ईरान से तेल-गैस आयात: भारत को मिलेगा क्या लाभ
ईरान से कच्चे तेल के साथ अब भारत को प्राकृतिक गैस आयात का भी रास्ता खुल गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील के कारण भारत की ऊर्जा नीति में यह एक बड़ा बदलाव आने वाला है। ट्रंप प्रशासन द्वारा दिए गए इस मौके का भारत पूरा फायदा उठाने की तैयारी कर रहा है। आइए समझते हैं कि ईरान से तेल और गैस आयात से भारत को क्या-क्या लाभ मिलेंगे।
ईरान से तेल आयात का वर्तमान परिदृश्य
इस साल जनवरी में जब युद्ध विराम की घोषणा हुई, तो ट्रंप प्रशासन ने 20 मार्च को ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी थी। इस सुविधा का तुरंत लाभ उठाते हुए भारत ने ईरान के खार्ग द्वीप से 2,77,321 टन कच्चा तेल मंगवाया। इसके अलावा करीब बीस लाख टन अतिरिक्त कच्चा तेल दूसरे जहाज से भी आया।
जब भारत यह तेल आयात कर रहा था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी अधिक थे। 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचे हुए दाम की तुलना में फरवरी के 26 तारीख को यह दाम महज 69 डॉलर प्रति बैरल था। इस भारी कीमत के अंतर के बावजूद भारत ने ईरानी तेल खरीदना जारी रखा क्योंकि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत विश्व के सबसे बड़े तेल आयातकारी देशों में से एक है। देश की तेल की कुल मांग का करीब 85 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूरी होती है। ऐसे में ईरान जैसे देश से सस्ते दाम पर तेल खरीदना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। ईरान से तेल आयात करने से भारत के आयात बिल में काफी कमी आती है और विदेशी मुद्रा के भंडार में भी बचत होती है।
गैस आयात का नया अवसर और भारत के लिए महत्व
अब तक भारत मुख्य रूप से कतर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात कर रहा था। लेकिन ईरान से प्रतिबंध हटने के साथ ही भारत को इरानी गैस आयात का रास्ता भी मिल गया है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार हैं। दक्षिण पर्सियन गैस फील्ड में स्थित ईरान की गैस क्षमता अद्भुत है। भारत ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि ईरान से गैस पाइपलाइन के माध्यम से भी आ सकती है। पाकिस्तान से गुजरते हुए ईरान-भारत गैस पाइपलाइन प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, लेकिन अब इसे फिर से सक्रिय करने की संभावना बढ़ गई है।
प्राकृतिक गैस भारत की ऊर्जा मिश्रण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, पेट्रोकेमिकल्स और घरेलू उपयोग में प्राकृतिक गैस की भारी मांग है। ईरान से सस्ती गैस मिलने से भारत की उत्पादन लागत में कमी आएगी, जिससे आम जनता को भी सस्ती बिजली और उर्वरक मिल सकेंगे।
भारत की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
ईरान से तेल और गैस आयात में वृद्धि से भारत की अर्थव्यवस्था पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे। सबसे पहले, आयात बिल में कमी से भारत के चालू खाते के घाटे में सुधार होगा। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत किया जा सकेगा।
दूसरा, सस्ते ईरानी तेल और गैस से भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत में कमी आएगी। यह खासकर इस्पात, सीमेंट, रसायन और अन्य ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए लाभदायक होगा। इससे भारतीय निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
तीसरा, आंतरिक बिजली दर और उर्वरक दामों में कमी आ सकती है। सस्ती बिजली से छोटे और मध्यम उद्यमों को राहत मिलेगी। कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की सस्ताई से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
चौथा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। एकल स्रोत पर निर्भरता कम होगी। भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविधतापूर्ण बना सकेगा। यह भारत को भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव से कुछ सुरक्षा देगा।
पांचवां, भारत-ईरान व्यापार संबंध मजबूत होंगे। इसका दूसरे क्षेत्रों में भी सकारात्मक असर पड़ेगा। भारत ईरान से अन्य वस्तुओं का भी आयात कर सकता है और अपने निर्यात को बढ़ा सकता है।
छठा, क्षेत्रीय स्थिरता भी इससे लाभान्वित होगी। भारत के साथ आर्थिक संबंध बढ़ने से ईरान क्षेत्र में अधिक स्थिर रहेगा। दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच के सेतु के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ईरान से तेल और गैस आयात केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। भारत की आर्थिक नीति में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो आने वाले सालों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाएगा। पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति के बिना भारत की विकास दर को बनाए रखना संभव नहीं है। इसलिए ईरान जैसे भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता से सीधे संबंध स्थापित करना भारत की दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा है।




