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Thursday, 20 August 2026
समाचार

भारत ने UNSC सुधार में दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध किया

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Komal
संवाददाता
📅 15 April 2026, 11:25 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views

भारत का UNSC सुधार पर मजबूत रुख: दो-स्तरीय सदस्यता को बताया भेदभावपूर्ण

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों के मुद्दे पर भारत ने अपना स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया है। भारतीय राजदूत पी हरीश ने दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे भेदभावपूर्ण करार दिया है। साथ ही भारत ने जी4 समूह के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जो 15 साल तक वीटो अधिकार को स्थगित रखने की बात करता है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर UNSC में सुधार की मांग तेज होती जा रही है। भारत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव के बिना वैश्विक न्याय और समानता की स्थापना संभव नहीं है।

भारत ने UNSC सुधार में दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध किया

भारत की स्पष्ट स्थिति: समानता बनाम भेदभाव

राजदूत पी हरीश ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा है कि दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विचार ही गलत है। उनका तर्क है कि इस तरह की व्यवस्था से UNSC में मौजूदा असंतुलन और भी गहरा हो जाएगा। भारत का मानना है कि अगर स्थायी सदस्यता में विस्तार नहीं होगा तो यह सुधार अधूरा रह जाएगा।

भारतीय राजदूत ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की भेदभावपूर्ण सदस्यता व्यवस्था को भारत स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार, UNSC में सुधार का मुख्य उद्देश्य वैश्विक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाना है, न कि नई असमानताएं पैदा करना।

जी4 समूह का वीटो प्रस्ताव: एक संतुलित दृष्टिकोण

भारत ने जी4 समूह के उस प्रस्ताव का खुला समर्थन किया है जो वीटो अधिकार को 15 साल तक स्थगित रखने की बात करता है। जी4 समूह में भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील शामिल हैं। इन सभी देशों की UNSC में स्थायी सदस्यता की दावेदारी है।

यह प्रस्ताव काफी संतुलित माना जा रहा है क्योंकि इसमें तत्काल वीटो अधिकार की मांग नहीं की गई है। बल्कि 15 साल का समय देकर एक क्रमिक बदलाव का रास्ता सुझाया गया है। इससे मौजूदा स्थायी सदस्यों की चिंताओं को भी संबोधित किया जा सकता है।

| प्रस्ताव का पहलू | विवरण |

------
वीटो स्थगन अवधि15 साल
समर्थक देशभारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील
मुख्य उद्देश्यक्रमिक सुधार और संतुलन
लक्ष्यभेदभाव रहित सदस्यता

वैश्विक असंतुलन का मुद्दा

भारत का तर्क है कि वर्तमान UNSC संरचना 1945 की परिस्थितियों को दर्शाती है, जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती। आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देश आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन UNSC में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

राजदूत पी हरीश ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी श्रेणी में विस्तार के बिना कोई भी सुधार वास्तविक नहीं होगा। उनके अनुसार, दुनिया बदल गई है और UNSC को भी इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाना होगा।

भविष्य की राह: चुनौतियां और संभावनाएं

UNSC सुधार की राह आसान नहीं है। मौजूदा स्थायी सदस्य अपनी विशेषाधिकार स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, वैश्विक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत जैसे देशों की आर्थिक और राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है।

भारत का दृढ़ रुख इस बात का संकेत है कि वह अपनी उचित जगह के लिए संघर्ष जारी रखेगा। जी4 समूह का एकजुट रुख भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। 15 साल के वीटो स्थगन का प्रस्ताव एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो।

समय के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि UNSC सुधार की दिशा क्या होती है। भारत की स्थिति स्पष्ट है - समानता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित सुधार, न कि कोई अधकचरा या भेदभावपूर्ण समाधान। यह रुख न केवल भारत के हितों की रक्षा करता है बल्कि वैश्विक न्याय के बड़े सिद्धांत को भी मजबूत बनाता है।