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Tuesday, 18 August 2026
शिक्षा

NCERT नई सामाजिक विज्ञान पाठ्य पुस्तक वेद शामिल

author
Komal
संवाददाता
📅 25 June 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 947 views
NCERT नई सामाजिक विज्ञान पाठ्य पुस्तक वेद शामिल
📷 aarpaarkhabar.com

एनसीईआरटी की नई पहल और सामाजिक विज्ञान में बदलाव

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने आज एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। नौवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्य पुस्तक आज जारी की जा रही है। इस नई पाठ्य पुस्तक में भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक ज्ञान का एक अद्भुत मिश्रण दिया गया है। यह पहल शिक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है जो छात्रों को भारतीय मूल्यों के साथ जोड़ेगा।

इस नई पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें वेदों को शामिल किया गया है। वेद हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार हैं और इन्हें पढ़कर छात्र अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकेंगे। साथ ही, इस पाठ्यक्रम में पंचमहाभूत की अवधारणा, आपातकाल, आपदा प्रबंधन और महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।

एनसीईआरटी के इस कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को समग्र विकास की ओर ले जाना है। न केवल शैक्षणिक ज्ञान बल्कि सामाजिक दायित्व, लोकतांत्रिक मूल्य और आपदा सचेतता भी इस पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई है। यह दृष्टिकोण आज के समय में बेहद जरूरी था क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

तीन भाषाओं की अनिवार्यता और मातृभाषा में शिक्षा

इस शैक्षिक वर्ष से एक और महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। छात्रों को तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप है जो भारतीय भाषाओं के विकास पर जोर देती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अंग्रेजी को नजरअंदाज किया जा रहा है। बल्कि, इस नीति का उद्देश्य बहुभाषिक दक्षता को बढ़ावा देना है।

मातृभाषा में शिक्षा देने का महत्व वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों द्वारा लंबे समय से रेखांकित किया जा रहा है। जब छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ते हैं तो वे विषय को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एनसीईआरटी ने विद्यार्थियों को मातृभाषा में वर्कशीट और केस स्टडी आधारित गतिविधियां करने का अवसर दिया है। यह पहली बार है जब सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तक में इस तरह की सुविधा दी जा रही है।

इन गतिविधियों का लाभ यह होगा कि छात्र अपनी भाषा में सोच सकेंगे, प्रश्न पूछ सकेंगे और अपने विचार व्यक्त कर सकेंगे। यह एक अधिक समावेशी शिक्षा प्रणाली की ओर एक सकारात्मक कदम है। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां शहरी अंग्रेजी माध्यम से अलग अन्य भाषाओं में शिक्षा दी जाती है, यह बदलाव बेहद लाभकारी साबित होगा।

छात्रों के समग्र विकास पर नई पाठ्य पुस्तक का प्रभाव

नई पाठ्य पुस्तक का संरचना इस तरह से तैयार की गई है कि यह न केवल ज्ञान प्रदान करे बल्कि छात्रों को आलोचनात्मक सोच भी सिखाए। आपातकाल जैसे विषय को शामिल करने से छात्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास को गहराई से समझ सकेंगे। वे यह जान सकेंगे कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ा और लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे काम करती है।

आपदा प्रबंधन को पाठ्यक्रम में शामिल करना आधुनिक समय की एक जरूरत है। भारत एक ऐसा देश है जहां बाढ़, भूकंप, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। छात्रों को इन आपदाओं से निपटने के तरीके, सुरक्षा उपाय और सामूहिक जिम्मेदारी के बारे में जानकारी देना बहुत जरूरी है। यह ज्ञान उन्हें न केवल स्वयं को सुरक्षित रखने में मदद करेगा बल्कि समाज के अन्य सदस्यों को भी मदद करने में सक्षम बनाएगा।

महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को पाठ्यक्रम में स्थान देना एक प्रगतिशील कदम है। यह छात्रों को यह समझाता है कि लोकतंत्र में सभी को समान अधिकार हैं और महिलाएं समाज के विकास में किसी भी तरह से कम नहीं हैं। यह बात विशेषकर लड़कियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में कारगर साबित होगी।

वेदों को शामिल करने का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। वेदों में केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं है, बल्कि विज्ञान, गणित, खगोल और अन्य कई विषयों का ज्ञान भी है। छात्र यह सीख सकेंगे कि प्राचीन भारत कितना ज्ञान संपन्न था और आज के आधुनिक ज्ञान और प्राचीन ज्ञान में क्या संबंध है।

पंचमहाभूत की अवधारणा को भी शामिल करना पर्यावरण शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश ये पाँच तत्व प्रकृति का आधार हैं। इस अवधारणा को समझने से छात्र पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनेंगे और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की महत्ता को समझेंगे।

कुल मिलाकर, एनसीईआरटी की यह नई पहल शिक्षा को एक नई दिशा दे रही है। यह न केवल पाठ्यक्रम में बदलाव है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण परिवर्तन है जो छात्रों को भारतीय मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और समकालीन समस्याओं को समझने के लिए तैयार करेगा। आने वाले समय में यह निर्णय भारतीय शिक्षा प्रणाली को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।