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Thursday, 04 June 2026
टेक

IGI एयरपोर्ट पर देश की पहली एविएशन वेदर सुविधा

author
Komal
संवाददाता
📅 30 May 2026, 7:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 474 views
IGI एयरपोर्ट पर देश की पहली एविएशन वेदर सुविधा
📷 aarpaarkhabar.com

नई दिल्ली - इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) ने बृहस्पतिवार को 'स्काईकास्ट' नाम से एक अत्याधुनिक एविएशन वेदर इंटेलिजेंस और नाउकास्टिंग सुविधा का उद्घाटन किया है। यह देश की पहली ऐसी सुविधा है जो विमान संचालन को मौसम संबंधी चुनौतियों से बचाने में मदद करेगी।

इस नई तकनीक के साथ अब मौसम की अनिश्चितता उड़ानों में बाधा नहीं बन पाएगी। स्काईकास्ट सिस्टम रीयल टाइम में वायुमंडलीय स्थितियों की निगरानी करता है और तुरंत सटीक जानकारी प्रदान करता है। इससे पायलटों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

अत्याधुनिक तकनीक का परिचय

स्काईकास्ट सिस्टम भारत की सबसे उन्नत मौसम निगरानी प्रणाली है। इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उपग्रह तकनीक का संयोजन है। यह सिस्टम हवाई अड्डे के चारों ओर के मौसम की जानकारी हर मिनट अपडेट करता है। बादलों की गति, हवा की दिशा, दृश्यमानता और तापमान जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारी यह तुरंत प्रदान करता है।

इस तकनीक के विकास में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विशेषज्ञों की एक टीम ने कई वर्षों तक इस प्रणाली पर काम किया है। स्काईकास्ट न केवल दिल्ली के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है।

यह सिस्टम विश्व की सर्वश्रेष्ठ एविएशन वेदर प्रणालियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। अमेरिका, यूरोप और जापान में भी ऐसी ही प्रणालियां हैं, लेकिन स्काईकास्ट भारतीय जलवायु के अनुसार विशेष रूप से तैयार किया गया है।

विमान संचालन में क्रांति

स्काईकास्ट सिस्टम विमान संचालन की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बारिश, ओलावृष्टि, आंधी और धुंध जैसी मौसमी स्थितियां अक्सर उड़ानों में देरी या रद्द होने का कारण बनती हैं। स्काईकास्ट की मदद से पायलटों को सटीक जानकारी मिलेगी कि कहां उड़ान सुरक्षित है और कहां खतरनाक है।

यह सिस्टम विमानों को सुरक्षित रूप से उतरने में भी मदद करेगा। जेट स्ट्रीम, माइक्रोबर्स्ट और वर्टिकल विंड शियर जैसी घटनाएं विमान उतारते समय बहुत खतरनाक होती हैं। स्काईकास्ट इन सभी परिस्थितियों की पहले से ही जानकारी देगा।

डीआईएएल के अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम से उड़ानों की नियमितता में सुधार आएगा। पिछले कुछ सालों में मौसम की वजह से IGI एयरपोर्ट पर काफी उड़ानें प्रभावित हुई हैं। स्काईकास्ट से ऐसी घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों और अर्थव्यवस्था के लिए लाभ

इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ आम यात्रियों को मिलेगा। अब उड़ानें समय पर चल सकेंगी और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी। जो लोग महत्वपूर्ण कार्यों के लिए हवाई यात्रा करते हैं, उन्हें विश्वास रहेगा कि वे समय पर पहुंच जाएंगे।

आर्थिक दृष्टि से भी यह बहुत महत्वपूर्ण है। एयरलाइंस को अनावश्यक रद्दीकरण से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलेगा क्योंकि विदेशी पर्यटकों को विश्वास होगा कि उनकी यात्रा निर्बाध रहेगी।

स्काईकास्ट सिस्टम से एयरपोर्ट की दक्षता में भी वृद्धि होगी। जब मौसम संबंधी निर्णय सटीक होंगे, तो एयरपोर्ट के विभिन्न विभाग बेहतर तरीके से अपने संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इससे एयरपोर्ट की संचालन लागत में कमी आएगी।

भविष्य की राह

स्काईकास्ट सिस्टम का सफल संचालन अन्य भारतीय हवाई अड्डों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता के हवाई अड्डों पर भी ऐसी ही प्रणाली लगाई जा सकती है। इससे पूरे देश की हवाई परिवहन व्यवस्था में सुधार आएगा।

भारत के विमानन उद्योग में तेजी से विकास हो रहा है। हर साल लाखों लोग हवाई यात्रा करते हैं। स्काईकास्ट जैसी तकनीकें इस बढ़ते उद्योग को और भी मजबूत बनाएंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है।

आने वाले समय में स्काईकास्ट सिस्टम को और भी उन्नत बनाया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से इसकी भविष्य कथन क्षमता को बेहतर बनाया जा सकेगा। भारत इस क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बन सकता है।

कुल मिलाकर, स्काईकास्ट सिस्टम का शुभारंभ भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल सुरक्षा बढ़ाएगा बल्कि सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। आने वाले दिनों में देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी ऐसी तकनीकें दिखने की उम्मीद है।