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Saturday, 04 July 2026
अपराध

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SBI समेत 6 बैंकों को नोटिस

author
Komal
संवाददाता
📅 30 June 2026, 7:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 848 views
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SBI समेत 6 बैंकों को नोटिस
📷 aarpaarkhabar.com

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा चोरी के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच एजेंसियों ने राष्ट्रीय स्तर के बैंकों पर नज़र डाली है और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करना शुरू किया है। पुलिस ने भारतीय स्टेट बैंक समेत छह बैंकों को आधिकारिक नोटिस जारी किए हैं। यह कदम इस प्रकरण की गहराई को दर्शाता है और संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।

इस मामले में पहली बार बैंकिंग सिस्टम की जांच की जा रही है। जांच दल को संदेह है कि चोरी का किया गया धन विभिन्न बैंक खातों, सेफ डिपॉजिट लॉकरों और निवेश के माध्यम से छिपाया गया हो सकता है। पुलिस की ओर से जारी नोटिस में विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड्स, खाता विवरण, लॉकर की सामग्री और संदिग्ध लेनदेन की पूरी जानकारी मांगी गई है।

चढ़ावे की चोरी और जांच की शुरुआत

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भारी मात्रा में दान और चढ़ावा प्राप्त होता है। यह धन राम मंदिर के निर्माण, रखरखाव और धार्मिक कार्यों में खर्च किया जाता है। हालांकि, गत वर्षों में इस ट्रस्ट से जुड़े कई कर्मचारियों और अधिकारियों पर चढ़ावा चोरी के आरोप लगे हैं।

जांच से यह सामने आया है कि लाखों रुपये का चढ़ावा गायब हो गया। यह धन मंदिर के खजाने से निकाला गया और विभिन्न अवैध तरीकों से खर्च किया गया। शुरुआत में पुलिस को केवल नकद चोरी का ही संदेह था, लेकिन अब पूरी जांच यह सुझाती है कि यह एक सुव्यवस्थित साजिश थी।

प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर आई कि चोरी किए गए धन को विभिन्न चैनलों के माध्यम से अलग किया जा रहा था। कुछ रकम सीधे बैंक खातों में जमा की गई, तो कुछ को भूमि खरीद, व्यापार और अन्य निवेश में लगाया गया। इसी कारण जांच एजेंसियों ने बैंकिंग सिस्टम पर नज़र डालने का फैसला किया।

बैंकों को नोटिस और वित्तीय ट्रेल की खोज

पुलिस ने SBI, ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक सहित छह प्रमुख बैंकों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारी मांगी गई है:

सबसे पहले, संदिग्ध व्यक्तियों और कंपनियों के सभी बैंक खातों का विस्तृत विवरण। इसमें खाता संख्या, खाता खोलने की तारीख, जमा-निकासी का पूरा रिकॉर्ड और वर्तमान बैलेंस शामिल है। दूसरा, सभी सेफ डिपॉजिट लॉकरों की सूची और उनमें रखी गई वस्तुओं का विवरण। तीसरा, सभी संदिग्ध और बड़ी रकम वाले लेनदेन की जानकारी जो पिछले तीन से चार सालों में की गई हो।

चौथा, विदेशी मुद्रा विनिमय से संबंधित कोई भी लेनदेन और विदेशी खाते में भेजी गई रकम की जानकारी। पांचवां, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड का उपयोग करके किए गए सभी लेनदेन का विवरण।

जांच एजेंसियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन का ट्रेल पूरी साजिश को उजागर कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति के खाते में अचानक बड़ी रकम आई है या बिना स्पष्ट कारण के निकाली गई है, तो यह संदेह का कारण बन सकता है। बैंकों के रिकॉर्ड्स से यह भी पता चल सकता है कि पैसा कहां गया और किन किन लोगों के बीच यह स्थानांतरित हुआ।

जांच की व्यापकता और आगे की कार्रवाई

इस मामले ने अब बहुत व्यापक रूप ले लिया है। केवल अयोध्या पुलिस ही नहीं, बल्कि विभिन्न स्तरों की जांच एजेंसियां इसमें सक्रिय हैं। आयकर विभाग, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी इस मामले पर ध्यान दे रही हैं।

जांच दल का अनुमान है कि चोरी किए गए धन की कुल राशि बहुत अधिक हो सकती है। यदि सभी बैंक खातों और लॉकरों की जानकारी मिल जाती है, तो पूरी साजिश सामने आ सकती है। अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों के बयानों और बैंक रिकॉर्ड्स को मिलाकर एक पूरी तस्वीर बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक संस्थानों से जुड़ी चोरी के मामलों में बैंकिंग सिस्टम की जांच बहुत महत्वपूर्ण होती है। पैसे का पूरा ट्रेल मिल जाने से न केवल चोरों की पहचान हो सकती है, बल्कि यह भी पता चल सकता है कि धन को कहां-कहां खर्च किया गया। यह जांच अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए भी एक सीख साबित हो सकती है कि वे अपने वित्तीय प्रबंधन को कितना सुरक्षित रखें।

आने वाले दिनों में और भी कई नाम सामने आ सकते हैं। बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर जांच एजेंसियां नए आरोपियों की पहचान कर सकती हैं और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। यह मामला न केवल अयोध्या के लिए, बल्कि पूरे देश के धार्मिक संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा कितनी आवश्यक है।