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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

इंदिरा गांधी की सेशेल्स यात्रा और भारत की कूटनीति

author
Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
इंदिरा गांधी की सेशेल्स यात्रा और भारत की कूटनीति
📷 aarpaarkhabar.com

इंदिरा गांधी की सेशेल्स यात्रा: एक ऐतिहासिक पल

यह वह दौर था, जब सेशेल्स को ब्रिटेन से आजादी मिले महज साढ़े तीन महीने हुए थे। 29 जून 1976 को स्वतंत्र हुआ यह नया-नया देश अभी अपनी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय पहचान की बुनियाद रख रहा था। ऐसे समय में भारत जैसी बड़ी लोकतांत्रिक ताकत की प्रधानमंत्री का वहां पहुंचना अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक संदेश था। इंदिरा गांधी की इस यात्रा को इतिहास में भारत की स्मार्ट फॉरेन पॉलिसी का एक शानदार उदाहरण माना जाता है।

सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित एक छोटा-सा द्वीपीय राष्ट्र है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बसा हुआ है। इस स्थान की भू-राजनीतिक महत्ता को समझना इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए बेहद जरूरी है। हिंद महासागर की शक्ति के संतुलन के लिए सेशेल्स की रणनीतिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण थी। भारत ने इस तरफ का ध्यान दिया और अपनी सामरिक दूरदर्शिता का परिचय दिया।

इंदिरा गांधी की सेशेल्स यात्रा का मुख्य उद्देश्य नवजात राष्ट्र के साथ संबंध स्थापित करना और उसे भारत के पक्ष में लाना था। लेकिन इस यात्रा का सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण हिस्सा था उन दो घंटों की मुलाकात, जिसमें भारत की कूटनीतिक चतुराई का पूरा खेल दिखता है।

फ्यूल डिप्लोमेसी: एक अनोखी कूटनीतिक रणनीति

जब इंदिरा गांधी की विमान सेशेल्स के लिए उड़ान भरी, तो उसके पास एक बेहद प्रभावी हथियार था - जहाज का ईंधन। इस समय के दौरान तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक थीं। भारत ने अपना तेल मुहैया करवाने का वादा करके सेशेल्स को एक आर्थिक सहारा दिया। यह सिर्फ एक व्यावहारिक सहायता नहीं थी, बल्कि एक सुविचारित कूटनीतिक कदम था।

भारत समझ रहा था कि नए देशों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ता है। ऐसे में अगर कोई बड़ा देश उन्हें ईंधन की आपूर्ति में मदद करता है, तो वह नई सरकार के लिए एक जीवनदान साबित हो सकता है। इंदिरा गांधी ने इसी बात को समझा और इसी आधार पर सेशेल्स के नेतृत्व के साथ मजबूत संबंध बनाए।

यह दृष्टिकोण आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। जब बड़ी शक्तियां छोटे देशों के साथ अपने संबंध बनाती हैं, तो वे उन्हें आर्थिक और सामरिक सहायता का लालच देती हैं। भारत ने भी यही किया, लेकिन इसे बेहद कुशलता से किया। ईंधन की आपूर्ति सिर्फ एक माध्यम था, असल लक्ष्य सेशेल्स को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाना था।

भारत की दूरदर्शी नीति और हिंद महासागर की सुरक्षा

इंदिरा गांधी के इस दो घंटे की मुलाकात के पीछे एक बड़ी रणनीति छिपी हुई थी। हिंद महासागर में सोवियत संघ और अमेरिका दोनों की सामरिक उपस्थिति बढ़ रही थी। ऐसे में भारत को अपने समुद्री इलाके की सुरक्षा के लिए छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के साथ अच्छे संबंध बनाने थे।

सेशेल्स के साथ भारत का यह रिश्ता न केवल द्विपक्षीय था, बल्कि यह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की नीति का एक हिस्सा था। भारत को एहसास था कि अगर यह नए देश किसी बड़ी शक्ति के प्रभाव में चला जाता है, तो वह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए इंदिरा गांधी ने सेशेल्स को भारत के करीब लाने के लिए यह कदम उठाया।

इस यात्रा ने साबित कर दिया कि भारत केवल बड़ी शक्तियों के साथ ही नहीं, बल्कि छोटे और नए देशों के साथ भी सार्थक संबंध बना सकता है। भारत की यह कूटनीति इतनी प्रभावी थी कि सेशेल्स भारत के पक्ष में चला गया। यह भारत की विदेश नीति का एक शानदार उदाहरण था।

आज के समय में जब भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है, तो इंदिरा गांधी की सेशेल्स यात्रा हमें सिखाती है कि कैसे स्मार्ट डिप्लोमेसी और सही समय पर सही कदम उठाने से अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत बनाए जा सकते हैं। भारत की इस नीति ने न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि यह साबित भी किया कि भारत विश्व राजनीति में एक जिम्मेदार और सजग खिलाड़ी है।