पटना व्यापारी की वियतनाम में मौत, शव अटका
पटना के एक प्रतिष्ठित व्यापारी की वियतनाम में अचानक मौत हो गई है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने उनके परिवार के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। व्यापारी का नाम बिंदा सिंह है और वह व्यापार के सिलसिले में वियतनाम गए हुए थे। यहां अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति पैदा हुई। भारतीय चिकित्सा सुविधाओं की कमी और वियतनाम में उपचार के दौरान वह बेहद कमजोर हो गए। आखिरकार तीन अप्रैल को वियतनाम के एक निजी अस्पताल में उनका अंतिम समय आ गया।
यह खबर तब और दुर्भाग्यपूर्ण हो गई जब परिवार के सदस्यों को शव को भारत लाने में अड़चनें आने लगीं। वीजा संबंधी जटिलताओं के कारण शव को भारत में लाने की प्रक्रिया रुक गई। तीन दिन से अधिक समय तक शव वियतनाम के अस्पताल में ही पड़ा रहा। परिवार के सदस्य और उनके रिश्तेदार बेहद चिंतित और परेशान हैं। इस पूरी स्थिति में उन्हें भारतीय सरकारी तंत्र से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही है।
बिंदा सिंह का परिवार अब इस गंभीर स्थिति में केंद्र सरकार से सीधे मदद की अपील कर रहा है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि ऐसी कठिन परिस्थিति में किसी भी भारतीय नागरिक को अकेले नहीं छोड़ा जाना चाहिए। विदेश में किसी की अचानक मौत हो जाना एक बेहद संवेदनशील मामला है और ऐसे में सरकारी तंत्र को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
वीजा समस्या बन गई बड़ी रुकावट
यह पूरा मामला एक साधारण वीजा समस्या से जुड़ा है जो एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल गया है। व्यापारी की मृत्यु के बाद शव को भारत लाने के लिए कई कानूनी दस्तावेजों की जरूरत होती है। वियतनाम की सरकार और भारतीय दूतावास के बीच समन्वय में विलंब हुआ। शव को हवाई रास्ते से भारत लाने के लिए विभिन्न अनुमति पत्र और सर्टिफिकेट की आवश्यकता थी।
परिवार को बताया गया कि वीजा संबंधी कुछ कागजी कार्रवाई अभी बाकी है। विदेश में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव को देश में लाने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। इसमें स्थानीय सरकार, भारतीय दूतावास, एयरलाइंस और अन्य एजेंसियों को समन्वय करना होता है। लेकिन इस समन्वय में जो विलंब हुआ वह परिवार के लिए असहनीय बन गया।
परिवार का संघर्ष और सरकार से अपील
बिंदा सिंह की पत्नी और बेटे को विदेश में अकेले इस गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा। वह अपने प्रियजन का शव लाने के लिए इधर-उधर भटकते रहे। भारतीय दूतावास में भी उन्हें आशानुरूप सहायता नहीं मिली। परिवार का कहना है कि अगर सरकारी तंत्र तेजी से कार्य करता तो परिवार को इतना कष्ट नहीं झेलना पड़ता।
अब परिवार ने भारतीय सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी मृत्यु के बाद परिवार की सहायता करना सरकार की जिम्मेदारी है। पटना में परिवार के रिश्तेदारों ने भी इस मामले को स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाया है। सांसद और विधायक से भी हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है।
यह घटना विदेश में भारतीय नागरिकों के सुरक्षा तंत्र में एक बड़ी खामी को उजागर करती है। जब किसी भारतीय नागरिक को विदेश में मृत्यु का सामना करना पड़े, तो सरकार को तुरंत और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। परिवार की भावनाओं और उनकी आर्थिक स्थिति दोनों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे संकटकाल में देरी केवल परिवार के दर्द को बढ़ाती है।
वर्तमान में केंद्र सरकार से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में तेजी से कार्रवाई करे और शव को भारत लाने में हर संभव सहायता प्रदान करे। भारतीय दूतावास को भी अपनी नीतियों को और भी सहज बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों को इतना कष्ट न झेलना पड़े। यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि विदेश में काम करने वाले हर भारतीय नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।




