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Friday, 19 June 2026
शिक्षा

कोटा में NEET छात्रों की परेशानी, पेपर लीक की अफवाहें

author
Komal
संवाददाता
📅 19 June 2026, 7:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
कोटा में NEET छात्रों की परेशानी, पेपर लीक की अफवाहें
📷 aarpaarkhabar.com

टेलीग्राम बैन के बाद भी कोटा के NEET छात्र परेशान

21 जून को होने वाली नीट (NEET) री-एग्जामिनेशन की तैयारी कर रहे कोटा के हजारों छात्रों का कहना है कि टेलीग्राम, व्हाट्सएप और फोन कॉल्स के जरिए उन तक पेपर लीक के दावे लगातार पहुंच रहे हैं। हालांकि सरकार ने परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर पाबंदी लगाने का कदम उठाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रही बातचीत से साफ है कि छात्र और शिक्षक इस प्लेटफॉर्म को अफवाहों, तनाव और गलत सूचनाओं से भरे एक बहुत बड़े चक्रव्यूह का सिर्फ एक हिस्सा मानते हैं।

कोटा, जो भारत में शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, वर्तमान समय में एक अलग ही परिस्थिति से जूझ रहा है। यहां के कोचिंग संस्थान और छात्र दोनों ही मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में जो घटनाएं घटी हैं, उसके बाद से कोटा का माहौल बिल्कुल बदल गया है। छात्रों के माता-पिता भी चिंतित हैं और वे अपने बच्चों से लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सही तरीके से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

पेपर लीक की अफवाहें और सोशल मीडिया का प्रभाव

कोटा के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में काम करने वाले शिक्षकों से बातचीत करने पर पता चलता है कि पेपर लीक की अफवाहें केवल टेलीग्राम पर ही नहीं, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप्स, इंस्टाग्राम और यहां तक कि सीधे फोन कॉल्स के माध्यम से भी फैल रही हैं। कुछ छात्रों को तो ऐसे संदेश भी मिले हैं जिनमें उन्हें पेपर की कॉपी दिखाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि ये सभी दावे झूठे साबित हो रहे हैं, लेकिन इन अफवाहों का असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट दिख रहा है।

एक प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान के शिक्षक राजीव शर्मा ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में उन्होंने अपनी कक्षा के लगभग 60 प्रतिशत छात्रों में ध्यान केंद्रित करने की समस्या देखी है। ये सभी छात्र लगातार यह सोच रहे हैं कि कहीं पेपर लीक न हो जाए या किसी अन्य को पेपर पहले से न मिल जाए। इस तरह की मानसिकता से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनकी परीक्षा की तैयारी खराब हो रही है।

छात्रों की मानसिक स्थिति और तनाव के स्तर में बढ़ोतरी

कोटा के एक निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाली छात्रा अनु कुमारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि उसे और उसके दोस्तों को रोज कोई न कोई चिंता का विषय मिल जाता है। कुछ दिन पहले उसके व्हाट्सएप पर एक अजनबी से संदेश आया था जिसमें कहा गया था कि नीट का पेपर अगले दिन लीक हो जाएगा। हालांकि बाद में यह साबित हुआ कि यह संदेश पूरी तरह से झूठा था, लेकिन अनु को उस रात भर नींद नहीं आई।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, परीक्षा का दबाव तो पहले से ही काफी होता है, लेकिन जब इस पर पेपर लीक की अफवाहें और सोशल मीडिया पर नकारात्मक बातें जुड़ जाती हैं, तो छात्रों का मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है। कोटा के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉक्टर विकास पटेल ने बताया कि वह पिछले दो महीने से ऐसे छात्रों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देख रहे हैं जो मानसिक तनाव, चिंता और अनिद्रा से ग्रस्त हैं।

सरकारी कदम और उनकी सीमाएं

सरकार ने टेलीग्राम पर पाबंदी लगाकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, लेकिन इस कदम की सीमाएं भी हैं। टेलीग्राम केवल एक प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से अफवाहें फैलाई जा रही हैं, लेकिन असली समस्या लोगों की मानसिकता में है। जहां तक पेपर सुरक्षा की बात है, सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें कर्मचारियों की पूरी जांच-पड़ताल, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी शामिल है।

हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी सुधरी नहीं लग रही है। छात्र और शिक्षक दोनों ही मानते हैं कि टेलीग्राम बैन केवल एक प्रतीकात्मक कदम था। असली समस्या यह है कि अभी भी कई अन्य चैनल हैं जिनके माध्यम से गलत सूचनाएं फैलाई जा सकती हैं। व्हाट्सएप ग्रुप्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यहां तक कि व्यक्तिगत फोन कॉल्स के जरिए भी पेपर लीक की अफवाहें फैलाई जा सकती हैं।

कोटा में एक प्रभावशाली कोचिंग संस्थान के निदेशक ने गुमनाम रहते हुए कहा कि सरकार को केवल टेलीग्राम पर नहीं, बल्कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी रखनी चाहिए। साथ ही, मीडिया को भी जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए और बिना सत्यापित जानकारी के बिना कुछ भी प्रसारित नहीं करना चाहिए।

कुल मिलाकर, कोटा की स्थिति काफी गंभीर है। छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य खतरे में है और सरकार के सभी कदम भी अभी तक पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं। जरूरत इस बात की है कि समाज के सभी हिस्से, चाहे वह सरकार हो, मीडिया हो या आम लोग, मिलकर एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करें। छात्रों को इस बात का भरोसा दिलाना चाहिए कि परीक्षा पूरी तरह से सुरक्षित है और उन्हें अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए, न कि अफवाहों पर।