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Thursday, 05 November 2026
मौसम

दक्षिण भारत में मौसम अलर्ट: बारिश की चेतावनी

दक्षिण भारत में अगले दो दिन भारी बारिश का अलर्ट। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत।

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Komal
संवाददाता
📅 12 October 2026, 7:00 PM ⏱ 1 मिनट 👁 800 views
दक्षिण भारत में मौसम अलर्ट: बारिश की चेतावनी
📷 aarpaarkhabar.com

दक्षिण भारत के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी की गई चेतावनी के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत होने वाली है। इस मौसमी परिवर्तन के साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। 15 से 18 अक्टूबर के बीच केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अत्यधिक वर्षा होने की पूर्वानुमानित की गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है कि यह मानसूनी प्रणाली दक्षिण-पूर्व भारत में कैसे काम करती है और किन इलाकों को इससे सबसे अधिक प्रभाव पड़ने वाला है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पूर्वोत्तर मानसून के आने से तटीय क्षेत्रों में विशेष रूप से तेज बारिश हो सकती है। इसीलिए प्रशासन ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने का आग्रह किया है।

पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत और इसके प्रभाव

पूर्वोत्तर मानसून एक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली है जो प्रतिवर्ष अक्टूबर के महीने में दक्षिण भारत में आती है। यह मानसून बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी लेकर आता है, जिससे तटीय इलाकों में भारी वर्षा होती है। इस बार की चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते समय कहा है कि बारिश की तीव्रता सामान्य से अधिक हो सकती है।

विभाग की तरफ से दिए गए निर्देशों के अनुसार, केरल में सबसे अधिक वर्षा की संभावना है। केरल में पहले से ही मानसूनी वर्षा के कारण कई जिलों में पानी भर गया है। ऐसे में इस बार की बारिश से स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। तमिलनाडु के तटीय जिलों में भी काफी बारिश की संभावना है। कर्नाटक के दक्षिणी और तटीय इलाकों को भी इस मानसून से काफी अधिक वर्षा मिलने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भी मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

अल नीनो का प्रभाव और इस साल की कमजोर बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, इस साल की बारिश सामान्य से 12.6% कम रही है। इसका मुख्य कारण अल नीनो है, जो एक वैश्विक जलवायु घटना है। अल नीनो के कारण विश्वभर के मौसम में परिवर्तन देखा जा रहा है। यह घटना तब होती है जब प्रशांत महासागर के केंद्रीय भाग में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।

इस बार का अल नीनो काफी प्रभावशाली साबित हुआ है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहा है। सामान्य वर्षों में जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून से भरपूर बारिश मिलती है, वहीं इस बार वह औसत से कम रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस वजह से किसानों को नुकसान हुआ है। कई किसान अपनी फसलों को सिंचाई के जरिए बचाने के लिए मजबूर हुए हैं।

हालांकि, पूर्वोत्तर मानसून आने से सर्दी के मौसम की तैयारी में कुछ राहत मिल सकती है। इस मानसून से जल संसाधनों में भी वृद्धि हो सकती है, जो आने वाले महीनों में लाभदायक साबित हो सकता है।

राज्य प्रशासन की तैयारी और जनता को सलाह

दक्षिण भारत के सभी राज्यों के प्रशासन ने इस भारी बारिश की चेतावनी को गंभीरता से लिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। नालियों की सफाई, बाढ़ की स्थिति में बचाव दलों को तैनात करने और जनता को सतर्क करने के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और घर के अंदर रहें। बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को निचले क्षेत्रों से ऊंची जगहों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी की घोषणा की जा सकती है। सभी को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखें और आपातकालीन संपर्क सूचियां तैयार रखें।

यह मौसमी परिवर्तन अस्थायी है, लेकिन इसके दौरान सतर्कता आवश्यक है। अगले 2-3 दिनों में होने वाली बारिश के बाद मौसम सामान्य हो जाएगा। तब तक, सभी को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।