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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

लेबनान ने इजरायल सीजफायर पर खींची लकीर

author
Komal
संवाददाता
📅 18 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 801 views
लेबनान ने इजरायल सीजफायर पर खींची लकीर
📷 aarpaarkhabar.com

लेबनान की सरकार ने इजरायल के साथ सीजफायर समझौते को अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का सवाल बना दिया है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ अউन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके अनुसार सीजफायर की बातचीत कमजोरी का प्रतीक नहीं, बल्कि उनकी मजबूत राजनीति का हिस्सा है।

हाल के दिनों में पूरे मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति बनी हुई है। इजरायल और लेबनान के बीच सीमावर्ती इलाकों में बार-बार झड़पें होती रही हैं। राष्ट्रपति जोसेफ ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह संगठन द्वारा उत्तरी इजरायल पर किए गए रॉकेट हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी आतंकवादी कार्य से लेबनान की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

हिजबुल्लाह के हमलों के बाद इजरायली प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति अउन की निंदा के तुरंत बाद ही इजरायल ने लेबनान में भारी बमबारी की। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई शहरों को निशाना बनाया। बेरूत सहित कई महत्वपूर्ण शहरों में विस्फोटों की खबरें आईं। इन हमलों में सैकड़ों लोग प्रभावित हुए और बड़े पैमाने पर जनहानि हुई।

इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि उनके हमले का उद्देश्य हिजबुल्लाह के सैन्य ठिकानों को नष्ट करना था। उन्होंने कहा कि लेबनान की सरकार को हिजबुल्लाह पर नियंत्रण करना चाहिए। इजरायल के प्रमुख नेताओं ने खुले तौर पर कहा कि वे अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

लेबनान की मजबूत प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय एकता

लेबनान की सरकार ने इजरायल के इन हमलों का कड़ा विरोध किया है। राष्ट्रपति जोसेफ अउन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से लेबनान की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान एक संप्रभु राष्ट्र है और किसी भी आक्रमण के विरुद्ध जवाब देने का अधिकार रखता है।

लेबनानी संसद और सरकार के सभी प्रमुख दल इस मुद्दे पर एकजुट दिख रहे हैं। देश की राजनीतिक पार्टियों ने इजरायल के हमलों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। लेबनान के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज की है।

राष्ट्रपति अउन ने अपने भाषण में कहा कि सीजफायर की बातचीत करना हमारी कमजोरी नहीं है। बल्कि यह हमारी बुद्धिमत्ता और राजनीतिक समझदारी का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेबनान सभी आतंकवादी संगठनों से दूरी बनाए रखता है और अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

यह गंभीर स्थिति अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बन गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से संयम दिखाने की अपील की है। अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों ने भी इस संघर्ष को रोकने के लिए बातचीत का आह्वान किया है।

लेबनान के अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर संकट में है। देश में खाद्य पदार्थों की कमी है और मुद्रास्फीति बेहद अधिक है। इस स्थिति में भारी सैन्य संघर्ष देश के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। इसलिए लेबनान की सरकार सीजफायर के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाना चाहती है।

राष्ट्रपति जोसेफ अउन ने स्पष्ट किया कि लेबनान न तो किसी विदेशी शक्ति का उपकरण है और न ही किसी के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल होना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ अपनी जनता के लिए शांति और समृद्धि चाहते हैं। लेबनान की सीमाएं सुरक्षित रहें और उसकी संप्रभुता बनी रहे, यही लेबनानी जनता की मांग है।

इस बीच हजारों लेबनानी नागरिक विस्थापित हुए हैं। दक्षिणी लेबनान के कई गांव खाली हो गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लेबनान में मानवीय संकट की स्थिति की चेतावनी दे रहे हैं। इसलिए तेजी से सीजफायर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है। लेबनान के नेताओं की दृढ़ मुद्रा यह दिखाती है कि वे अपनी अस्मिता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं।