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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

केरल: कांग्रेस का विरोध, 2018 बाढ़ पर मंत्री के बयान से विवाद

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Komal
संवाददाता
📅 13 April 2026, 6:41 PM ⏱ 1 मिनट 👁 464 views

केरल में बाढ़ प्रबंधन विवाद: कांग्रेस का आरोप, मंत्री की नीतियों से हुई 500 लोगों की मौत

केरल की राज्य राजधानी तिरुवनंतपुरम में सोमवार को एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। 2018 की विनाशकारी बाढ़ के प्रबंधन को लेकर सामने आए एक कथित ऑडियो क्लिप के बाद कांग्रेस और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें विनाशकारी योजनाओं का समर्थक बताया है।

इस विवाद का केंद्रबिंदु 2018 में आई उस भयानक बाढ़ है जिसमें 500 से अधिक लोगों की जानें गई थीं और राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मंत्री के गलत निर्णयों और नीतियों के कारण यह त्रासदी और भी भयानक हो गई।

केरल: कांग्रेस का विरोध, 2018 बाढ़ पर मंत्री के बयान से विवाद

प्रदर्शनकारियों की मांगें और आरोप

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने प्रदर्शन में मंत्री कृष्णनकुट्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मंत्री जी की नीतियों और फैसलों का सीधा संबंध 2018 की बाढ़ में हुई अकल्पनीय तबाही से है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अगर सही समय पर उचित निर्णय लिए गए होते तो इतनी बड़ी मानवीय और आर्थिक हानि से बचा जा सकता था।

युवा कांग्रेस के नेताओं ने तो और भी तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि मंत्री महोदय को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति केरल की जनता की सुरक्षा में असफल रहा हो, वह कैबिनेट में बने रहने का हकदार नहीं है।

2018 की बाढ़: केरल का काला अध्याय

2018 की बाढ़ केरल के इतिहास में सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है। इस त्रासदी में न केवल सैकड़ों लोगों की जानें गईं बल्कि हजारों परिवार बेघर हो गए। राज्य के 14 जिलों में से 12 जिले बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

### नुकसान का विस्तृत विवरण

| नुकसान का प्रकार | आंकड़े |

------
मृतकों की संख्या500+
आर्थिक नुकसान50,000 करोड़ रुपए
प्रभावित परिवारलगभग 14 लाख
क्षतिग्रस्त मकान2.5 लाख से अधिक

इस आपदा के बाद केरल सरकार को पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार और अन्य राज्य सरकारों से मदद लेनी पड़ी थी। हालांकि केंद्र सरकार ने हर स्तर पर सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन राज्य सरकार की आलोचना यह कहते हुए हुई कि बाढ़ का पूर्वानुमान और तैयारी पर्याप्त नहीं थी।

कथित ऑडियो क्लिप का विवाद

हालिया विवाद का मूल कारण एक ऑडियो क्लिप है जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इस क्लिप में मंत्री कृष्णनकुट्टी के ऐसे बयान हैं जो 2018 की बाढ़ के दौरान लिए गए निर्णयों पर सवालिया निशान खड़े करते हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह ऑडियो क्लिप साबित करती है कि मंत्री जी ने उस समय ऐसी नीतियों का समर्थन किया जो अंततः विनाशकारी साबित हुईं। उन्होंने मंत्री से मांग की है कि वे इस मामले में सफाई दें और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दें।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले को केरल विधानसभा में उठाने की भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि मंत्री महोदय स्पष्टीकरण नहीं देते तो विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा।

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है।

जनता की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं

केरल की आम जनता अभी भी 2018 की बाढ़ के दुखद अनुभवों को भूल नहीं पाई है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया था और अभी भी पूरी तरह से उस नुकसान से उबर नहीं पाए हैं। ऐसे में यह नया विवाद उन पुराने घावों को फिर से हरा कर देता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समुदाय के नेताओं ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि वाकई में सरकारी लापरवाही या गलत नीतियों के कारण यह तबाही हुई है तो जिम्मेदार व्यक्तियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

अब देखना यह है कि मंत्री कृष्णनकुट्टी इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और क्या वे कांग्रेस की इस्तीफे की मांग को स्वीकार करते हैं या फिर इन आरोपों का खंडन करते हुए अपनी सफाई पेश करते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में केरल की राजनीति में नई बहस का विषय बन सकता है।