लगान सेट पर 6 महीने गायत्री मंत्र बजने की कहानी
भारतीय सिनेमा के इतिहास में आमिर खान की फिल्म 'लगान' का एक खास स्थान है। यह फिल्म न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर सराही गई थी। साल 2000 में रिलीज हुई यह फिल्म करीब छह महीने तक शूट की गई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक अनोखी परंपरा चलाई गई थी? प्रतिदिन सेट पर गायत्री मंत्र बजाया जाता था। यह बात बहुत ही कम लोगों को पता है, लेकिन फिल्म के एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा ने इसी के बारे में एक रोचक कहानी सुनाई थी।
लगान की शूटिंग के दौरान जो गायत्री मंत्र बजाए जाते थे, वह केवल एक संयोग नहीं था। इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और रचनात्मक उद्देश्य था। फिल्म के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने फिल्म में एक खास वातावरण बनाना चाहा था। उन्होंने मानते थे कि गायत्री मंत्र का जाप न केवल सेट पर सकारात्मक ऊर्जा लाता है, बल्कि पूरी टीम को एकजुट भी करता है।
लगान के सेट पर गायत्री मंत्र का महत्व
लगान फिल्म की शूटिंग के दौरान जब भी सेट तैयार होता था, तो सबसे पहले गायत्री मंत्र बजाया जाता था। यह परंपरा पूरे छह महीने की शूटिंग के दौरान चलती रही। अखिलेंद्र मिश्रा के अनुसार, यह परंपरा निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की ओर से शुरू की गई थी। उन्हें लगता था कि गायत्री मंत्र का जाप एक पवित्र परंपरा है जो सभी को एक सूत्र में बांधता है।
गायत्री मंत्र हिंदू धर्म के सबसे पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है। इसका जाप करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। लगान की शूटिंग के सेट पर भी यही उद्देश्य था। निर्देशक चाहते थे कि पूरी टीम एक सकारात्मक और आध्यात्मिक माहौल में काम करे। इससे न केवल काम की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि सभी कलाकारों और क्रू के बीच एक खास जुड़ाव भी होता है।
आमिर खान का सवाल और इसके पीछे की वजह
आमिर खान, जो इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे, शुरुआत में इस परंपरा को समझ नहीं पाए थे। वह अक्सर पूछते थे कि आखिर सेट पर रोज गायत्री मंत्र क्यों बजाया जाता है? इसका असली कारण क्या है? आमिर खान का यह सवाल बिल्कुल जायज था। वह जानना चाहते थे कि क्या यह केवल एक रूटीन है या इसके पीछे कोई गहरा अर्थ है।
जब आमिर ने निर्देशक आशुतोष गोवारिकर से यह सवाल पूछा, तो उन्हें विस्तार से समझाया गया कि इस परंपरा का क्या अर्थ है। आशुतोष गोवारिकर के अनुसार, गायत्री मंत्र एक ऐसा माध्यम है जो सभी की चेतना को जागृत करता है। यह मंत्र मन को शुद्ध करता है और सकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ाता है। फिल्म निर्माण एक ऐसा काम है जो रचनात्मकता और भावनात्मक गहराई की मांग करता है। गायत्री मंत्र का जाप इसी रचनात्मकता को जागृत करने में मदद करता है।
लगान की सफलता में आध्यात्मिकता की भूमिका
यह सब कुछ सुनने के बाद आमिर खान भी इस परंपरा को समझ गए थे और वह इसके महत्व को स्वीकार करते हैं। लगान की शूटिंग के दौरान जो सकारात्मक माहौल बनाया गया था, उसका असर फिल्म की गुणवत्ता पर साफ दिख रहा है। यह फिल्म केवल एक सामान्य फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक कला कृति है जिसमें भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता का समन्वय दिखता है।
लगान को बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म के लिए ऑस्कर नॉमिनेशन भी मिला था। यह भारतीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। कई लोगों का मानना है कि इस फिल्म की सफलता का एक कारण सेट पर बनाया गया वह आध्यात्मिक और सकारात्मक माहौल भी था। निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की यह सूझबूझ कि गायत्री मंत्र का जाप सेट पर एक खास ऊर्जा लाता है, सही साबित हुई।
लगान की यह कहानी सभी फिल्ममेकर्स के लिए एक सीख है। यह दिखाता है कि बड़ी और सफल फिल्में सिर्फ तकनीकी कौशल और अच्छे अभिनय से ही नहीं बनती, बल्कि सेट पर बने सकारात्मक माहौल और आध्यात्मिक संवेदनशीलता का भी बहुत महत्व होता है। जब पूरी टीम एक खास मानसिकता और उद्देश्य के साथ काम करती है, तो परिणाम निश्चित रूप से शानदार होते हैं।
आजकल जब हर कोई तेजी से काम करना चाहता है और व्यावहारिकता की बात करता है, तब लगान के सेट की यह परंपरा एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। यह बताता है कि कला के लिए समय, धैर्य और आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी जरूरी है। अखिलेंद्र मिश्रा द्वारा साझा की गई यह कहानी न केवल लगान के बारे में है, बल्कि यह भारतीय परंपरा और आधुनिक सिनेमा के बीच एक खूबसूरत पुल भी बनाती है। लगान की शूटिंग के दौरान बजने वाला गायत्री मंत्र इस फिल्म की आत्मा का हिस्सा बन गया था।




