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Tuesday, 18 August 2026
समाचार

IAS रिंकू सिंह राही के पिता ने दिखाई सादगी की मिसाल

author
Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 6:26 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
IAS रिंकू सिंह राही के पिता ने दिखाई सादगी की मिसाल
📷 Aaj Tak

'न बैंक बैलेंस, न घर में पेंट, बस ईमानदारी की पूंजी' - IAS रिंकू की सादगी की गवाह कहानी

उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रिंकू सिंह 'राही' का हाल ही में दिया गया इस्तीफा प्रशासनिक गलियारों में तूफान की तरह चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन असली चर्चा तब शुरू हुई जब उनके पिता शिवदन सिंह मीडिया के सामने आए और अपने बेटे की ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की कि हर कोई दंग रह गया।

100 करोड़ रुपए के घोटाले का पर्दाफाश करने के दौरान 7 गोलियां खाने वाले इस साहसी अधिकारी के घर की हालत देखकर पता चल जाता है कि सच्ची ईमानदारी का मतलब क्या होता है। शिवदन सिंह के शब्दों में, 'न हमारे पास बैंक बैलेंस है, न घर में पेंट है, बस ईमानदारी की पूंजी है।'

IAS रिंकू सिंह राही के पिता ने दिखाई सादगी की मिसाल

घर की दीवारें बयान करती हैं ईमानदारी की कहानी

रिंकू सिंह राही के पिता ने जब मीडिया को अपना घर दिखाया तो वहां की तस्वीर किसी भी भ्रष्ट अधिकारी के घर से बिल्कुल अलग थी। घर की दीवारों पर सालों से पेंट नहीं हुआ है, नमी के धब्बे साफ दिखाई दे रहे हैं। यह वही घर है जहां एक IAS अधिकारी का परिवार रहता है - लेकिन यहां न तो कोई दिखावा है, न ही अकूत संपत्ति का कोई निशान।

शिवदन सिंह ने गर्व के साथ कहा, 'मेरा बेटा संघर्ष कर रहा है, लेकिन ईमानदारी के रास्ते से कभी नहीं हटा।' उनके इन शब्दों में एक पिता का गर्व साफ झलक रहा था।

काम न मिलने से दुखी होकर दिया इस्तीफा

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा देना कोई अचानक का फैसला नहीं था। सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद से ही उन्हें जानबूझकर साइडलाइन कर दिया गया था। उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, जिससे वे काफी परेशान थे।

100 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश करने के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था। 7 गोलियां लगने के बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा था, लेकिन सिस्टम द्वारा नजरअंदाज किए जाने से वे टूट गए।

पिता की गवाही - 'मेरा बेटा देशभक्त है'

शिवदन सिंह ने अपने बेटे को 'ईमानदार देशभक्त' करार देते हुए कहा कि रिंकू ने कभी भी गलत तरीकों से पैसा नहीं कमाया। उन्होंने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी उनका बेटा भ्रष्टाचार के रास्ते पर नहीं गया।

'हमारे यहां न तो कोई महंगी गाड़ी है, न ही कोई बड़ी प्रॉपर्टी। जो कुछ भी है वो सब साफ-सुथरी कमाई से है,' शिवदन सिंह ने गर्व से कहा।

प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी की चुनौती

रिंकू सिंह राही की कहानी आज के दौर में प्रशासनिक सेवा की वास्तविकता को दर्शाती है। जहां एक तरफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी ईमानदारी के रास्ते पर चलकर संघर्ष कर रहे हैं।

उनके पिता के शब्द, 'न बैंक बैलेंस, न घर में पेंट, बस ईमानदारी की पूंजी' आज के समय में एक मिसाल हैं। यह दिखाता है कि सच्ची सेवा का मतलब क्या होता है और एक ईमानदार अधिकारी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक सवाल है कि क्या हम अपने ईमानदार अधिकारियों की कद्र कर रहे हैं या उन्हें हताश होकर छोड़ने पर मजबूर कर रहे हैं।