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Saturday, 03 October 2026
समाचार

भारत टू-स्टेट फॉर्मूले का समर्थक: प्रिया रंगनाथन

भारत फलस्तीन समस्या के समाधान के लिए टू-स्टेट फॉर्मूले का समर्थन करता है। विदेश सचिव प्रिया रंगनाथन ने फलस्तीनी मंत्री से मुलाकात की।

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Komal
संवाददाता
📅 19 August 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 547 views
भारत टू-स्टेट फॉर्मूले का समर्थक: प्रिया रंगनाथन
📷 aarpaarkhabar.com

नई दिल्ली - भारत ने फलस्तीन समस्या के समाधान के लिए टू-स्टेट फॉर्मूले का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। भारत के विदेश सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने फलस्तीन की विदेश मंत्री शाहिन से मुलाकात की और इस बात पर जोर दिया कि गाजा की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यह मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय शांति के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।

भारत की फलस्तीन के प्रति प्रतिबद्धता

श्रीप्रिया रंगनाथन ने फलस्तीनी मंत्री के साथ अपनी बातचीत में स्पष्ट किया कि भारत फलस्तीनियों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि फलस्तीन समस्या का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान केवल टू-स्टेट फॉर्मूले के माध्यम से ही संभव है। इस फॉर्मूले के तहत इजराइल और फलस्तीन दोनों अपने-अपने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में साथ-साथ रह सकते हैं।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कई बार इस रुख को दोहराया है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है और यह विकासशील देशों के हितों का रक्षक माना जाता है। फलस्तीन के मुद्दे पर भारत की सहानुभूति सदा से ही रही है क्योंकि भारत स्वयं एक उपनिवेश से मुक्त हुआ है और इसलिए स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को समझता है।

गाजा की स्थिति पर गहरी चिंता

श्रीप्रिया रंगनाथन ने अपनी मुलाकात में गाजा क्षेत्र की मानवीय स्थिति के बारे में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। गाजा में आज की तारीख में लाखों लोग विस्थापन, भूख और अन्य कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। भारत इस बात में विश्वास करता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गाजा के नागरिकों की पीड़ा को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में बार-बार इस बात का जोर दिया है कि गाजा में मानवीय सहायता को निर्बाध रूप से पहुंचाया जाना चाहिए। नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति दायित्व निभाना अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक अभिन्न अंग है। भारत की विदेश नीति मानवतावादी सिद्धांतों पर आधारित है और यह सभी पक्षों से आत्मसंयम बरतने की अपील करता है।

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना

इस मुलाकात के दौरान भारत और फलस्तीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत बनाने की चर्चा हुई। भारत फलस्तीनी जनता के विकास में मदद के लिए विभिन्न परियोजनाओं और सहायता कार्यक्रमों में निवेश कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत ने अपने फलस्तीनी भाइयों को सहायता प्रदान की है।

श्रीप्रिया रंगनाथन ने फलस्तीनी मंत्री से कहा कि भारत फलस्तीन की आर्थिक और सामाजिक विकास में एक विश्वसनीय साथी है। भारत का दृष्टिकोण यह है कि केवल शांति के माध्यम से ही क्षेत्र में विकास संभव है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध भी क्रमशः बढ़ रहे हैं।

भारत की मध्यस्थता की भूमिका

भारत अपनी तटस्थ और संतुलित विदेश नीति के लिए विश्व स्तर पर माना जाता है। मध्य पूर्व के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। भारत न तो किसी एक पक्ष का समर्थक है और न ही किसी के विरुद्ध है, बल्कि वह सभी पक्षों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास करता है।

विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि सभी पक्ष संवाद के लिए तैयार हों और आपस में बातचीत करें। भारत इस बातचीत को सुविधाजनक बनाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।

भविष्य की दिशा

इस मुलाकात से यह संदेश जाता है कि भारत फलस्तीन समस्या के समाधान के लिए सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाए जाने में विश्वास करता है। भारत का मत है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानव अधिकारों के सिद्धांतों का पालन करते हुए ही समस्या का समाधान संभव है। भारत फलस्तीनी जनता के साथ खड़ा है और उनके न्यायसंगत अधिकारों के लिए लड़ने को प्रतिबद्ध है।

आने वाले दिनों में भारत फलस्तीन के साथ अपने राजनयिक संबंधों को और भी गहरा करेगा। साथ ही, भारत मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करता रहेगा। गाजा की स्थिति में सुधार लाने के लिए भारत सभी संबंधित पक्षों से तत्काल कार्रवाई की मांग करता है। यह मानवीय पीड़ा को कम करने का समय है और सभी को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।