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Wednesday, 20 May 2026
राजनीति

स्टालिन का किला: 2026 में चौथी बार जीत?

author
Komal
संवाददाता
📅 04 May 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
स्टालिन का किला: 2026 में चौथी बार जीत?
📷 aarpaarkhabar.com

तमिलनाडु की राजनीति में एमके स्टालिन का नाम आते ही कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र याद आता है। यह जगह स्टालिन के राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आज चार मई को जब तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने वाले हैं, तो सभी की निगाहें इसी किले की ओर लगी हैं। क्या स्टालिन लगातार चौथी बार इस क्षेत्र से जीत हासिल कर पाएंगे? यह सवाल हर राजनीतिशास्त्री और विश्लेषक के मन में है।

स्टालिन का कोलाथुर के साथ रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं है, यह भावनात्मक भी है। पिछले तीन दशकों में उन्होंने इस क्षेत्र की जनता के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया है। यह इलाका द्रविड़ राजनीति का केंद्र माना जाता है। यहाँ की जनता अपने प्रतिनिधि को अत्यधिक महत्व देती है। स्टालिन के पिता करुणानिधि भी इसी क्षेत्र के प्रतिनिधि रहे थे। परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए स्टालिन ने यहाँ की जनता का आस्था अर्जित की है।

कोलाथुर में स्टालिन की राजनीतिक यात्रा

एमके स्टालिन का कोलाथुर से संबंध सन् 1996 से शुरू हुआ था। उस समय वह पहली बार यहाँ से विधानसभा चुनाव के लिए खड़े हुए थे। उनकी जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी, बल्कि यह जनता की आस्था का प्रमाण पत्र था। पहली जीत के बाद उन्होंने 2001 और 2006 में लगातार दो और जीतें दर्ज कीं। हर चुनाव में उनका मार्जिन बढ़ता गया। कोलाथुर की जनता ने उन्हें पूरे विश्वास के साथ अपना प्रतिनिधि माना।

2011 के बाद स्टालिन मुख्यमंत्री के कार्यभार में आ गए। इसके बाद भी वह कोलाथुर से ही प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। एक मुख्यमंत्री होने के बाद भी अपने इसी क्षेत्र से जुड़े रहना उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता को दर्शाता है। कोलाथुर की जनता के लिए स्टालिन केवल एक नेता नहीं हैं, वह उनकी अपनी पहचान हैं।

2026 में चौथी जीत की संभावनाएं

इस बार के चुनाव में स्टालिन को लेकर कोलाथुर की जनता का उत्साह पहले जैसा ही दिखाई दे रहा है। मतगणना के दौरान जो प्रारंभिक रुझान सामने आ रहे हैं, वह स्टालिन के पक्ष में ही दिख रहे हैं। विरोधी दल के उम्मीदवार भी इस बार अपेक्षाकृत कमजोर साबित हो रहे हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का प्रभाव हमेशा से मजबूत रहा है। कोलाथुर में भी द्रमुक की जड़ें गहरी हैं। स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक पार्टी ने पिछली बार भी इस क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया था। स्थानीय मुद्दों पर काम करने की उनकी नीति यहाँ की जनता को भाती है। बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जो सुधार हुए हैं, उसे लोग देखते हैं।

जनता का मूड और भविष्य की दिशा

चुनाव प्रचार के दौरान कोलाथुर में जनसभाओं का माहौल देखने से लगता है कि स्टालिन के प्रति जनता की आस्था अभी भी बरकरार है। महिलाओं, किसानों और युवाओं की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है। द्रमुक की सामाजिक कल्याण योजनाओं का असर भी इस क्षेत्र में दिखाई दिया है।

हालांकि, इस बार कुछ अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं। आर्थिक मंदी का असर कुछ हद तक जनता की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। बेरोजगारी और महंगाई की समस्या हर तरफ है। लेकिन अगर हम कोलाथुर की राजनीतिक संरचना को देखें, तो स्टालिन की विश्वसनीयता अभी भी प्रश्न से ऊपर है।

मतगणना जारी है और घंटे दर घंटे नए आंकड़े सामने आ रहे हैं। कोलाथुर से स्टालिन की चौथी जीत की संभावना अभी भी काफी मजबूत दिख रही है। अगर वह इस बार भी जीत जाते हैं, तो यह न केवल द्रमुक के लिए, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।

आने वाले घंटों में जैसे-जैसे मतगणना पूरी होगी, स्टालिन का भविष्य स्पष्ट होता जाएगा। कोलाथुर की जनता का फैसला क्या होगा, यह आज शाम तक पूरी तरह साफ हो जाएगा। लेकिन अभी तक के रुझानों से यह साफ है कि स्टालिन का अभेद्य किला अभी भी मजबूत है। तमिलनाडु की राजनीति में एमके स्टालिन और कोलाथुर का रिश्ता इतिहास के पन्नों में सदा अंकित रहेगा।