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Monday, 28 September 2026
शिक्षा

न्यूटन को पायलट बताया: किताबों में गलतियां

author
Komal
संवाददाता
📅 29 June 2026, 7:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 237 views
न्यूटन को पायलट बताया: किताबों में गलतियां
📷 aarpaarkhabar.com

ओडिशा की शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है। पहली से आठवीं तक की स्कूल किताबों में भारी संख्या में गलतियां मिली हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को एक पायलट के रूप में वर्णित किया गया है। यह मामला तब सामने आया जब शिक्षा विभाग की ओर से किताबों की समीक्षा की गई।

इस गंभीर चूक के कारण ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राज्य परीक्षा सेवा और पाठ्यक्रम प्राधिकार (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी समेत कुल चार अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन सहायक निदेशकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पहली बार सामने आई इतनी बड़ी गलतियां

यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की किताबों में त्रुटियां मिली हों, लेकिन इस बार की गलतियां इतनी गंभीर हैं कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल उठ गए हैं। न्यूटन को पायलट बताना एक बेतुकी गलती है जो किसी भी अनुभवी संपादक या शिक्षक की नजर से आसानी से नहीं गुजर सकती थी। इससे साफ जाहिर होता है कि पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया में कितनी लापरवाही बरती गई है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल की किताबें बच्चों के ज्ञान की बुनियाद तैयार करती हैं। ऐसे में किताबों में गलत जानकारी देना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। पहली से आठवीं तक की किताबों में इस तरह की भूलें सरासर अस्वीकार्य हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सभी गलतियों की सूची तैयार की जा रही है। किताबों को तुरंत सही संस्करण के साथ दोबारा छापा जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि ये गलतियां पहली जगह कैसे छप गईं। क्या किसी की देखरेख नहीं थी? क्या किताबों की जांच की प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई गई थी?

विपक्षी दल की मांग और संवेदनशीलता

राज्य के विपक्षी दल बीजेडी (बीजू जनता दल) मुख्यमंत्री के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। बीजेडी का कहना है कि महज चार अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। दल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा इस मामले की जांच की मांग की है। बीजेडी के नेताओं के अनुसार, यह कोई साधारण त्रुटि नहीं है बल्कि एक संगठित षड्यंत्र हो सकता है।

बीजेडी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह मामला राज्य की शिक्षा नीति और शिक्षा प्रशासन की असफलता को दर्शाता है। उन्होंने प्रश्न उठाए हैं कि आखिर कौन से लोग इन किताबों को मंजूरी दे रहे हैं। क्या किसी को जिम्मेदारी का एहसास नहीं है? विपक्षी दल के अनुसार सीबीआई जांच से ही पूरे मामले का सच सामने आएगा।

हालांकि, सरकार का पक्ष है कि मुख्यमंत्री तेजी से कार्रवाई करके जवाबदेही सुनिश्चित कर रहे हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि निलंबन केवल अंतरिम कदम है और जांच पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के उपाय

इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने किताबों की जांच प्रक्रिया में सुधार का संकल्प लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि भविष्य में किताबें छापने से पहले एक मजबूत तंत्र के तहत उन्हें जांचा जाएगा। विषय विशेषज्ञ, पाठ्यक्रम विशेषज्ञ और अनुभवी शिक्षकों की एक समिति गठित की जाएगी।

शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि किताबों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा जहां आम नागरिक त्रुटियां रिपोर्ट कर सकेंगे। इससे किताबों में आने वाली कमियों को तुरंत सुधारा जा सकेगा। साथ ही, स्कूलों में एक प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित किया जाएगा जहां शिक्षक और छात्र किताबों के बारे में अपने विचार साझा कर सकें।

एक अन्य महत्वपूर्ण कदम यह है कि भविष्य में किताबों की विषय-वस्तु और तथ्यों की जांच के लिए शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की एक अलग टीम नियुक्त की जाएगी। यह टीम स्वतंत्र रूप से काम करेगी और किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होगी।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि शिक्षा एक संवेदनशील विषय है और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ओडिशा सरकार को न केवल दोषियों को सजा देनी चाहिए बल्कि एक ऐसी व्यवस्था भी बनानी चाहिए जिससे भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों। राज्य के बच्चे सही और विश्वसनीय शिक्षा पाने के हकदार हैं।