जैन व्यापारी को छह साल तक मछली खिलाई, अशोक खरात गिरफ्तार
जैन व्यापारी को छह साल तक 'समुद्री पौधा' बताकर खिलाई मछली, अशोक खरात की धोखाधड़ी का खुलासा
महाराष्ट्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने धार्मिक आस्था के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी की नई मिसाल पेश की है। खुद को बाबा बताने वाले अशोक खरात पर आरोप है कि उन्होंने जैन समुदाय के व्यापारियों को मछली को 'समुद्री पौधा' बताकर छह साल तक खिलाया और इसके एवज में लाखों रुपये वसूले।
जैन धर्म में मांसाहार सख्त वर्जित है और समुदाय के लोग पूर्ण रूप से शाकाहारी होते हैं। इसी धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर खरात ने यह घिनौना खेल खेला।

धोखाधड़ी की पूरी कहानी
जांच में सामने आया है कि अशोक खरात ने जैन व्यापारियों से संपर्क साधा और खुद को एक धर्मगुरु के रूप में पेश किया। उन्होंने व्यापारियों को बताया कि वे एक विशेष प्रकार का 'समुद्री पौधा' खिला रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।
वास्तव में यह समुद्री पौधा मछली थी, जिसे खरात ने विभिन्न तरीकों से पकाकर परोसा। जैन व्यापारियों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वे अपने धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत मांसाहार कर रहे हैं।
छह साल चला धोखा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह धोखाधड़ी छह साल तक चलती रही। एक व्यापारी तो पूरे छह साल तक खरात के संपर्क में रहा और नियमित रूप से इस तथाकथित 'समुद्री पौधे' का सेवन करता रहा।
इस दौरान खरात ने इन व्यापारियों से लाखों रुपये वसूले। उन्होंने अपनी सेवाओं के लिए मोटी रकम ली और व्यापारियों को यकीन दिलाया कि यह विशेष आहार उनके व्यापार में भी सफलता दिलाएगा।
गिरफ्तारी और अन्य मामले
अशोक खरात को 17 मार्च को नासिक से गिरफ्तार किया गया। पुलिस की जांच में यह धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि खरात के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं है।
उनके नाम पर यौन उत्पीड़न के 11 मामले भी पहले से दर्ज हैं। यह दिखाता है कि खरात लंबे समय से लोगों की धार्मिक भावनाओं का गलत फायदा उठा रहा था।
समुदाय में आक्रोश
यह खुलासा सामने आने के बाद जैन समुदाय में तीव्र आक्रोश है। समुदाय के लोग इस धोखाधड़ी को अपने धर्म और परंपराओं का अपमान मान रहे हैं। कई लोगों ने सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जैन समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा है कि यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं बल्कि उनकी धार्मिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ का है। उन्होंने अन्य समुदायों से भी सावधान रहने की अपील की है।
यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ लोग धर्म और आस्था के नाम पर मासूम लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि सभी पीड़ितों को न्याय मिलेगा।




