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Saturday, 03 October 2026
विश्व

होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की टोल वसूली पर बवाल

author
Komal
संवाददाता
📅 31 May 2026, 6:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की टोल वसूली पर बवाल
📷 aarpaarkhabar.com

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और कतर के बीच गहरा विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर एक स्थायी ट्रांजिट फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसे ईरान "बारूदी सुरंग हटाने के पैसे" के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है। लेकिन कतर इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहा है और इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बता रहा है।

यह विवाद विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक को लेकर है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा और संचालन को लेकर हमेशा से अंतर्राष्ट्रीय चिंता रही है। ईरान के इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व और ईरान की मांग

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह स्ट्रेट ईरान और ओमान को अलग करता है और इसकी चौड़ाई लगभग 54 किलोमीटर है। विश्व के प्रमुख तेल निर्यातक देश जैसे सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल का अधिकांश भाग इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है।

ईरान ने इस स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों पर एक स्थायी ट्रांजिट शुल्क लगाने की बात कही है। ईरान का तर्क यह है कि इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए भारी खर्च आता है। इसलिए वह इस व्यय को जहाजों पर लगने वाले शुल्क के माध्यम से वसूल करना चाहता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत एक गैर कानूनी कदम माना जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, किसी भी देश को इस तरह की स्थायी टोल व्यवस्था लागू करने का अधिकार नहीं है। यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के तहत सभी जहाजों को इस स्ट्रेट से स्वतंत्र रूप से गुजरने का अधिकार है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है जहां सभी देशों के जहाजों को निर्बाध पारगमन की अनुमति दी जानी चाहिए।

कतर का विरोध और अस्थायी समाधान

कतर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ तुरंत अपनी असहमति जताई है। कतर के अधिकारियों का मानना है कि ऐसी किसी भी स्थायी टोल व्यवस्था से विश्व व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कतर अपने आप को इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक देश मानता है और उसे चिंता है कि ऐसी व्यवस्था से तेल और गैस का व्यापार प्रभावित होगा।

हालांकि, कतर पूरी तरह से इस मुद्दे को नकारने के लिए तैयार नहीं है। कतर ने एक समझदारी का सुझाव दिया है जिसके तहत अस्थायी आधार पर एक शुल्क लगाया जा सकता है। लेकिन यह शुल्क केवल समुद्री सुरक्षा और बारूदी सुरंगों को हटाने के कार्य तक सीमित होना चाहिए। कतर का यह प्रस्ताव इस बात को स्वीकार करता है कि होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा के मुद्दे सचमुच महत्वपूर्ण हैं।

कतर की यह स्थिति मध्य पूर्व में एक नाजुक संतुलन बनाए रखने का प्रयास है। एक ओर तो कतर होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के महत्व को समझता है, दूसरी ओर वह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों का भी पालन करना चाहता है। इसलिए कतर ने एक मध्यम मार्ग खोजने का प्रयास किया है जो सभी के लिए स्वीकार्य हो सके।

वैश्विक प्रभाव और भविष्य की चिंताएं

इस विवाद का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। विश्व के कई प्रमुख शक्तिशाली देशों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। अमेरिका, यूरोप और एशियाई देश - सभी को चिंता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल की आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट आएगी तो तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी।

भारत जैसे देशों के लिए यह विवाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए मध्य पूर्व पर बहुत अधिक निर्भर करता है। होर्मुज स्ट्रेट से भारत के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर इस मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है तो भारत की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।

इस समय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को हल करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन ईरान और कतर के बीच वार्ता का माध्यम बन सकते हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग को लेकर किसी भी तरह की असहमति विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सभी पक्षों को समझदारी और संवाद के माध्यम से इस मुद्दे को सुलझाना होगा।