🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Sunday, 05 July 2026
विश्व

ईरान-अमेरिका तनाव: हमलों पर भड़का ईरान

author
Komal
संवाददाता
📅 27 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
ईरान-अमेरिका तनाव: हमलों पर भड़का ईरान
📷 aarpaarkhabar.com

तेहरान - दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद तनाव की स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान ने अमेरिका पर कठोर आरोप लगाते हुए कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी तरह से भरोसे के लायक नहीं है। ईरानी सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि वह इन हमलों का उचित जवाब देगी। इस बीच, लंबे समय से बंद रहने वाली इंटरनेट सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

ईरान के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका की ये कार्रवाइयां अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष शिकायत दर्ज की है। ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि इस तरह की आक्रामक नीति केवल क्षेत्र में और अधिक अस्थिरता पैदा करेगी।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने बयान में दावा किया है कि ये हमले ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए किए गए थे। हालांकि, ईरान का कहना है कि इन हमलों का कोई सैन्य लक्ष्य नहीं था और ये केवल आबादी वाले इलाकों में किए गए हमले हैं। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

अमेरिका पर ईरान का कड़ा रुख

ईरान की सरकार ने अमेरिका को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने एक जनसभा में कहा कि अमेरिका सदैव से ही बदनीयत रहा है और वह कभी भी किसी समझौते का पालन नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करना चाहिए। ईरानी संसद ने भी एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें अमेरिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

ईरान के इस्लामिक गार्डस कोर ने घोषणा की है कि वह आने वाले दिनों में अमेरिकी सेनाओं पर प्रत्यक्ष हमला करेगा। इन हमलों का स्वरूप क्या होगा, इसे लेकर अभी स्पष्टता नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार ये ड्रोन और मिसाइल हमले हो सकते हैं। ईरान के सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है।

ंअंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा है कि इस तरह के सैन्य कार्रवाइयां मानवता के लिए खतरनाक हैं। इसी बीच, रूस और चीन ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है। दोनों देश ईरान को अपना समर्थन दे रहे हैं।

इंटरनेट सेवाओं की बहाली और इसके असर

ईरान में हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पिछले दो महीने से इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया था। अब धीरे-धीरे इंटरनेट सेवाओं को बहाल किया जा रहा है। यह कदम ईरानी सरकार ने जनता को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए उठाया है। हालांकि, सरकार ने कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अभी भी ब्लॉक रखा है।

इंटरनेट सेवाओं की बहाली से लोगों को अपने प्रियजनों से संपर्क स्थापित करने का मौका मिल रहा है। व्यवसायी वर्ग को भी इससे लाभ हो रहा है। हालांकि, इंटरनेट की वापसी से एक नकारात्मक पहलू भी है - अब सरकार सभी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरानी सरकार इंटरनेट की निगरानी के जरिए विरोधी आवाजों को दबाना चाहती है।

इंटरनेट की बहाली के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को ईरान से अधिक सूचनाएं मिलने लगी हैं। विभिन्न समाचार संस्थाएं अब सीधे ईरान से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इससे ईरान की आंतरिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ रही है। हालांकि, ईरानी सरकार इस सूचना प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।

क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की चिंताएं

ईरान-अमेरिका तनाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इस क्षेत्र के अन्य देश भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों ने अपनी सेनाओं को सतर्क कर दिया है। तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव बढ़ता रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित हो सकती है। यह जलमार्ग विश्व के तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। भारत जैसे देश, जो तेल के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं, को भी इससे नुकसान हो सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच इस तनाव को सुलझाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थों की आवश्यकता है। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता की खबर नहीं है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर दृढ़ हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। विश्व को उम्मीद है कि दोनों देश तुरंत वार्ता का रास्ता अपनाएंगे। शांति ही एकमात्र विकल्प है जो इस संकट को टाल सकता है।