🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Saturday, 04 July 2026
राजनीति

हांगकांग: ब्रिटेन से चीन को सौंपे जाने का इतिहास

author
Komal
संवाददाता
📅 01 July 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 478 views
हांगकांग: ब्रिटेन से चीन को सौंपे जाने का इतिहास
📷 aarpaarkhabar.com

आज का दिन हांगकांग के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन है। 1 जुलाई 1997 को ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन के हवाले कर दिया था। यह दिन न केवल हांगकांग के लिए बल्कि पूरे एशिया के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य के पतन का प्रतीक माना जाता है और साथ ही चीन की शक्ति का प्रदर्शन भी करता है।

हांगकांग पर 158 सालों तक ब्रिटिश शासन रहा। 1839 से शुरू होकर 1997 तक यह खूबसूरत शहर ब्रिटेन के कब्जे में रहा। इस लंबी अवधि में हांगकांग को एक आधुनिक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान हांगकांग एशिया का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र बन गया था।

ब्रिटिश राज्य का आगमन और हांगकांग की विजय

19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश साम्राज्य अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए एशिया में सक्रिय था। चीन में अफीम का व्यापार करने के लिए ब्रिटेन ने 1839 में पहला अफीम युद्ध शुरू किया। इस युद्ध में चीन की हार हुई और नानजिंग संधि के तहत हांगकांग को ब्रिटेन को सौंप दिया गया। हांगकांग में एक छोटी सी बस्ती थी, लेकिन इसका भौगोलिक स्थान बहुत महत्वपूर्ण था।

ब्रिटिश लोगों ने हांगकांग को एक प्रमुख बंदरगाह के रूप में विकसित किया। व्यापार के कारण यहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। 1860 के आसपास कोलोन प्रायद्वीप और किउलुन को भी ब्रिटेन ने अपने कब्जे में ले लिया। 1898 में न्यू टेरिटरीज को 99 साल के लिए लीज पर लिया गया। इन सभी क्षेत्रों को मिलाकर जो हांगकांग बना वह एक विश्व शक्ति का प्रतीक बन गया।

20वीं सदी में हांगकांग का विकास और महत्व

दूसरे विश्व युद्ध के दोनों तरफ से हांगकांग प्रभावित हुआ। जापानियों ने अस्थायी रूप से हांगकांग पर कब्जा कर लिया था। लेकिन युद्ध के बाद ब्रिटेन ने फिर से अपना नियंत्रण स्थापित किया। 1949 में चीन में साम्यवादी क्रांति हुई और लाखों लोग हांगकांग में शरण लेने आए। इससे हांगकांग की आबादी और अर्थव्यवस्था दोनों में तेजी से वृद्धि हुई।

1950 के दशक से 1980 के दशक तक हांगकांग विश्व अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। यहां की मुक्त बाजार नीति और व्यापारिक स्वतंत्रता ने इसे एशिया की जगमगाती शहर बना दिया। ऊंचे-ऊंचे भवन, आधुनिक बंदरगाह और तकनीकी उन्नति हांगकांग की पहचान बन गई। यह एशिया के चार एशियाई बाघों में से एक माना जाता था।

हांगकांग की वापसी और नए युग की शुरुआत

1980 के दशक में दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत हुई। चीन के महान नेता देंग जিओपिंग ने हांगकांग की वापसी के बारे में गंभीरता से बातचीत की। 1984 में चीन-ब्रिटेन के बीच संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें यह तय किया गया कि 1 जुलाई 1997 को हांगकांग को चीन को सौंप दिया जाएगा।

1997 में जब हांगकांग वापस चीन को सौंपा गया तो यह एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पल था। ब्रिटिश गवर्नर क्रिस पेटन हांगकांग छोड़ते हुए दुःखी दिख रहे थे। दूसरी ओर चीन के राष्ट्रपति जियांग जेमिन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस घटना को दुनिया भर में प्रसारित किया गया और लाखों लोगों ने इसे देखा।

हांगकांग की वापसी के साथ ही ब्रिटिश साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण अध्याय बंद हो गया। यह दिन न केवल हांगकांग के लिए बल्कि पूरे विश्व राजनीति के लिए एक निर्णायक मुहूर्त था। आज भी 1 जुलाई को हांगकांग में यह दिन विशेष तरीके से मनाया जाता है और इसे हांगकांग की मुक्ति दिवस के रूप में जाना जाता है।

158 साल की विदेशी हुकूमत के बाद हांगकांग अब चीन का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच 'एक देश, दो व्यवस्थाएं' का फॉर्मूला लागू किया गया। इसके तहत हांगकांग को अपनी आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने की अनुमति दी गई। यह व्यवस्था 2047 तक चलनी थी। हांगकांग के इतिहास का यह दौर वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण और रोचक रहा है।