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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

राज्यसभा में NDA की ताकत, 150 सीटें, कांग्रेस को झटका

author
Komal
संवाददाता
📅 19 June 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 831 views
राज्यसभा में NDA की ताकत, 150 सीटें, कांग्रेस को झटका
📷 aarpaarkhabar.com

राज्यसभा चुनावों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। झारखंड और मिजोरम के राज्यसभा चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। इन दोनों राज्यों में हुए चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की उच्च सदन में ताकत काफी बढ़ गई है और वह अब 150 सीटों के करीब पहुंच गया है।

झारखंड से आए चुनाव परिणामों ने सभी को चौंकाया। यहां क्रॉस वोटिंग के जरिए एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी की शानदार जीत हुई। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार है जो विपक्षी दल के साथ है। लेकिन फिर भी एनडीए को इस राज्य से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

मिजोरम में जोपीएम यानी जुमलाई पिपल्स मूवमेंट ने पहली बार राज्यसभा में अपनी सीट हासिल की है। यह एक नया उदय है क्योंकि पहले मिजोरम से केवल पारंपरिक दलों के प्रतिनिधि ही राज्यसभा में जाते थे। इस नए राजनीतिक खिलाड़ी का आना भारतीय राजनीति में विविधता लाता है।

एनडीए की बढ़ती ताकत और राज्यसभा में उसकी स्थिति

एनडीए की राज्यसभा में बढ़ती ताकत सरकार के लिए एक अच्छी खबर है। 150 सीटें एक मजबूत स्थिति दर्शाती हैं। राज्यसभा कुल 245 सीटों की सदन है। इसका मतलब है कि एनडीए अब सदन में लगभग 61 प्रतिशत सीटों पर कब्जा रखता है।

यह संख्या महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करने के लिए सामान्य बहुमत की जरूरत होती है। 150 सीटें एनडीए को अधिकांश विधेयकों को आराम से पास करने की स्थिति में रखती हैं। लेकिन सरकार की असली लक्ष्य 163 सीटें हैं जो दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी हैं।

दो-तिहाई बहुमत से सरकार को संविधान संशोधन जैसे गंभीर विषयों पर भी कानून बनाने की शक्ति मिल जाएगी। अभी सरकार इस लक्ष्य से 13 सीटें दूर है। अगर आने वाले चुनावों में एनडीA को समान सफलता मिलती रहे तो यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।

कांग्रेस को मिली निराशाजनक परिणाम

इन चुनावों में कांग्रेस को निराशाजनक परिणाम मिले हैं। कांग्रेस को इन चुनावों में महज 5 सीटें ही मिलीं। यह संख्या पार्टी की घटती राजनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाती है। कभी जो पार्टी भारतीय राजनीति पर अपना वर्चस्व रखती थी, आज वह पीछे छूट रही है।

झारखंड में तो कांग्रेस को और भी बड़ा झटका लगा। यहां क्रॉस वोटिंग के कारण एनडीए का एक निर्दलीय उम्मीदवार जीत गया। इसका मतलब है कि कांग्रेस के अपने सहयोगी दल या गठबंधन के दल के कुछ विधायकों ने कांग्रेस के खिलाफ वोट किए। यह पार्टी के आंतरिक संकट को दर्शाता है।

मिजोरम में भी कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। यहां जेडपीएम जैसी नई पार्टी आगे आई जबकि कांग्रेस पिछड़ गई। यह दर्शाता है कि स्थानीय राजनीति में अब नई ताकतें उभर रही हैं।

भारतीय राजनीति में आने वाले बदलाव

ये चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति में कई बदलाव की ओर इशारा करते हैं। सबसे पहले, क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत साफ दिख रही है। मिजोरम में जेडपीएम की जीत इसका सबूत है। क्षेत्रीय मुद्दों पर स्थानीय पार्टियां अब राष्ट्रीय दलों को चुनौती दे रही हैं।

दूसरा, एनडीए की राजनीतिक ताकत और भी मजबूत हो रही है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहे तो अगले चुनावों में एनडीA को और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। तीसरा, कांग्रेस जैसी पारंपरिक पार्टियों की प्रासंगिकता घटती दिख रही है। नई राजनीति में उन्हें खुद को ढालना होगा।

चौथा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि क्रॉस वोटिंग की घटना से पता चलता है कि विधायकों की भी अपनी राय होती है। वे हमेशा पार्टी लाइन पर नहीं चलते। यह लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है जहां व्यक्तिगत मत को भी सम्मान दिया जाता है।

कुल मिलाकर, झारखंड और मिजोरम के राज्यसभा चुनावों के ये परिणाम भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं। एनडीA की बढ़ती ताकत, क्षेत्रीय पार्टियों का उदय, और कांग्रेस का पीछे छूटना - ये सभी तत्व आने वाले समय में देश की राजनीति को नए आकार में ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अगले राज्यसभा चुनावों पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि क्या एनडीA दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य हासिल कर पाएगा।