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Thursday, 05 November 2026
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पीयूष गोयल: यूरोप पर्यावरण में आगे, भारत बाजार में

पीयूष गोयल ने कहा पर्यावरण संरक्षण में यूरोप आगे है लेकिन बाजार क्षमता में भारत बेजोड़ है। जर्मन कंपनियां भारत में कारखाना बनाएंगी।

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Komal
संवाददाता
📅 25 October 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 478 views
पीयूष गोयल: यूरोप पर्यावरण में आगे, भारत बाजार में
📷 aarpaarkhabar.com

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है जिसमें उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन पर प्रकाश डाला है। गोयल ने कहा कि पर्यावरण बचाने के मामले में यूरोपीय देश भारत से आगे हैं, लेकिन बाजार की संभावनाओं और विकास की गति में भारत विश्व से बेजोड़ है। इस बयान के माध्यम से उन्होंने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत न केवल विकास के पथ पर अग्रसर है, बल्कि विश्व की जर्मन कंपनियां अब भारत में अपनी विनिर्माण सुविधाएं और अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए तैयार हैं।

पीयूष गोयल के इस बयान का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि वह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हैं और उनके विचार सरकार की नीति को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने विकसित देशों की पर्यावरण नीतियों की सराहना की है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि भारत अपनी आर्थिक विकास की गति को धीमा नहीं करेगा। इसके बजाय भारत एक ऐसे मार्ग पर चल रहा है जहां पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक उन्नति दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

पेरिस समझौते पर सवाल उठाते हुए गोयल की प्रतिक्रिया

पीयूष गोयल ने पेरिस जलवायु समझौते का जिक्र करते हुए विकसित देशों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के ग्यारह साल बाद भी विकसित देशों ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है। समझौते के तहत विकसित राष्ट्रों को विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करनी थी, लेकिन गोयल के अनुसार यह प्रतिशत नहीं दिखा है। इस टिप्पणी से साफ जाहिर होता है कि भारत विकसित देशों के दोहरे मानदंड से असंतुष्ट है। एक ओर तो ये देश विकासशील देशों को पर्यावरण के नाम पर प्रतिबंधित करते हैं, लेकिन दूसरी ओर अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं।

गोयल की यह आलोचना अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ता में भारत की स्थिति को मजबूत करती है। भारत एक विकासशील राष्ट्र है जहां अभी भी लाखों लोगों को गरीबी से निकालना है, बेरोजगारी दूर करनी है और बुनियादी ढांचा विकसित करना है। ऐसी परिस्थितियों में यदि भारत को विकास की गति को धीमा करने के लिए कहा जाता है, तो यह न्यायसंगत नहीं है, खासकर जब विकसित देश अपने समझौते पर अमल नहीं कर रहे हों।

जर्मन कंपनियों का भारत में निवेश

पीयूष गोयल के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि जर्मन कंपनियां अब भारत में अपने कारखाने और अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित करने जा रही हैं। यह विकास भारत की आर्थिक क्षमता और बाजार की संभावनाओं का प्रमाण है। जर्मनी यूरोप का सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति है और यहां की कंपनियां तकनीकी रूप से अत्यंत उन्नत हैं। ऐसी कंपनियों का भारत में निवेश करना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

यह निवेश भारत को कई तरीकों से लाभ प्रदान करेगा। सबसे पहले, इससे भारत में उच्च गुणवत्ता की तकनीकी जानकारी और कौशल का हस्तांतरण होगा। दूसरा, इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, चाहे सीधे कारखानों में काम के रूप में हो या अप्रत्यक्ष रूप से आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से। तीसरा, जर्मन कंपनियों का निवेश अन्य अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी भारत में निवेश का संदेश देगा। इससे भारत विश्व के निवेशकों के लिए एक अधिक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।

भारत की आर्थिक शक्ति और भविष्य की संभावनाएं

पीयूष गोयल के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत की सरकार न केवल पर्यावरण संरक्षण के बारे में सचेत है, बल्कि आर्थिक विकास में भी आत्मविश्वास रखती है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसकी जनसंख्या विश्व का सबसे बड़ा बाजार प्रदान करती है। जर्मन कंपनियों का भारत में निवेश इसी बाजार क्षमता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

भारत में विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि "मेक इन इंडिया" योजना के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत को एक विश्व स्तरीय विनिर्माण केंद्र बनाना है। जर्मन कंपनियों का इस योजना में भागीदारी भारत के लिए एक बड़ी जीत है। ये कंपनियां न केवल भारत में माल का उत्पादन करेंगी, बल्कि अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भी भारतीय प्रतिभा का उपयोग करेंगी। इससे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को विश्व स्तरीय तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

अंत में, पीयूष गोयल का यह बयान भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करता है। भारत न केवल पर्यावरण के प्रति सचेत है, बल्कि आर्थिक विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जर्मन कंपनियों का निवेश इस विश्वास का प्रमाण है कि विश्व भारत की क्षमता और संभावनाओं में विश्वास करता है। आने वाले समय में भारत न केवल एक आर्थिक महाशक्ति बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी एक मॉडल प्रदान करेगा।