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Saturday, 03 October 2026
विश्व

ट्रंप की ‘न’ के बाद व्हाइट हाउस की ‘हां’: वेंस संभालेंगे ईरान वार्ता

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Komal
संवाददाता
📅 20 April 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ट्रंप की ‘न’ के बाद व्हाइट हाउस की ‘हां’: वेंस संभालेंगे ईरान वार्ता
📷 aarpaarkhabar.com

डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के विरोधाभासी बयानों के बाद अब साफ हो गया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ही ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता की कमान संभालेंगे। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा था कि वेंस इस्लामाबाद वार्ता में शामिल नहीं होंगे। लेकिन अब व्हाइट हाउस की आधिकारिक घोषणा के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि इस महत्वपूर्ण राजनयिक मिशन में उपराष्ट्रपति की उपस्थिति होगी।

यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है। अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संवाद को लेकर दुनियाभर में सवालिया निशान उठे हुए थे। ट्रंप की शुरुआती आपत्ति से कूटनीतिक हलकों में काफी अनिश्चितता का माहौल बन गया था। लेकिन व्हाइट हाउस की यह घोषणा इस अनिश्चितता को दूर करती नजर आ रही है।

ट्रंप के बयान में आई पलट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में माना था कि सुरक्षा और कई अन्य महत्वपूर्ण कारणों से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद की वार्ता में शामिल नहीं हो सकते। उनका मानना था कि इस तरह की संवेदनशील बातचीत में उपराष्ट्रपति की सीधी भागीदारी से कुछ जोखिम हो सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा था कि वे अपने विश्वस्त सलाहकारों के माध्यम से इन वार्ताओं पर नजर रखेंगे।

हालांकि, मात्र कुछ घंटों बाद व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने एक औपचारिक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने इस निर्णय को दोबारा देखा है। उन्होंने माना है कि वेंस की व्यक्तिगत उपस्थिति इन बातचीतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह निर्णय परिवर्तन राजनयिक जगत में काफी चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप को अपनी वरिष्ठ टीम ने इसका महत्व समझाया होगा।

वेंस की महत्वपूर्ण भूमिका

जेडी वेंस को ट्रंप प्रशासन में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वह न केवल उपराष्ट्रपति हैं बल्कि राष्ट्रपति के विश्वसनीय सहयोगी भी हैं। उनके पास अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा मामलों का विस्तृत अनुभव है। पाकिस्तान और ईरान जैसे संवेदनशील देशों के साथ वार्ता के लिए वेंस को सबसे उपयुक्त माना जाता है।

इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में वेंस की मौजूदगी का मतलब है कि अमेरिकी सरकार इस मिशन को कितनी गंभीरता से ले रही है। ईरान के साथ संबंधों को सुधारने के लिए दोनों देशों के बीच एक लंबे अरसे से तनाव चल रहा है। इस संदर्भ में वेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। वह ट्रंप की ओर से सीधे संदेश पहुंचाने वाले व्यक्ति होंगे।

पाकिस्तान में होने वाली यह वार्ता दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है। भारत समेत अन्य देशों की नजरें इस बातचीत पर लगी हुई हैं। इस बैठक में क्या निर्णय लिए जाएंगे, इसका असर पूरे एशिया क्षेत्र पर पड़ सकता है।

ईरान के जवाब का इंतजार

अब सभी की नजरें ईरान के आधिकारिक जवाब की ओर लगी हुई हैं। ईरानी सरकार अभी तक इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है। तेहरान में राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ईरान सरकार इस बैठक के लिए शर्तें तय कर रही है। उनका मानना है कि अमेरिका को अपने पिछले रुख से पूरी तरह हटना होगा और ईरान के साथ एक समान आधार पर बातचीत करनी होगी।

ईरान की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया इन वार्ताओं के भविष्य को निर्धारित करेगी। यदि ईरान सकारात्मक रुख अपनाता है तो क्षेत्र में एक नया दौर शुरू हो सकता है। लेकिन यदि तेहरान कठोर रुख बरतता है तो ये वार्ताएं लंबी और जटिल साबित हो सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, ईरानी प्रशासन इस बैठक को एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है। अगर सही तरीके से बातचीत हो तो दोनों देशों के बीच का रिश्ता बेहतर हो सकता है। आने वाले दिनों में जब ईरान अपना जवाब देगा तो निश्चित रूप से क्षेत्रीय राजनीति में परिवर्तन आएंगे। वर्तमान में यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी ओर से सकारात्मक कदम उठा रहा है और ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार है। उम्मीद है कि ये वार्ताएं शांति और स्थिरता का एक नया दौर ला सकेंगी।