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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

मणिपुर में कुकी-नागा संघर्ष, तनाव में नया मोड़

author
Komal
संवाददाता
📅 23 May 2026, 6:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 519 views
मणिपुर में कुकी-नागा संघर्ष, तनाव में नया मोड़
📷 aarpaarkhabar.com

मणिपुर में जातीय हिंसा का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बार कुकी और नागा समुदायों के बीच गंभीर तनाव देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे राज्य में तबाही का माहौल पैदा कर दिया है। चर्च के नेताओं की हत्या के बाद जो अपहरण और जवाबी कार्रवाई हुई है, वह इस संकट को और भी गहरा बना गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि दोनों समुदाय एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि मणिपुर पहले से ही मेइती और कुकी समुदायों के बीच खतरनाक हिंसा की चपेट में है। अब जब नागा समुदाय भी इस विवाद में शामिल हो गया है, तो पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्थिति और भी गंभीर हो गई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों लोग इस हिंसा की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं।

चर्च नेताओं की हत्या और उसके परिणाम

चर्च के प्रभावशाली नेताओं की हत्या इस पूरे संकट की शुरुआत थी। इन हत्याओं के बाद से ही कुकी समुदाय के लोग नागा समुदाय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि नागा समुदाय के कुछ उग्रवादी समूहों ने इन चर्च नेताओं को निशाना बनाया था। इस आरोप के बाद कुकी समुदाय ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें नागा समुदाय के कई लोगों को अपहरण किया गया।

चर्च नेताओं की हत्या के मामले में विभिन्न समुदायों के नेताओं के बीच तीव्र टकराव देखने को मिल रहा है। धार्मिक नेता और समुदाय के प्रभावशाली लोग इस बात पर आपस में झगड़ रहे हैं कि असली दोषी कौन हैं। पुलिस की जांच भी अभी तक निर्णायक परिणाम नहीं निकाल पाई है, जिससे संदेह और गुस्से का माहौल और भी बढ़ गया है।

धार्मिक भावनाएं इस विवाद को और जटिल बना गई हैं। दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखने के लिए सशस्त्र समूह बना चुके हैं। चर्च और मंदिरों के आसपास सशस्त्र लोगों की मौजूदगी से आम जनता में भय व्याप्त हो गया है।

अपहरण और जवाबी हिंसा का दुष्चक्र

चर्च नेताओं की हत्या के बाद से जो अपहरण की घटनाएं हुई हैं, वे पूरी स्थिति को और भी संवेदनशील बना गई हैं। कुकी समुदाय का कहना है कि उन्होंने नागा समुदाय के कई लोगों को बंदी बनाया है ताकि चर्च नेताओं की हत्यारों को सजा मिले। दूसरी ओर, नागा समुदाय का आरोप है कि कुकी समुदाय निर्दोष लोगों को अपहरण कर रहा है और उनके साथ क्रूरता से पेश आ रहा है।

इन अपहरणों की सूचनाएं मणिपुर के विभिन्न हिस्सों से सामने आई हैं। इंफाल पूर्व जिले के कई गांवों में अपहरण की घटनाएं दर्ज की गई हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें लगभग पचास से अधिक अपहरण की रिपोर्टें मिली हैं, लेकिन सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है क्योंकि कई लोग भय के कारण पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करा रहे हैं।

जवाबी हिंसा का दुष्चक्र अब पूरी तरह शुरू हो गया है। एक समुदाय की कार्रवाई के बाद दूसरा समुदाय जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस प्रक्रिया में निर्दोष लोग सबसे ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी प्रतिक्रिया और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं

मणिपुर की राज्य सरकार ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री ने सभी समुदायों के नेताओं को शांति बनाए रखने की अपील की है। सेना और अर्धसैनिक बलों को अतिरिक्त तैनाती भी की गई है ताकि हिंसा को रोका जा सके।

हालांकि, मानवाधिकार समूहों का मानना है कि सरकारी कार्रवाई अभी तक पर्याप्त नहीं रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भारत सरकार से आवाज उठाने के लिए कहा है और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। स्थानीय एनजीओ भी लापता लोगों की तलाश के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।

कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस के कुछ सदस्य भी इस हिंसा में शामिल हो गए हैं और अपने ही समुदाय के लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। इस बात से विश्वास का संकट और भी गहरा हो गया है। आम जनता को यह विश्वास नहीं रह गया है कि कानून-व्यवस्था तंत्र उनकी सुरक्षा कर सकता है।

इस पूरी स्थिति से निकलने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। धार्मिक नेताओं, समुदाय के प्रभावशाली लोगों और सरकार को सामूहिक प्रयास करने होंगे ताकि यह हिंसा खत्म हो सके और मणिपुर में फिर से शांति स्थापित हो सके।