🔴 ब्रेकिंग
DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|
Saturday, 06 June 2026
धर्म

पद्मिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

author
Komal
संवाददाता
📅 27 May 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 505 views
पद्मिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
📷 aarpaarkhabar.com

पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस साल यह एकादशी अधिकमास में पड़ रही है, जिसका हिंदू कैलेंडर में विशेष महत्व है। आज जब पद्मिनी एकादशी का पावन दिन आया है, तो प्रत्येक भक्त के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि इस व्रत को सही तरीके से कैसे किया जाए। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें।

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत पड़ने की परंपरा बहुत प्राचीन है। कहा जाता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनको प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। साल भर में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एकादशी आती है, जिससे कुल 24 एकादशी होती हैं। लेकिन इस साल अधिक मास होने के कारण कुल 26 एकादशी पड़ने वाली हैं। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली यह पद्मिनी एकादशी अधिकमास की पहली एकादशी है।

पद्मिनी एकादशी का महत्व और धार्मिक मान्यता

पद्मिनी एकादशी का नाम कमल के फूल से संबंधित है। इस दिन भगवान विष्णु को कमल का फूल अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को रखने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। इसी कारण से इस दिन का व्रत बेहद पावन माना जाता है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से और पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को करते हैं, उन्हें अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

अधिकमास में पड़ने वाली एकादशी का महत्व सामान्य एकादशी से भी अधिक माना जाता है। कहा जाता है कि इस महीने की एकादशी का फल लाखों गुना अधिक होता है। इसलिए भक्तों को इस दिन विशेष ध्यान देना चाहिए और पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत को संपन्न करना चाहिए।

शुभ मुहूर्त और पूजन की सही विधि

पद्मिनी एकादशी पर पूजन के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है। प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद पूजन की तैयारी करनी चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति को शुद्ध और सात्विक भोजन करना चाहिए अथवा व्रत रखते हुए फल, दूध और आलू जैसी चीजों का सेवन किया जा सकता है।

पूजन के दौरान सबसे पहले भगवान विष्णु को याद करना चाहिए और उनके सामने दीप जलाना चाहिए। फिर भगवान को फूल, अगरबत्ती और धूप अर्पित करनी चाहिए। घंटी बजाते हुए भगवान के मंत्रों का जाप करना चाहिए। व्रत के दिन भगवान विष्णु को कमल का फूल अवश्य अर्पित करना चाहिए, क्योंकि यह फूल पद्मिनी एकादशी से विशेष रूप से संबंधित है।

पूजन करते समय भक्त को ध्यान देना चाहिए कि वह पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रार्थना करे। अपने मन को शांत रखें और भगवान पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। पूजन के बाद प्रसाद वितरित करने की परंपरा है, जिसे सभी को बराबर हिस्से में देना चाहिए।

पारण की सही टाइमिंग और व्रत के नियम

एकादशी के व्रत को तोड़ने का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। पारण का अर्थ है व्रत को समाप्त करना। एकादशी के अगले दिन, अर्थात द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। पारण के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है, विशेषकर सूर्योदय के बाद का समय।

व्रत को तोड़ते समय सबसे पहले भगवान को प्रणाम करना चाहिए और फिर किसी खीर या हलवा जैसे सात्विक भोजन को ग्रहण करना चाहिए। तेल, नमक और मसाले वाला भोजन व्रत के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए। व्रत को तोड़ते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि व्रत के दिन पेट खाली रहता है।

व्रत के दिन कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना चाहिए। व्रत के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए, किसी को गाली नहीं देनी चाहिए और किसी को दुःख नहीं देना चाहिए। भगवान के नाम का जाप करते रहना चाहिए। रात को सोने से पहले भी भगवान को याद करना चाहिए।

जो लोग व्रत नहीं रख सकते, वे भगवान विष्णु को घी का दीप जला सकते हैं या कोई धार्मिक कार्य कर सकते हैं। बीमार व्यक्तियों को भी व्रत नहीं रखना चाहिए, लेकिन वे अपनी क्षमता के अनुसार कोई सात्विक कार्य अवश्य कर सकते हैं।

इस प्रकार, पद्मिनी एकादशी एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है जिसे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। इस व्रत के माध्यम से हम भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।