भारत वियतनाम को देगा ब्रह्मोस मिसाइल
भारत अपनी घातक ब्रह्मोस मिसाइल को वियतनाम को निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। इंडोनेशिया के बाद यह दूसरा देश होगा जिसे भारत यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली देगा। इस संभावित सौदे की कीमत लगभग 5800 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह सौदा भारत और वियतनाम के बीच सैन्य सहयोग को एक नई परिभाषा देने वाला है।
भारत के रक्षा मंत्रालय ने इस संभावित सौदे पर काम शुरू कर दिया है। ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण वियतनाम को दिया जाएगा। यह मिसाइल प्रणाली वियतनाम की समुद्री रक्षा क्षमताओं को काफी हद तक मजबूत करेगी। दक्षिण चीन सागर में भारत और वियतनाम के सामरिक हितों को लेकर यह सौदा बहुत महत्वपूर्ण है।
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियतें और क्षमताएं
ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी गति लगभग 2.8 मैक है, जिसका अर्थ है कि यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज चलती है। यह मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। भारतीय डीआरडीओ और रूसी संस्थानों ने मिलकर इस तकनीकी चमत्कार को विकसित किया है।
ब्रह्मोस की रेंज लगभग 300 किलोमीटर तक की है। तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण में इसकी रेंज 180 से 280 किलोमीटर के बीच होती है। इस मिसाइल की सटीकता और विनाशक क्षमता अद्वितीय है। दुश्मन के किसी भी समुद्री लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता इसके पास है।
इस मिसाइल प्रणाली में अत्याधुनिक निर्देशन प्रणाली लगी होती है। इसमें जीपीएस और इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम का उपयोग किया जाता है। लक्ष्य को भेदने की इसकी क्षमता बहुत अधिक है। यह मिसाइल किसी भी मौसम में प्रभावी रहती है।
वियतनाम के लिए इस सौदे का महत्व
दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे को लेकर वियतनाम चिंतित है। चीन का दक्षिण चीन सागर पर अवैध दावा वियतनाम के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल वियतनाम को सैन्य रूप से काफी मजबूती देगी। इस मिसाइल से वियतनाम अपने समुद्री क्षेत्र की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेगा।
वियतनाम की नौसेना के लिए यह मिसाइल प्रणाली एक महत्वपूर्ण हथियार साबित होगी। तट-आधारित प्लेटफॉर्म से इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है। वियतनाम के तटीय क्षेत्रों में इसकी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह आदर्श है। इससे वियतनाम की रक्षा क्षमता में ढाई गुना तक की वृद्धि हो सकती है।
भारत और वियतनाम के बीच यह सौदा कई दशकों से चल रहे सामरिक सहयोग का आगे बढ़ना है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ते संबंध दक्षिण चीन सागर की भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेंगे।
भारत-वियतनाम सैन्य सहयोग और भविष्य की संभावनाएं
भारत और वियतनाम के बीच सैन्य सहयोग को लेकर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। दोनों देशों के नेताओं ने इस सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा इसी प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
भारत ने पहले इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात किया है। इंडोनेशियाई नौसेना इस मिसाइल का सफलतापूर्वक उपयोग कर रही है। वियतनाम को भी इसी तरह की सुविधा मिलने वाली है। इससे भारत अपनी रक्षा प्रौद्योगिकी को वैश्विक बाजार में प्रस्तुत कर रहा है।
भारत की रक्षा निर्यात नीति अब काफी आक्रामक हो गई है। भारत सरकार ने 2025 तक रक्षा निर्यात में 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। ब्रह्मोस मिसाइल इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की सामरिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए ऐसे सौदे बहुत जरूरी हैं। वियतनाम को ब्रह्मोस देने से भारत की क्षेत्रीय भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। चीन के बढ़ते सैन्य सरसामान के विरुद्ध भारत अपने मित्र देशों को सशक्त बना रहा है।
इस सौदे को अगर पूरा किया जाता है तो यह भारत-वियतनाम रिश्तों का एक मील का पत्थर साबित होगा। दोनों देशों के बीच विश्वास की नींव इससे और भी गहरी होगी। भारत के रक्षा उद्योग को भी इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। आने वाले दिनों में इस तरह के और भी सौदे हो सकते हैं।




