IAS कलेक्टर ने प्रसूता पर की आपत्तिजनक टिप्पणी
मध्य प्रदेश के मैहर में एक घटना ने तमाम लोगों को हैरान कर दिया है। जिला कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करते हुए एक प्रसूता महिला पर ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। कलेक्टर की यह बातचीत न सिर्फ महिला सशक्तिकरण के खिलाफ मानी जा रही है बल्कि सरकारी अधिकारी के व्यवहार पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
यह पूरी घटना तब सामने आई जब कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी जिला अस्पताल में अचानक निरीक्षण के लिए पहुँचीं। अस्पताल के प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को देखते-परखते हुए वह एक महिला के पास पहुँचीं जिसने पाँच बच्चों को जन्म दिया था। इस दौरान कलेक्टर की उन महिला के प्रति जो बातचीत हुई वह न सिर्फ असंवेदनशील साबित हुई बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों के विरुद्ध भी प्रतीत हुई।
कलेक्टर ने महिला से पूछा कि "इस जमाने की होकर तुम 5 बच्चे कर रही हो।" यह बात न सिर्फ महिला को दुखी करने वाली थी बल्कि उसके व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप करने जैसी भी लगी। एक सरकारी अधिकारी का ऐसा व्यवहार किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता है। खासकर तब जब महिला अपनी स्वास्थ्य सेवा के लिए सरकारी अस्पताल में भरोसा करके आई हो।
कलेक्टर के सुपर वुमन अवतार की पोल खुली
बिदिशा मुखर्जी को अक्सर अपने कार्यकाल में सख्त अधिकारी के रूप में जाना जाता है। वह नियमित रूप से जिले भर में निरीक्षण करती हैं और सिस्टम की खामियों को उजागर करने का काम करती हैं। लेकिन इस बार उनका यह कदम उनकी छवि को धूमिल करने वाला साबित हुआ। अस्पताल के औचक निरीक्षण में जहाँ एक ओर स्वास्थ्य सेवा की कमियों का पता चला, वहीं दूसरी ओर एक सरकारी अधिकारी के व्यवहार की असंवेदनशीलता भी सामने आई।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के सामने महिला के साथ कलेक्टर की यह बातचीत बेहद शर्मनाक साबित हुई। एक पाँच बच्चों की माँ जो शारीरिक रूप से कमजोर हो और मानसिक दबाव में हो, उसके साथ किसी भी तरह की नकारात्मक बातचीत उचित नहीं है। महिला के परिवार, उसकी परिस्थितियों और कारणों को समझे बिना ऐसी टिप्पणी करना सरासर गलत है।
स्वास्थ्य सेवा की दुर्दशा का भी खुलासा
कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल की कई खामियां भी उजागर हुई हैं। अस्पताल के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी, उपकरणों की खस्ता हालत और स्वच्छता की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। मैहर जैसे छोटे जिले में जहाँ चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं, वहाँ अस्पताल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रसव के समय महिलाओं को सर्वोत्तम चिकित्सा सेवा देना एक महत्वपूर्ण दायित्व है। लेकिन जब अस्पताल स्वयं संसाधनों की कमी से जूझ रहा है तो गुणवत्तापूर्ण सेवा देना मुश्किल हो जाता है। कलेक्टर का निरीक्षण इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा कितनी खस्ता हाल में है।
महिला सशक्तिकरण पर सवाल
इस घटना के बाद महिला सशक्तिकरण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। एक महिला को उसके व्यक्तिगत निर्णयों के लिए, विशेषकर प्रजनन से संबंधित निर्णयों के लिए किसी भी तरह की आलोचना या आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं सुननी चाहिए। हर महिला को यह अधिकार है कि वह अपने परिवार के बारे में अपने निर्णय ले सके।
कलेक्टर की यह बात न सिर्फ उस प्रसूता महिला को बल्कि हजारों ऐसी महिलाओं को भी दुखी करने वाली है जिन्हें विभिन्न कारणों से अधिक बच्चे हुए हैं। गरीबी, शिक्षा की कमी और परिवार नियोजन की जानकारी न होना ऐसे कारण हैं जिनके कारण कई महिलाएं अधिक बच्चों की माँ बन जाती हैं। इन महिलाओं को दोषी मानना या ताने देना बिल्कुल सही नहीं है।
बिदिशा मुखर्जी एक IAS अधिकारी हैं और उन्हें अपने पद की गरिमा को बनाए रखना चाहिए। उन्हें सरकार के हर नागरिक के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार करना चाहिए। एक प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका दंड देने की नहीं बल्कि सेवा करने की है। यदि अस्पताल में कोई खामियाँ हैं तो उन्हें सुधारने का तरीका ढूंढना चाहिए, न कि गरीब महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करनी चाहिए।
यह घटना भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए एक सीख है कि वे अपनी शक्ति का दुरुपयोग न करें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो उचित कार्रवाई करनी चाहिए। समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना को बढ़ावा देना सभी का दायित्व है, विशेषकर उन लोगों का जो सत्ता में हैं।




