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Sunday, 05 July 2026
अपराध

आरबीआई नए नियम: UPI में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 682 views

आरबीआई का बड़ा फैसला: UPI और डिजिटल पेमेंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हुआ अनिवार्य

डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अप्रैल 2026 से सभी UPI और डिजिटल भुगतान के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला देश में बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं को देखते हुए लिया गया है।

बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ-साथ साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आरबीआई का यह कदम करोड़ों भारतीयों के डिजिटल पैसे की सुरक्षा के लिए एक ठोस कवच साबित हो सकता है।

आरबीआई नए नियम: UPI में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

क्या है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन?

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) एक ऐसी सुरक्षा प्रक्रिया है जिसमें उपयोगकर्ता को अपनी पहचान साबित करने के लिए दो अलग-अलग प्रमाणीकरण विधियों का उपयोग करना पड़ता है। पहले आपको अपना यूजर आईडी और पासवर्ड डालना होता है, फिर दूसरे चरण में एक वेरिफिकेशन कोड या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है।

आसान शब्दों में कहें तो अब UPI से पेमेंट करते समय आपको सिर्फ PIN डालना काफी नहीं होगा। इसके साथ ही आपको OTP, फिंगरप्रिंट, या फेस रिकग्निशन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा की परत से भी गुजरना होगा।

नए नियम का प्रभाव

इस नए नियम के लागू होने से सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM UPI और बैंकों की UPI सेवाओं में बदलाव देखने को मिलेगा। अब हर लेन-देन में दोहरी सुरक्षा की जांच होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भले ही लेन-देन की प्रक्रिया में कुछ सेकंड अधिक समय लगाए, लेकिन यह ऑनलाइन धोखाधड़ी को 70-80% तक कम कर सकता है। खासकर उन मामलों में जहां लोगों के फोन चोरी हो जाते हैं या उनकी व्यक्तिगत जानकारी हैकर्स के हाथ लग जाती है।

बैंकों और फिनटेक कंपनियों की तैयारी

आरबीआई के इस निर्देश के बाद सभी बैंक और फिनटेक कंपनियां पिछले कई महीनों से अपने सिस्टम को अपग्रेड करने में जुटी हुई थीं। प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने अपने ऐप्स में नई सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी हैं।

| प्लेटफॉर्म | नई सुविधा | लॉन्च डेट |

-------------------------------
Google PayFace Lock + PIN1 अप्रैल 2026
PhonePeFingerprint + OTP1 अप्रैल 2026
PaytmVoice Recognition + PIN1 अप्रैल 2026
BHIM UPIIris Scan + OTP1 अप्रैल 2026

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि शुरुआती दिनों में उपयोगकर्ताओं को थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस नई व्यवस्था के आदी हो जाएंगे।

उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

आम उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब हर UPI लेन-देन में अतिरिक्त वेरिफिकेशन स्टेप करना होगा। यदि पहले आप 4-6 अंक का PIN डालकर पेमेंट कर देते थे, तो अब इसके साथ ही आपको फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या SMS OTP की भी जरूरत होगी।

शुरुआत में यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन आपके पैसों की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है। खासकर उन लोगों के लिए जो बड़ी मात्रा में ऑनलाइन लेन-देन करते हैं।

साइबर सिक्योरिटी में बड़ा सुधार

भारत में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025 में रिपोर्ट हुए ऑनलाइन फाइनेंसियल फ्रॉड के केसों में से 60% UPI और डिजिटल वॉलेट से जुड़े थे। आरबीआई के इस फैसले से इन आंकड़ों में काफी कमी आने की उम्मीद है।

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हैकर्स के लिए सिस्टम को भेदना काफी मुश्किल बना देगा। अब केवल PIN या पासवर्ड चुराकर पैसे निकालना संभव नहीं होगा।

निष्कर्ष

आरबीआई का यह कदम भारत की डिजिटल पेमेंट सिक्योरिटी के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि शुरुआत में लोगों को थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह हमारे डिजिटल पैसों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

यह बदलाव दिखाता है कि भारत तकनीकी विकास के साथ-साथ सुरक्षा के मामले में भी आगे बढ़ रहा है। उपयोगकर्ताओं को इन नए नियमों का स्वागत करना चाहिए और अपने डिजिटल लेन-देन को और भी सुरक्षित बनाना चाहिए।