🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Thursday, 30 July 2026
समाचार

भारतीय सेना ने बदला ड्रेस कोड कोलोनियल प्रथाएं खत्म

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 2:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 918 views
भारतीय सेना ने बदला ड्रेस कोड कोलोनियल प्रथाएं खत्म
📷 aarpaarkhabar.com

भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी यूनिफॉर्म नीति में बड़े बदलाव किए हैं। नई यूनिफॉर्म नीति 2026 के तहत सेना ने कोलोनियल काल की कई परंपराओं को खत्म कर दिया है और स्वदेशी तत्वों को शामिल किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय से भारतीय सेना की पहचान में एक नया आयाम जुड़ गया है। सेना ने अपनी विरासत से जुड़ते हुए आधुनिकता को भी अपनाया है।

भारतीय सेना ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि सेना की पहचान पूरी तरह भारतीय हो सके। ब्रिटिश काल के दौरान जो परंपराएं थोपी गई थीं, उन्हें अब समाप्त किया जा रहा है। इस बदलाव में बंदी जैकेट, बैटल ड्रेस और अन्य आधुनिक पोशाकें शामिल की गई हैं। सेना के इस कदम को राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

कोलोनियल परंपराओं को खत्म करने का फैसला

भारतीय सेना ने विभिन्न कोलोनियल परंपराओं को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसमें ड्रेस कोड से संबंधित कई नियम शामिल थे जो अंग्रेजी शासन के दौरान लागू किए गए थे। सेना के प्रस्ताव में 'रॉयल' शब्द को भी हटाया गया है, जिसका प्रयोग विभिन्न सेना विभागों के नाम में होता था। यह बदलाव भारत की स्वतंत्र पहचान को दर्शाता है।

सेना के इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण यह है कि पिछले 75 सालों में भारत ने अपनी एक मजबूत और स्वतंत्र पहचान बनाई है। अब समय आ गया है कि सेना की ड्रेस कोड और नीतियां भी भारतीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करें। नई व्यवस्था में पारंपरिक भारतीय वस्त्रों और आधुनिक डिजाइन का मिश्रण दिखेगा। यह संतुलन भारतीय संस्कृति और सेना की दक्षता दोनों को दर्शाता है।

इस सुधार के तहत सेना ने विभिन्न अवसरों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड तैयार किए हैं। जहां एक ओर अनुष्ठानिक कार्यक्रमों के लिए पारंपरिक तत्वों वाली पोशाकें रखी गई हैं, वहीं दूसरी ओर युद्धक्षेत्र के लिए व्यावहारिक और कार्यकुशल पोशाकें शामिल की गई हैं।

बंदी जैकेट और नए ड्रेस कोड की शुरुआत

नई नीति में बंदी जैकेट को मुख्य स्थान दिया गया है। यह जैकेट भारतीय परंपरा से प्रभावित है और आधुनिक सेना की आवश्यकताओं को पूरा करता है। बंदी जैकेट का डिजाइन ऐसा किया गया है कि यह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करे साथ ही सेना के सदस्यों को आराम और कार्यक्षमता भी प्रदान करे।

बैटल जैकेट को भी नई व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह जैकेट ऑपरेशनल ड्रेस के रूप में काम करता है और युद्धक्षेत्र में सेना के जवानों की सुरक्षा और गतिविधि को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें आवश्यक जेबें, पॉकेट्स और अटैचमेंट पॉइंट्स हैं जो सैनिकों की आवश्यकता को पूरा करते हैं।

सेना के विभिन्न रैंकों के लिए अलग-अलग रंग और डिजाइन की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था न केवल संगठन में स्पष्टता लाती है बल्कि सेना की एकता को भी दर्शाती है। प्रत्येक रैंक की अपनी विशिष्ट पहचान है जो नई ड्रेस कोड में संरक्षित रखी गई है।

आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संमिश्रण

भारतीय सेना के इस निर्णय को भारतीय सरकार और जनता ने सराहा है। यह कदम इस बात को दर्शाता है कि भारत अपनी विरासत को सम्मान करता है और साथ ही आधुनिकता को भी अपनाता है। नई यूनिफॉर्म नीति इसी संतुलन का एक सुंदर उदाहरण है।

सेना के प्रशिक्षण केंद्रों में इन नई पोशाकों के प्रयोग की व्यवस्था की जा रही है। सेना के सभी सदस्यों को इन नए ड्रेस कोड के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, सेना के विभिन्न इकाइयों को भी नई पोशाकों के लिए निर्दिष्ट समय सीमा में अपने स्टॉक को अपडेट करने के लिए कहा गया है।

इस सुधार से न केवल सेना की बाहरी पहचान बदलेगी बल्कि आंतरिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सैनिकों को अपने ड्रेस कोड में भारतीय तत्व देखकर गर्व महसूस होगा। यह उनके मनोबल को बढ़ाएगा और उनमें राष्ट्रीय चेतना को और मजबूत करेगा।

भारतीय सेना का यह कदम न केवल एक सांकेतिक बदलाव है बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है। भविष्य में अन्य सेनाएं और सरकारी संस्थान भी इसी तरह के सुधार कर सकते हैं। यह एक नई शुरुआत है जहां भारत अपनी पहचान को पूरी तरह भारतीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोलोनियल काल की समाप्ति और स्वदेशी परंपराओं की पुनः स्थापना भारत की स्वतंत्र यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।