भारतीय महिलाएं डिजिटल में आगे, इंटरनेट उपयोग दोगुना
भारतीय महिलाएं डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनकर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे छठे संस्करण (NFHS-6) की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि पिछले दो सालों में भारतीय महिलाओं का इंटरनेट उपयोग में भारी बदलाव आया है। जहां साल 2021 में सिर्फ 33.3 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल संख्या में वृद्धि दिखाता है, बल्कि भारतीय महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की कहानी भी बयां करता है।
यह सर्वे भारत में महिलाओं की डिजिटल साक्षरता और आर्थिक स्वतंत्रता के बारे में एक सकारात्मक संदेश देता है। महिलाओं का इंटरनेट तक पहुंच उनके लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक नेटवर्किंग के नए दरवाजे खोल रहा है। इंटरनेट के माध्यम से वे छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो रही हैं।
डिजिटल साक्षरता में महिलाओं की तेजी से प्रगति
NFHS-6 के डेटा से पता चलता है कि भारत में महिलाओं की डिजिटल दुनिया तक पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव आया है। दो वर्ष की अवधि में 33.3 प्रतिशत से 64.3 प्रतिशत तक की वृद्धि यह दर्शाती है कि देश की महिलाएं तकनीकी उन्नति के साथ तालमेल बिठा रही हैं। यह प्रगति विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां पहले महिलाओं को इंटरनेट से दूर रहना पड़ता था।
शहरी क्षेत्रों में महिलाओं का इंटरनेट उपयोग पहले से ही अधिक था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस बदलाव को देखना वास्तव में प्रभावशाली है। सरकार द्वारा चलाई गई डिजिटल इंडिया पहल, मुफ्त वाईफाई जोन, और सस्ते स्मार्टफोन की उपलब्धता ने इस क्रांति को संभव बनाया है। महिलाएं अब अपने घर बैठे ही ऑनलाइन काम कर रही हैं, पढ़ाई कर रही हैं और अपने व्यवसाय चला रही हैं।
इंटरनेट की सुविधा ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है। वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपने हुनर को बेच सकती हैं, ई-कॉमर्स में काम कर सकती हैं और दूरवर्ती शिक्षा के जरिए अपनी योग्यता को बढ़ा सकती हैं। यह न केवल आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकृति में भी वृद्धि लाता है।
बैंकिंग और वित्तीय समावेशन में महिलाओं की भागीदारी
NFHS-6 रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण खोज सामने आई है - बैंक खाते रखने वाली महिलाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह बदलाव प्रधानमंत्री जन धन योजना और अन्य वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है। जब महिलाओं के पास बैंक खाता होता है, तो वे आर्थिक सिद्धांतों को समझती हैं, बचत करती हैं और निवेश के बारे में सोचती हैं।
बैंक खाता महिलाओं को कई तरह के लाभ देता है। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिलता है, वे बिना किसी मध्यस्थी के अपना पैसा संभाल सकती हैं और साहूकारों के चंगुल से बाहर निकल सकती हैं। डिजिटल पेमेंट के माध्यम से उन्हें नकद लेन-देन करने की चिंता नहीं रहती, जिससे उनकी सुरक्षा भी बेहतर होती है।
मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट की सुविधा ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में और अधिक सक्रिय किया है। वे घर बैठे ही बिलों का भुगतान कर सकती हैं, ऑनलाइन खरीदारी कर सकती हैं और अपने खाते को मैनेज कर सकती हैं। यह आजादी और आत्मनिर्भरता की भावना लाता है।
मोबाइल फोन: सशक्तिकरण का माध्यम
मोबाइल फोन के उपयोग में भी महिलाओं की भागीदारी में जबरदस्त वृद्धि हुई है। स्मार्टफोन की कीमतें कम होने और डेटा की सुविधा सस्ती होने से अब ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के पास अपना मोबाइल फोन है। मोबाइल फोन अब केवल बात करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा, व्यवसाय, संचार और मनोरंजन का एक पूर्ण पैकेज बन गया है।
महिलाएं अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन कोर्स कर रही हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा कर रही हैं, छोटे कारोबार चला रही हैं और अपने परिवार के साथ वीडियो कॉल के जरिए जुड़ी रह रही हैं। विशेषकर महामारी के दौरान जब दुनिया बंद हो गई थी, तब मोबाइल फोन ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधियां जारी रखने में मदद की।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने सरकार के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी प्रेरित किया है कि वे महिलाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में निवेश करें। महिलाओं के लिए विशेष डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जहां उन्हें बेसिक कंप्यूटर ज्ञान, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल भुगतान के बारे में सिखाया जाता है।
यह डेटा भारत की महिलाओं की प्रगति की एक सकारात्मक तस्वीर दिखाता है। जब महिलाएं डिजिटल रूप से सशक्त होती हैं, तो पूरा समाज और अर्थव्यवस्था लाभान्वित होती है। महिलाएं न केवल अपने परिवार के लिए बेहतर निर्णय ले सकती हैं, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। NFHS-6 की यह रिपोर्ट साबित करती है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और महिलाएं इस प्रगति का अभिन्न अंग हैं।




