बुनियाद|337 करोड़ चढ़ावा फिर भी मंदिर का हाल बेहाल|महिलाओं में UTI का खतरा: लक्षण और घरेलू उपाय|ट्विशा शर्मा मामले में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग|
Wednesday, 20 May 2026
राजनीति

हिमंत बिस्व सरमा: कांग्रेस से भाजपा तक का सफर

author
Komal
संवाददाता
📅 05 May 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 703 views
हिमंत बिस्व सरमा: कांग्रेस से भाजपा तक का सफर
📷 aarpaarkhabar.com

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का राजनीतिक सफर असाधारण और विवादास्पद रहा है। कांग्रेस की पाठशाला से लेकर भाजपा की प्रयोगशाला तक, उन्होंने एक ऐसे सफर को तय किया है जो आधुनिक भारतीय राजनीति के लिए मिसाल बन गया है। उनके राजनीतिक रूपांतरण की कहानी केवल दलबदली नहीं है, बल्कि एक गहरे राजनीतिक दर्शन के परिवर्तन का प्रतीक है।

हिमंत बिस्व सरमा का जन्म राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता बिस्व सिंह असम के राजनीतिक दृश्य में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही हिमंत में राजनीति के प्रति गहरी रुचि थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ ही छात्र राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। असम विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे राजनीतिक जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू की।

कांग्रेस के साथ उनकी यात्रा उस समय शुरू हुई जब असम राजनीति में कांग्रेस एक प्रभावशाली शक्ति थी। उन्होंने युवा नेता के रूप में कांग्रेस के मंच से अपनी राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की। विधायक बनने और फिर मंत्री तक पहुंचने का सफर तय किया। कांग्रेस के पुराने भारतीय मूल्यों और संविधानवादी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा को संजोया। कांग्रेस की पाठशाला ने उन्हें तार्किक सोच, लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता की शিक्षा दी।

कांग्रेस से भाजपा का संक्रमण

हिमंत बिस्व सरमा का भाजपा में प्रवेश भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। २०१५ में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और यह निर्णय केवल दलबदली नहीं था, बल्कि एक सुचिंतित राजनीतिक चाल थी। भाजपा ने उन्हें वह मंच प्रदान किया जहां उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी हो सकती थी। असम में भाजपा के विस्तार की रणनीति में हिमंत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई।

भाजपा में आने के बाद हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी राजनीतिक दिशा में एक स्पष्ट परिवर्तन दिखाया। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता और समावेशी राजनीति के विचारों को छोड़कर उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा को अपनाया। इस परिवर्तन ने उन्हें भाजपा के कोर वोट बैंक के अधिक करीब ला दिया। उनके राजनीतिक भाषण, नीतियां और कार्यप्रणाली सभी में इस बदलाव को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

हिंदुत्व की विचारधारा और राजनीतिक विकास

भाजपा के प्लेटफॉर्म से हिमंत ने हिंदुत्व के मुद्दों पर मुखरता से अपनी बातें रखनी शुरू कीं। बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने एक कठोर रुख अपनाया। इस विषय पर उनकी सख्त नीतियां असम की जनता के बीच काफी लोकप्रिय साबित हुईं। असम की जनसंख्या की बढ़ती हुई चिंता और अवैध प्रवासन के सवाल पर उन्होंने भाजपा की विचारधारा के साथ तालमेल बिठाया।

हिमंत की इस नई राजनीतिक पहचान ने उन्हें कांग्रेस के अतीत और भाजपा की भविष्य की दृष्टि के बीच एक पुल बना दिया। उनका तर्क था कि असम की समस्याओं का समाधान कड़ी नीतियों और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से ही संभव है। आर्थिक विकास, अवैध प्रवासन पर नियंत्रण, और हिंदू संस्कृति के संरक्षण को लेकर उनकी नीतियां भाजपा की विचारधारा के साथ पूरी तरह से संरेखित हो गईं।

उनके नेतृत्व में असम में भाजपा का विस्तार अभूतपूर्व रहा। २०१६ के चुनावों में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए ने असम में सत्ता हासिल की और हिमंत को मुख्यमंत्री का कार्यभार सौंपा गया। उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और कार्यकुशलता ने भाजपा को असम में एक स्थापित ताकत के रूप में प्रतिष्ठित किया। राज्य की राजनीति में उनकी सक्रियता ने न केवल भाजपा को मजबूत किया, बल्कि असम की राजनीति को ही बदल कर रख दिया।

महानायक से महामायक तक की यात्रा

अब हिमंत बिस्व सरमा का नाम भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए वे योगी आदित्यनाथ की ही श्रेणी में आ गए हैं - एक मजबूत हाथ वाले नेता जो संगठन को सख्ती से चलाता है। उनकी लोकप्रियता केवल असम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी महत्ता स्वीकृत है।

हिमंत की प्रशासनिक क्षमता, राजनीतिक समझदारी और संगठनात्मक कौशल ने उन्हें भाजपा के कुलीन समूह में शामिल कर दिया है। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ती जा रही है। उनकी सफलता केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अन्य राज्यों में भी भाजपा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कांग्रेस की पाठशाला से मिली शिक्षा, चिंतन और राजनीतिक कौशल को भाजपा की प्रयोगशाला में रूपांतरित करने का यह सफर हिमंत का अपना है। उनका राजनीतिक विकास आधुनिक भारत की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। चाहे कोई उन्हें महानायक माने या आलोचक उन्हें महामायक कहें, पर असम और भारतीय राजनीति में उनकी उपस्थिति को नकारा नहीं जा सकता। उनकी यह यात्रा आज के राजनीतिक परिवर्तन के समय का एक जीवंत उदाहरण है।