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Sunday, 05 July 2026
राजनीति

पेट्रोल 100 रुपये पार, डीजल दाम में बढ़ोतरी

author
Komal
संवाददाता
📅 25 May 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 827 views
पेट्रोल 100 रुपये पार, डीजल दाम में बढ़ोतरी
📷 aarpaarkhabar.com

देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सोमवार को एक बार फिर से ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह पिछले दस दिनों में चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाई गई है। पेट्रोल की कीमत अब सौ रुपये प्रति लीटर को पार कर गई है। इसी के साथ डीजल की कीमत में भी 2.71 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम

आंतरराष्ट्रिक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विश्व के विभिन्न भागों में हो रहे राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा, डॉलर की मजबूत होती कीमत भी तेल के आयात को महंगा बना रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। जब विदेशी बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारतीय उपभोक्ताओं को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में तेल की खपत बढ़ रही है। आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। यह सब कारणों से देश की ऊर्जा मांग में वृद्धि हुई है। ऐसे में आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर तेल की कीमत को प्रभावित कर रहा है।

दस दिनों में चौथी बार बढ़ोतरी

गत दस दिनों में ईंधन की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। पहली बार 5 सितंबर को पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाई गई थी। उसके बाद 8 सितंबर को दूसरी बार बढ़ोतरी की गई। फिर 10 सितंबर को तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़े। अब 12 सितंबर को चौथी बार कीमत में वृद्धि हुई है। इस गति से बढ़ोतरी चलती रही, तो आने वाले दिनों में दामों में और भी अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।

यह बढ़ोतरी आम जनता के बजट पर सीधा प्रभाव डाल रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए परिवहन खर्च बढ़ गया है। कामकाजी लोगों का दैनिक खर्च बढ़ा हुआ है। सड़क परिवहन और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है। इससे अंततः वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। महंगाई में यह एक अहम भूमिका निभाती है।

आम आदमी पर पड़ रहा असर

देश की आम जनता पर इस बढ़ोतरी का भारी असर पड़ रहा है। छोटे व्यापारी, ऑटोरिक्शा चालक, टैक्सी ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन सभी को अपने परिवहन का खर्च बढ़ना पड़ रहा है। जब परिवहन खर्च बढ़ता है, तो वस्तुओं और सेवाओं की कीमत भी बढ़ जाती है।

शहरों में प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है, वहां लोगों को व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने से गाड़ियों का संचालन महंगा हो गया है। इससे लोगों की आय में से बड़ा हिस्सा केवल परिवहन पर ही खर्च हो जाता है।

पर्यावरण की दृष्टि से भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन भारत में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत बहुत अधिक है। आम आदमी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना मुश्किल है। ऐसे में पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता बनी रहेगी।

तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव भविष्य में भी बना रहने की संभावना है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने से न केवल लोगों का खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। आने वाले समय में सरकार को नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

अभी तो यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्या रुख अपनाएंगी। लेकिन अगर यही रफ्तार बनी रहे, तो आने वाले महीनों में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। सरकार, विशेषज्ञ और आम जनता सभी को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा। तभी देश की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव हो सकेगा और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सकेगा।