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Monday, 15 June 2026
विश्व

PoK में सेना की बर्बरता: ब्रिटेन की संसद के बाहर कश्मीरी प्रदर्शन

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Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 2:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 896 views
PoK में सेना की बर्बरता: ब्रिटेन की संसद के बाहर कश्मीरी प्रदर्शन
📷 aarpaarkhabar.com

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के विरोध में हजारों ब्रिटिश कश्मीरी लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर एकत्र हुए। यह प्रदर्शन क्षेत्र में सेना द्वारा की जा रही बर्बरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ एक मजबूत संदेश था। प्रदर्शनकारियों ने नागरिकों की मौत, घायलों और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच तथा जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से आर्थिक राहत, सस्ती बिजली, बेहतर प्रशासन और बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ब्रिटेन में कश्मीरियों का बड़ा प्रदर्शन

लंदन की सड़कों पर यह प्रदर्शन कश्मीरी समुदाय की एकता और पीओके की स्थिति के प्रति उनकी गहरी चिंता को दर्शाता है। ब्रिटेन में रहने वाले हजारों कश्मीरी परिवार अपने रिश्तेदारों और वहां रहने वाले लोगों की दुर्दशा से बेहद परेशान हैं। इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न पोस्टर और बैनर लगाए जिन पर मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय की मांग लिखी थी। संसद के बाहर यह बड़ी भीड़ ब्रिटिश सांसदों को एक सशक्त संदेश दे रही थी कि वे इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दें।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पीओके में लोग अत्याचार और दमन का सामना कर रहे हैं। सेना द्वारा शांतिपूर्ण नागरिकों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आई हैं। बिजली की कमी, पानी की कमी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं लोगों को त्रस्त कर रही हैं। ब्रिटिश कश्मीरी समुदाय चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन इस स्थिति की जांच करें और जवाबदेही सुनिश्चित करें।

आर्थिक संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी

पीओके में लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। क्षेत्र में बिजली की कमी एक बहुत बड़ी समस्या है। लोगों को दिन में कुछ ही घंटे बिजली मिलती है जिससे उनका जीवन बहुत कठिन हो गया है। व्यापार और उद्योग रुक गए हैं। किसान अपनी खेती नहीं कर सकते क्योंकि सिंचाई के लिए बिजली नहीं है। मरीज अस्पतालों में ठीक से इलाज नहीं पा सकते क्योंकि अस्पताल भी बिजली की कमी से जूझ रहे हैं।

आर्थिक स्थिति भी बहुत खराब है। बेरोजगारी दर बहुत अधिक है। युवाओं के पास कोई रोजगार के साधन नहीं हैं। व्यापार का कोई माहौल नहीं है। कृषि पर निर्भर लोग भी उचित कीमत नहीं पा रहे। सरकार द्वारा जनता के लिए कोई विकास परियोजना नहीं चलाई जा रहीं। शिक्षा व्यवस्था भी बहुत खराब है। स्कूलों और कॉलेजों में न तो बिजली है और न ही पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री। इसके कारण युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकार में है।

पानी की आपूर्ति भी नियमित नहीं है। लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा। यह स्थिति संक्रामक रोगों को बढ़ावा दे रही है। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ढही हुई हैं। अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं। डॉक्टर और नर्सों की कमी है। इसके कारण लोग प्राथमिक चिकित्सा भी नहीं पा सकते। बच्चों की मृत्यु दर बहुत अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग

ब्रिटेन में प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार आयोग और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को पीओके की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। वहां जो अत्याचार हो रहे हैं उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार से भी कहा है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए।

कश्मीरी नेताओं ने कहा कि पीओके के लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। मीडिया पर प्रतिबंध है। कोई भी खुलकर बात नहीं कर सकता। यह लोकतंत्र की मृत्यु है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को पीओके से तुरंत वापस लेना चाहिए। वहां के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान कश्मीरी महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि सेना के जवान उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। उनके परिवार के सदस्यों को बिना कारण गिरफ्तार किया जाता है। उन्हें न्याय नहीं मिलता। उनके बेटों और भाइयों को यातना दी जाती है। यह हालात बहुत चिंताजनक हैं। बुजुर्गों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना अत्याचार कभी नहीं देखा। सरकार को इसे रोकना चाहिए।

यह प्रदर्शन एक ऐतिहासिक घटना है जो दिखाता है कि कश्मीर का मुद्दा अभी भी जीवंत है। विश्व के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी लोग अपने भाई-बहनों के लिए आवाज उठा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओके की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के आधार पर कश्मीर का समाधान निकाला जाना चाहिए। ब्रिटेन का यह प्रदर्शन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।