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Thursday, 04 June 2026
राजनीति

भारत-नेपाल बॉर्डर पर नए कस्टम नियमों से बवाल

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Komal
संवाददाता
📅 24 April 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
भारत-नेपाल बॉर्डर पर नए कस्टम नियमों से बवाल
📷 aarpaarkhabar.com

भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए सीमा शुल्क नियमों ने पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इन नियमों के तहत 100 रुपये से अधिक के सामान पर कड़े टैक्स लगाए जाने का फैसला किया गया है, जिससे आम जनता विशेषकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ नेपाल के मधेशी क्षेत्र के युवाओं ने काठमांडू की सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है और इसे गरीबों पर सीधा हमला बताया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि भारत इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि द्विपक्षीय संबंधों के हिसाब से इस तरह के नियम लागू करने से पहले दोनों देशों को परस्पर विचार-विमर्श करना चाहिए था। भारत के अनुसार, इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली आम जनता को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

नई कस्टम नीति के पीछे की वजह

नेपाल सरकार ने इन नए सीमा शुल्क नियमों को लागू करते समय यह तर्क दिया है कि इससे राजस्व संग्रह में बृद्धि होगी और आयात किए जाने वाले सामानों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, विरोधियों का मानना है कि यह नीति विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले सामान्य मानुष्यों के लिए बेहद कठोर है। छोटे-मोटे सामान खरीदने के लिए भी लोगों को भारी कर देने पड़ेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी।

इस नीति के विरोध में नेपाल के विभिन्न हिस्सों से कई समूह सामने आए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारी और आम नागरिक समूह इसे एक भेदभावपूर्ण नीति करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि भारत और नेपाल के बीच परंपरागत रूप से सीमावर्ती व्यापार का एक लंबा इतिहास रहा है और यह नीति उसी परंपरा को तोड़ने का प्रयास है। इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और आर्थिक सहयोग को नुकसान पहुंचेगा।

मधेशी क्षेत्र में भारी विरोध

नेपाल के मधेश क्षेत्र में इस नीति के खिलाफ बेहद तीव्र विरोध देखने को मिल रहा है। मधेशी युवा संगठनों ने इसे गरीबों पर अत्याचार बताते हुए कड़े शब्दों में इसकी आलोचना की है। काठमांडू सहित नेपाल के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे। विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों का मानना है कि यह नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में गरीबी को और बढ़ाएगी।

इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं और बुजुर्गों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को भारत से जरूरी सामान मंगवाने की परंपरा रही है, क्योंकि वहां की कीमतें अक्सर सस्ती होती हैं। लेकिन इन नए नियमों के आने से यह सुविधा छिन जाएगी। विरोधी यह भी कह रहे हैं कि सरकार को किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक नीति को लागू करने से पहले जनता से परामर्श लेना चाहिए था।

भारतीय विदेश मंत्रालय की स्थिति

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है कि भारत इस मुद्दे को काफी गंभीरता से देख रहा है। MEA के अनुसार, भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत और विश्वास पर आधारित होने चाहिए। किसी भी ऐसे कदम से जो दूसरे देश के नागरिकों को प्रभावित करता हो, दोनों देशों को पहले आपस में बातचीत करनी चाहिए।

भारत का मानना है कि इस तरह की एकतरफा नीति से भारत-नेपाल संबंधों में खटास आ सकती है। भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल के विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा है और अपनी चिंता व्यक्त की है। भारत चाहता है कि नेपाल सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की आर्थिक कठिनाई को ध्यान में रखते हुए इसे संशोधित करे।

इस पूरे विवाद से भारत-नेपाल संबंधों में एक नई कशमकश पैदा हुई है। आने वाले समय में दोनों देशों को इस मुद्दे को हल करने के लिए संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों की कल्याण और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना ही इस विवाद का सबसे बेहतर समाधान है।