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Friday, 05 June 2026
समाचार

एवरेस्ट पर ग्लेशियर से बंद हुआ रास्ता, पर्वतारोहियों को देरी

author
Komal
संवाददाता
📅 25 April 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 464 views
एवरेस्ट पर ग्लेशियर से बंद हुआ रास्ता, पर्वतारोहियों को देरी
📷 aarpaarkhabar.com

माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहण का सपना देखने वाले पर्वतारोहियों के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। हिमालय के विशाल ग्लेशियर में आई असामान्य स्थिति के कारण एवरेस्ट के बेस कैंप से कैंप वन तक का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। खुम्बु हिमपात क्षेत्र में स्थित एक विशाल सेराक यानी बर्फ का भाग पिघलने लगा है, जिससे पर्वतारोहियों की आगे बढ़ने की संभावना खतरे में आ गई है।

इस बाधा के कारण कई अंतर्राष्ट्रीय दल एवरेस्ट शिखर पर पहुंचने के अपने लक्ष्य को स्थगित करने के लिए मजबूर हुए हैं। नेपाल की ओर से एवरेस्ट पर चढ़ाई का यह सीजन हर साल सबसे अधिक सक्रिय रहता है, लेकिन इस बार प्रकृति की मार ने सभी योजनाओं को धराशायी कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी बढ़ सकती हैं।

खुम्बु हिमपात में आई गंभीर स्थिति

खुम्बु हिमपात एवरेस्ट के आधार क्षेत्र से शिखर की ओर जाने वाली सबसे कठिन और खतरनाक जगह मानी जाती है। यह क्षेत्र लगभग 2000 मीटर लंबा और अत्यधिक अस्थिर माना जाता है। यहां बर्फ की भारी परतें और गहरी दरारें हमेशा जानलेवा साबित हुई हैं। इस बार विशाल सेराक के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

आइसफॉल डॉक्टर के रूप में प्रसिद्ध आंग सार्की शेरपा ने रिपोर्ट दी है कि वह 10 अप्रैल को इस क्षेत्र में गए थे और स्थिति का आकलन किया था। उनके अनुसार नीचे की दरार यानी क्रेवास लगातार पिघल रही है। सेराक का निचला हिस्सा कमजोर पड़ चुका है, जिससे किसी भी समय बर्फ का विशाल भाग गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसी परिस्थिति में पर्वतारोहियों को आगे बढ़ना न केवल कठिन है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है।

शेरपा ने आगे कहा कि यह स्थिति पिछले कई वर्षों में सबसे गंभीर है। उन्होंने विस्तार से बताया कि बर्फ की संरचना में आया परिवर्तन और तापमान में वृद्धि के कारण यह समस्या पैदा हुई है। पर्वतारोहण मौसम के दौरान आमतौर पर शेरपा दल इस मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन इस बार प्रकृति की शक्ति सभी प्रयासों से बड़ी साबित हुई है।

जलवायु परिवर्तन का असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के ग्लेशियर विश्व में सबसे तेजी से पिघल रहे हैं। पिछले दो दशकों में एवरेस्ट क्षेत्र के तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि वैश्विक तापमान बढ़ने से सीधे जुड़ी है। कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर हिमालय के नाजुक इकोसिस्टम पर पड़ रहा है।

एवरेस्ट पर पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं जहां सेराक गिरने से पर्वतारोहियों की जान चली गई है। 2014 में एक भीषण हिमस्खलन में 16 शेरपा की मौत हुई थी। तब से पर्वतारोहण समुदाय इस क्षेत्र में होने वाली आपदाओं के प्रति अधिक सचेत रहता है। लेकिन प्रकृति की विनाशकारी शक्ति को रोकना मनुष्य के हाथ में नहीं है।

पर्वतारोहियों और अभियानों पर असर

इस रास्ते के बंद होने से कई अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय पर्वतारोहण दल प्रभावित हुए हैं। जो दल पहले ही बेस कैंप पहुंच चुके थे, वे अब आगे बढ़ने के लिए मार्ग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नेपाल सरकार और पर्वतारोहण एजेंसियां स्थिति में सुधार का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी जा सकी है।

एवरेस्ट पर चढ़ाई का यह मौसम साल में केवल कुछ हफ्तों के लिए ही अनुकूल होता है। ऐसे में रास्ता बंद होने का मतलब है कि कई अभियान पूरी तरह रद्द होने की स्थिति में आ सकते हैं या अगले साल तक के लिए स्थगित होने की संभावना है। यह केवल वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि पर्वतारोहियों के लिए अपने सपनों का सफर रुक जाने जैसा है।

नेपाल के पर्वतारोहण विभाग ने घोषणा की है कि वे इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ा करेंगे। पर्वतारोहियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए जब तक खुम्बु हिमपात पूरी तरह सुरक्षित न हो, कोई भी अभियान को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय कठोर है, लेकिन जरूरी है। हर साल एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान कई लोग अपनी जान गंवाते हैं। अगर सावधानी नहीं बरती गई, तो इस बार यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

पर्वतारोहण समुदाय को अब यह समझना होगा कि पर्वत केवल जीतने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान के साथ पार करने के लिए भी हैं। प्रकृति की शक्ति के आगे मानव की सभी योजनाएं नगण्य हैं। इसलिए सुरक्षा और जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।