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Monday, 15 June 2026
स्वास्थ्य

पति की मौत के घंटे भर बाद पत्नी की भी मृत्यु

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 624 views
पति की मौत के घंटे भर बाद पत्नी की भी मृत्यु
📷 aarpaarkhabar.com

अयोध्या के एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना घटी है जिसने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। इस घटना ने सिद्ध कर दिया कि असली प्रेम और रिश्ते मृत्यु को भी नहीं मानते हैं। 80 वर्षीय भगवान तिवारी और उनकी 75 वर्षीय पत्नी साची तिवारी की कहानी न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक मार्मिक उदाहरण बन गई है।

यह घटना कुछ दिन पहले की है जब भगवान तिवारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह काफी समय से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी पत्नी साची तिवारी हर समय उनकी सेवा में लगी रहती थीं। घर के सभी सदस्यों ने भगवान तिवारी को बचाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन प्रकृति के सामने मानव शक्तिहीन है। भगवान तिवारी को आखिरकार अपनी आखिरी सांस ले लेनी पड़ी।

जब भगवान तिवारी के निधन की खबर घर में फैली, तो पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया। साची तिवारी पर यह झटका बेहद गहरा पड़ा। 55 वर्षों के विवाहित जीवन में वह अपने पति के साथ हर पल साथ रहीं थीं। उन्होंने अपने पति के साथ खुशियों के पल भी काटे थे और मुश्किलों के समय में भी कंधे से कंधा मिलाकर चला था। अचानक अपने जीवन साथी को खोने का दर्द उनके लिए असहनीय हो गया।

पति की अंतिम यात्रा के बाद की दुखद घटना

सुबह का समय था जब भगवान तिवारी की अंतिम यात्रा घर से निकली। पूरा गांव उनके साथ था। समाज के हर तरफ से लोग उन्हें अंतिम विदाई देने आए थे। घर में शोक का माहौल था। सभी परिवार के सदस्यों की आंखों में आंसू थे। साची तिवारी अपने पति को अंतिम विदाई देकर घर लौट आईं।

पति की अंतिम यात्रा के कुछ घंटों बाद ही साची तिवारी की तबीयत भी बिगड़ने लगी। पहले तो परिवार के सदस्यों ने सोचा कि यह शोक के कारण सामान्य असामान्यता है, लेकिन उनकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई। उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की गई, लेकिन दुर्भाग्यवश वह बचाई नहीं जा सकीं। शाम तक साची तिवारी ने भी अपनी आखिरी सांस ले ली। मानो उन्होंने अपने पति के साथ ही जीवन की यात्रा पूरी करने का फैसला कर लिया था।

पूरे गांव में शोक की लहर

जिस घर से सुबह पति की अंतिम यात्रा निकली थी, उसी घर से शाम को पत्नी की भी अर्थी उठी। यह दृश्य इतना भावुक था कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों की आंखों में आंसू आ गए। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं थी, बल्कि असली प्रेम की परिभाषा बन गई थी।

गांव के बुजुर्गों को यह दृश्य देखकर अपने जीवन काल में कभी ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। गांव में कहा जाने लगा कि प्रेम इतना गहरा हो सकता है कि वह मृत्यु को भी नहीं मानता। भगवान तिवारी और साची तिवारी का प्रेम-प्रसंग गांव की लोककथा बन गया। बच्चे भी इस कहानी को सुनकर भावुक हो जाते हैं।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया

परिवार के सदस्य अभी भी इस अचानक और दुहरे झटके से उबर नहीं पाए हैं। उनका कहना है कि उनके दादा-दादी का प्रेम इतना गहरा था कि वह एक दूसरे से अलग रह ही नहीं सकते थे। गांव के लोग भी इसी विचार से सहमत हैं। समाज के हर तबके के लोगों ने इस भावुक कहानी को अपने तरीके से साझा किया।

यह घटना हमें सिखाती है कि प्रेम केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह एक शक्ति है। असली प्रेम समय के साथ और भी मजबूत होता जाता है। भगवान तिवारी और साची तिवारी की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेम और समर्पण का एक उदाहरण बनकर रह जाएगी। उनकी अंतिम यात्रा दोनों की एक साथ हुई, जो शायद उन्हीं की मनोकामना थी।