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Saturday, 03 October 2026
विश्व

पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से महत्वपूर्ण बातचीत

author
Komal
संवाददाता
📅 01 July 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 464 views
पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से महत्वपूर्ण बातचीत
📷 aarpaarkhabar.com

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक महत्वपूर्ण फोन कॉल हुई है। इस बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत-ईरान संबंधों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत में क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण जलसंधि है, जहां से हर दिन लाखों बैरल तेल का परिवहन किया जाता है। इस क्षेत्र की स्थिरता न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस जलडमरूमध्य की आजादी और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है।

पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियां

पश्चिम एशिया में पिछले कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। यमन में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और सीरिया की राजनीतिक अस्थिरता इस क्षेत्र में चिंता का विषय बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में भी कई बार अंतरराष्ट्रीय जहाजों के साथ घटनाएं हुई हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है।

भारत के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। भारतीय जहाज और व्यापारी भी नियमित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। इसलिए पीएम मोदी ने इस बातचीत में क्षेत्रीय शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

भारत-ईरान संबंधों की महत्ता

भारत और ईरान के बीच हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंध हैं। दोनों देश एक दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखा है।

चाबहार बंदरगाह इसी सहयोग का एक प्रमाण है। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और ईरान तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके माध्यम से भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों से सीधे जुड़ सकता है। पीएम मोदी की ईरान के साथ वार्ता इन संबंधों को और मजबूत करने की ओर एक कदम है।

इस बातचीत में ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी होगी। क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव, सीरिया की राजनीतिक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे इस बातचीत का हिस्सा रहे होंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य की आजादी का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य की आजादी और सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। विश्व का लगभग एक तिहाई तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है।

कई बार हूती विद्रोहियों और अन्य गैर-राष्ट्रीय समूहों द्वारा इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले किए गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नुकसान हुआ है और जहाजों के मालिकों को बीमा की लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ा है। भारत जैसे देश के लिए जो तेल का आयात करते हैं, इस क्षेत्र की सुरक्षा सर्वोच्च महत्व की है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की आजादी के मुद्दे पर जोर देना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कभी-कभी शक्तिशाली देश इस जलडमरूमध्य पर अपने दबाव को महसूस कराने की कोशिश करते हैं। ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुली रहे और कोई भी देश इस पर एकतरफा नियंत्रण न कर सके।

पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से इस महत्वपूर्ण बातचीत से पता चलता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पालन करने में विश्वास रखता है। भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में कार्य करता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा में योगदान देता है।

इस बातचीत से यह भी संकेत मिलता है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए सभी पक्षों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत की विदेश नीति क्षेत्रीय देशों के साथ गहरे संबंध बनाने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने पर आधारित है। पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच यह संवाद इसी नीति का प्रतिफलन है। दोनों देशों का यह बातचीत न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और सहयोग का संदेश भी देगी।