भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए चिंता की बात है कि देश के शीर्ष 9 शहरों में आवास बिक्री में तेज गिरावट देखने को मिली है। Q1 2026 (जनवरी-मार्च) में घरों की बिक्री 18 तिमाहियों के बाद पहली बार 1 लाख यूनिट से नीचे चली गई है। यह गिरावट सालाना आधार पर 13% की दर्ज की गई है, जो प्रॉपर्टी मार्केट की वर्तमान स्थिति को दर्शाती है।
यह आंकड़ा खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साढ़े चार सालों से आवास बिक्री लगातार 1 लाख यूनिट के ऊपर बनी हुई थी। अब जब यह आंकड़ा इस मार्क से नीचे गिर गया है, तो बाजार में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
भारत के प्रमुख मेट्रो शहरों में घरों की मांग में आई यह गिरावट कई कारकों का नतीजा है। महंगाई की मार, ब्याज दरों में वृद्धि, और आर्थिक अनिश्चितता के कारण खरीदारों में संकोच देखने को मिल रहा है। विशेषकर मध्यम वर्गीय परिवार जो प्रॉपर्टी मार्केट के मुख्य ग्राहक हैं, वे अपनी खरीदारी के फैसलों को टाल रहे हैं।
मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता, अहमदाबाद और गुड़गांव जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में जब घरेलू आय पर दबाव बढ़ रहा है, तो लोग घर खरीदने में झिझक रहे हैं।
आवास ऋण की बढ़ती ब्याज दरें भी घरों की बिक्री में गिरावट का एक प्रमुख कारण हैं। जब से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है, तब से बैंकों ने भी अपनी होम लोन की दरें बढ़ा दी हैं। इससे EMI का बोझ बढ़ गया है और पहली बार घर खरीदने वाले खरीदारों के लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो खरीदार अपने फैसलों को टाल देते हैं और इंतजार करते हैं कि कहीं दरें फिर से गिर जाएं। यही स्थिति अभी भी बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिक्री में इस गिरावट के कारण अब घरों की कीमतें कम होंगी? रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, तुरंत तो कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि, अगर यह ट्रेंड जारी रहा और बिल्डरों के पास इन्वेंटरी का दबाव बढ़ता गया, तो वे कुछ छूट और ऑफर देने पर मजबूर हो सकते हैं।
फिलहाल तो बिल्डर कीमतें कम करने के बजाय विभिन्न स्कीमों और ऑफर्स के जरिए खरीदारों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। मगर अगर मांग में और गिरावट आई, तो कीमतों पर नरमी आ सकती है।
आने वाले महीनों में रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति काफी हद तक आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों के ट्रेंड पर निर्भर करेगी। अगर सरकार और RBI द्वारा कोई राहत की नीति अपनाई जाती है, तो स्थिति में सुधार हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर, यह गिरावट पहली बार घर खरीदने वालों के लिए एक अवसर भी हो सकती है, क्योंकि बिल्डर्स बेहतर डील और फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान ऑफर कर सकते हैं। मगर फिलहाल तो बाजार में इंतजार का माहौल दिख रहा है।
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