शरद पूर्णिमा 2026: खीर रखने का सही समय और पूजा विधि
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जा रही है। जानें खीर रखने का सही समय, चंद्रोदय मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा विधि।
शरद पूर्णिमा का यह पवित्र पर्व आज 25 अक्टूबर को पूरे भारत में मनाया जा रहा है। यह त्योहार हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात को चांदनी में खीर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानते हैं इस पवित्र दिन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें और खीर रखने का सही समय।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसका नाम संस्कृत के शब्दों से बना है जहां 'को' का अर्थ है कौन और 'जागरी' का अर्थ है जागना। इस दिन घरों में देवी लक्ष्मी के आने का इंतजार किया जाता है और पूरी रात जागकर उनका स्वागत किया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपने सबसे तेजस्वी और पूर्ण रूप में प्रकट होता है।
इसी रात को खीर को चांदनी में रखा जाता है क्योंकि माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में विशेष शक्तियां डालती हैं। यह परंपरा केवल एक धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणें अधिकतम तीव्रता से पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे दूध और खीर में विशेष गुण आते हैं।
खीर रखने का सही समय और विधि
शरद पूर्णिमा की रात में खीर रखते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस साल 2026 में चंद्रोदय का समय रात 8:15 बजे के आसपास है। माना जाता है कि चंद्रोदय के बाद खीर को छत या किसी खुली जगह पर रखना चाहिए ताकि चंद्रमा की सीधी किरणें खीर पर पड़ें।
खीर रखने की विधि काफी सरल है। सबसे पहले दूध और चावल से बनी खीर को मिट्टी के कटोरे में लिया जाता है। मिट्टी का कटोरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सर्वाधिक प्राकृतिक और पवित्र माना जाता है। अगर मिट्टी का कटोरा उपलब्ध न हो तो चांदी या पीतल के बर्तन का भी उपयोग किया जा सकता है। खीर में मेवे, किसमिस और सूजी भी डाली जा सकती है।
खीर को रात भर चांदनी में रखा जाता है और सुबह सूर्योदय से पहले ही इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों को खिलाया जाता है। माना जाता है कि इस खीर को खाने से शारीरिक और मानसिक शक्ति बढ़ती है। कई परिवारों में इसे रातभर जागकर भगवान का भजन गाते हुए खीर को पहरेदारी देने की परंपरा भी है।
मां लक्ष्मी की पूजा विधि
शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। इस दिन पूजा के लिए घर को अच्छी तरह साफ-सुथरा कर लिया जाता है। घर के हर कोने में दीप जलाए जाते हैं ताकि अंधकार पूरी तरह समाप्त हो जाए।
पूजा की शुरुआत गणेश जी को प्रणाम करके की जाती है। फिर मां लक्ष्मी के लिए फूलों की माला, अगरबत्ती, दीप और प्रसाद का व्यवस्था किया जाता है। कई घरों में शरद पूर्णिमा की रात को कन्नी की देवी और कूष्मांडा देवी का भी विशेष पूजन किया जाता है।
लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए पूरी रात जागकर उनके भजन गाए जाते हैं। कुछ पारंपरिक परिवारों में लक्ष्मी माता की कहानियां भी सुनाई जाती हैं। पूजा के समय घर में प्रेम, भक्ति और समर्पण का माहौल होना चाहिए।
शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी का वरदान पाने के लिए सच्चे मन से पूजा करना चाहिए। इसी दिन से नवंबर-दिसंबर के महीनों में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने के संकेत माने जाते हैं। इसलिए यह पर्व आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शरद पूर्णिमा की पवित्र रात को खीर रखकर और भक्तिपूर्वक पूजा करके हम मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता रहा है।




