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Saturday, 03 October 2026
स्वास्थ्य

कर्नाटक: डीके शिवकुमार ने घायलों से मुलाकात की

author
Komal
संवाददाता
📅 30 April 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 947 views
कर्नाटक: डीके शिवकुमार ने घायलों से मुलाकात की
📷 aarpaarkhabar.com

बंगलूरू में हुई भीषण घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। भारी बारिश के दौरान एक प्रमुख अस्पताल की दीवार अचानक ढह गई, जिसमें सात लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार तुरंत अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने घायलों का हौसला बढ़ाया और उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए सरकारी मदद सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

बंगलूरू में हुई दीवार गिरने की भीषण घटना

गत रविवार को बंगलूरू के एक प्रसिद्ध अस्पताल में अप्रत्याशित दुर्घटना हुई। शहर में आई भारी बारिश के चलते अस्पताल के एक पुराने हिस्से की दीवार अचानक टूटकर गिर गई। इस घटना में कई लोग दीवार के नीचे दब गए। तुरंत ही स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। दीवार की मलबे के नीचे से लगातार लोगों को निकाला जाता रहा।

घटना के समय अस्पताल में कई मरीज और स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद थे। दीवार गिरने से अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। अस्पताल के प्रबंधन ने तुरंत सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। बचाव दल रात भर काम करते रहे और लापता लोगों को तलाशने के लिए भारी मशीनें लगाई गईं। यह बिल्कुल स्पष्ट था कि बंगलूरू को एक बड़ी मानवीय त्रासदी का सामना करना पड़ा है।

डीके शिवकुमार ने दिखाई संवेदनशीलता

घटना की खबर मिलते ही कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार तुरंत अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने घायलों से एक-एक करके मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी ली। शिवकुमार ने घायलों के पास बैठकर उन्हें दिलासा दिया और कहा कि सरकार उनके इलाज के लिए सभी संभव सहायता प्रदान करेगी।

डिप्टी सीएम ने अस्पताल के प्रबंधन और स्वास्थ्य अधिकारियों से भी मिलकर राहत कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सेवा दी जाए और किसी भी कमी न रहने दी जाए। शिवकुमार ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और सरकार इसकी जांच करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि घायलों के चिकित्सा खर्चों का वहन सरकार करेगी और कोई भी व्यक्ति इस संकट में अकेला नहीं रहेगा।

प्रधानमंत्री का दुःख और सहायता की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह घटना हृदय को तोड़ने वाली है और हमारी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रिय जनों को खो दिया है।

पीएम मोदी ने घोषणा की कि मृतकों के परिवारों को पचास लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और गंभीर रूप से घायलों को पच्चीस लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, हल्के घायलों के लिए भी सरकार द्वारा चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कर्नाटक सरकार से कहा है कि इस घटना की गहन जांच की जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

भारी बारिश और अवसंरचना की समस्या

यह घटना दक्षिण भारत में मौसमी बारिश के मौसम के दौरान हुई है। बंगलूरू में पिछले कुछ दिनों में लगातार भारी बारिश हो रही थी, जिसकी वजह से शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल की वह दीवार काफी पुरानी थी और भारी बारिश के कारण उसकी नींव कमजोर हो गई थी, जिसके फलस्वरूप वह अचानक ढह गई।

शहरी अवसंरचना की यह समस्या केवल बंगलूरू में ही नहीं बल्कि पूरे देश में एक बड़ा मुद्दा बन गई है। कई पुरानी इमारतें और सार्वजनिक संरचनाएं जर्जर हालत में हैं। इस घटना के बाद सरकार को सभी सार्वजनिक इमारतों और विशेषकर अस्पतालों की संरचनात्मक मजबूती की जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

राहत और पुनर्निर्माण की दिशा में कदम

घटना के तुरंत बाद से ही स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुट गया है। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया है और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सेवा दी जा रही है। सरकार ने एक राहत शिविर खोला है जहां मृतकों के परिवारों को मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है।

अस्पताल के प्रबंधन ने घोषणा की है कि वे जल्द ही क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण करेंगे और आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार नई संरचना तैयार करेंगे। इस घटना के बाद बंगलूरू में सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अपनी इमारतों की संरचनात्मक ऑडिट करने के लिए कहा गया है।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि हमें अपनी सार्वजनिक अवसंरचना पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं के युग में, हमारी इमारतें और संरचनाएं पर्याप्त रूप से मजबूत होनी चाहिए। कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार दोनों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक उपाय अपनाने चाहिए।