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Saturday, 04 July 2026
टेक

टोल के बाद भी टूटी सड़क, NHAI को मुआवजा का आदेश

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Komal
संवाददाता
📅 30 June 2026, 6:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 701 views
टोल के बाद भी टूटी सड़क, NHAI को मुआवजा का आदेश
📷 aarpaarkhabar.com

नागपुर उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जो देश भर के राजमार्गों पर टोल वसूलने वाली कंपनियों के लिए एक चेतावनी का काम करेगा। आयोग के इस फैसले में कहा गया है कि जब सड़कों से टोल वसूली की जाती है, तो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि सड़कें सुरक्षित, मजबूत और अच्छी स्थिति में हों। यदि टोल लिया जाए और फिर भी सड़क की हालत खराब रहे, तो यह स्पष्ट रूप से 'सेवा में कमी' माना जाएगा।

यह निर्णय एक मोटर चालक की शिकायत के आधार पर आया है जिसका वाहन राजमार्ग पर बने गड्ढों के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। आयोग ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि NHAI द्वारा नियमित रूप से टोल वसूला जा रहा था, लेकिन सड़क की रखरखाव और मरम्मत में उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इसी कारण सड़क पर कई जगहों पर गड्ढे बन गए थे जिससे यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था।

टोल वसूली और सेवा की गुणवत्ता में अंतर

नागपुर उपभोक्ता आयोग के इस निर्णय का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित है। जब कोई व्यक्ति किसी सड़क पर टोल देता है, तो वह स्वाभाविक रूप से यह अपेक्षा करता है कि वह सड़क सुरक्षित और अच्छी स्थिति में होगी। टोल का भुगतान एक अनुबंध होता है जिसमें सेवा प्रदान करने वाले को उच्च गुणवत्ता की सेवा देनी होती है।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि सड़क की गुणवत्ता में कमी है, तो यह उपभोक्ता अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत 'सेवा में कमी' की श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि जो कंपनियां टोल वसूलती हैं, उन्हें भी उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जवाबदेह माना जा सकता है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित करता है जो भविष्य में अन्य मामलों में भी लागू हो सकता है।

इस फैसले से पहले, कई राजमार्गों पर टोल वसूली के बाद भी सड़कों की खराब स्थिति को लेकर शिकायतें आती रहती थीं। यात्रियों को ऐसा लगता था कि उन्हें अपने पैसे बेकार ही खर्च करने पड़ रहे हैं क्योंकि सड़क की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता किया जा रहा है। आयोग का यह फैसला इसी समस्या का समाधान प्रदान करता है।

NHAI को मुआवजे का आदेश

नागपुर उपभोक्ता आयोग ने NHAI को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उस मोटर चालक को पूर्ण मुआवजा दिया जाए जिसका वाहन सड़क पर बने गड्ढों से क्षतिग्रस्त हुआ है। यह मुआवजा न केवल वाहन की मरम्मत की लागत को कवर करता है, बल्कि यात्रा में लगने वाले समय, असुविधा और अन्य संबंधित खर्चों को भी शामिल करता है।

यह निर्णय NHAI के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि भविष्य में राजमार्गों की रखरखाव को गंभीरता से लेना होगा। केवल टोल वसूलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह राजस्व सड़कों की गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाए रखने में खर्च करना होगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो आयोग और अन्य न्यायिक प्राधिकार मुआवजे का आदेश दे सकते हैं।

यह फैसला एक बहुत महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है। भविष्य में, यदि अन्य यात्रीगण भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करें, तो वे भी उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आयोग के इस फैसले को एक कानूनी मिसाल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

सड़क सुरक्षा और जनता के अधिकार

यह मामला सिर्फ एक अकेली घटना नहीं है। भारत के कई राजमार्गों पर टोल वसूली के बाद भी सड़कों की दशा दयनीय है। कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे, टूटी सड़कें और खराब रखरखाव आम समस्या है। इससे न केवल वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

नागपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्पष्ट करता है कि टोल लिया जाना और सड़क की गुणवत्ता दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। यदि टोल लिया जाता है, तो यह सरकार और NHAI की जिम्मेदारी है कि वे सड़कों को सुरक्षित और अच्छी स्थिति में बनाए रखें।

अन्य उपभोक्ता संरक्षण आयोगों को भी इस निर्णय से प्रेरणा लेनी चाहिए और समान मामलों में सख्त कदम उठाने चाहिए। जनता को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए और यदि उन्हें खराब सड़कों के कारण नुकसान होता है, तो वे आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

इस तरह के निर्णयों से ही सार्वजनिक सेवाओं में सुधार होता है और जनता के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।