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Wednesday, 20 May 2026
राजनीति

तमिलनाडु चुनाव 2026: DMK सत्ता बचाएगी या AIADMK वापसी करेगी

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Komal
संवाददाता
📅 23 April 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
तमिलनाडु चुनाव 2026: DMK सत्ता बचाएगी या AIADMK वापसी करेगी
📷 aarpaarkhabar.com

तमिलनाडु की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने वाला है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य में जबरदस्त सियासी गतिविधियां चल रही हैं। द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके अपनी सत्ता को बचाने के लिए भरपूर कोशिशें कर रही है, वहीं अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी अन्नाद्रमुक तानाशाही के खिलाफ जनता की भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए वापसी का सपना देख रही है। इसी बीच विजय माकन्न पार्टी यानी टीवीके अपने चुनावी पदार्पण को लेकर काफी सक्रिय दिखाई दे रही है। यह चुनाव तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाले हैं।

तमिलनाडु की राजनीति काफी गतिशील और नाटकीय रहती है। यहां की जनता राजनीति से लेकर फिल्मों तक सब कुछ में गहरी दिलचस्पी रखती है। पिछले कुछ सालों में यहां की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिली है। डीएमके ने पिछली बार सत्ता में आकर अपनी शासन क्षमता को साबित करने की कोशिश की है। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या डीएमके दोबारा अपनी सत्ता बचा पाएगी या फिर अन्नाद्रमुक की वापसी होगी।

डीएमके की सत्ता बचाने की कोशिश

डीएमके वर्तमान समय में तमिलनाडु की सत्ता में है और सत्ता बचाना इसका मुख्य लक्ष्य है। कलेक्टर स्टालिन की नेतृत्व में डीएमके ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पार्टी का मानना है कि उसने आम जनता के कल्याण के लिए काफी काम किए हैं। डीएमके राज में तमिलनाडु में विभिन्न प्रकार की योजनाएं लागू की गई हैं जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ा है।

डीएमके पार्टी का वोट बैंक काफी मजबूत रहा है। दक्षिण तमिलनाडु में विशेषकर इस पार्टी की काफी मजबूत पकड़ है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि आने वाले चुनावों में डीएमके को जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा। डीएमके अपने गठबंधन को मजबूत करने में भी लगी है। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन के बारे में बातचीत शुरू कर दी है।

कलेक्टर स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने जो भी नीतियां बनाई हैं, उनका केंद्रीय विचार सामाजिक न्याय और समानता रहा है। पार्टी का दावा है कि उसने पिछड़ी जातियों और दलितों के लिए विशेष प्रयास किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। इन सभी प्रयासों के कारण डीएमके को आशा है कि वह 2026 के चुनावों में सफल हो सकेगी।

अन्नाद्रमुक की वापसी की होड़

अन्नाद्रमुक तमिलनाडु की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पार्टी का कहना है कि पिछली सरकारों के दौरान विकास के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई थी। जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने जनता के बीच एक खास जगह बनाई थी। हालांकि, पार्टी को हाल के वर्षों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

अन्नाद्रमुक अपनी खोई हुई पहचान को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर अपनी बातें रख रहे हैं। अन्नाद्रमुक का तर्क है कि वर्तमान सरकार ने जनता को निराश किया है। पार्टी यह संदेश दे रही है कि अगर वह सत्ता में आती है तो तमिलनाडु का विकास निश्चित है।

अन्नाद्रमुक के अंदर एडीएमके शाखा यानी ईपीडीपी जैसी पार्टियां भी हैं जो अलग-अलग चुनाव लड़ने की बातें कर रही हैं। इसके कारण विपक्षी गठबंधन को कमजोर होने का खतरा है। हालांकि, अन्नाद्रमुक की केंद्रीय नेतृत्व इन सभी पार्टियों को एक साथ लाने की कोशिश कर रही है ताकि डीएमके के खिलाफ एक मजबूत विकल्प दिया जा सके।

टीवीके का चुनावी पदार्पण

विजय माकन्न पार्टी यानी टीवीके तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभर रही है। पार्टी अभिनेता विजय के समर्थन के कारण युवाओं में काफी लोकप्रिय है। टीवीके का कहना है कि पार्टी न्याय और सामाजिक कल्याण के आधार पर राजनीति करेगी।

टीवीके के संस्थापक अभिनेता विजय को तमिलनाडु में बेहद लोकप्रिय माना जाता है। पार्टी अपने पहले चुनावों में ही काफी हलचल मचाने की कोशिश कर रही है। टीवीके का फोकस युवाओं को साथ लाना है और उन्हें राजनीति में सक्रिय भूमिका में लाना है।

टीवीके के लिए यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पार्टी की पहली विधानसभा चुनाव की लड़ाई होगी। पार्टी के नेताओं का दावा है कि वे तमिलनाडु की राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। युवा पीढ़ी टीवीके की ओर काफी आकर्षित दिख रही है और पार्टी को भरोसा है कि 2026 के चुनावों में वह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगी।

तमिलनाडु के आने वाले चुनावों में तीनों ही पार्टियों के बीच सीधी जंग होने वाली है। डीएमके अपनी सत्ता बचाना चाहती है, अन्नाद्रमुक अपनी वापसी करना चाहती है और टीवीके अपने चुनावी पदार्पण को सफल बनाना चाहती है। यह चुनाव तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाले हैं। आने वाले महीनों में इस राजनीतिक समीकरण में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जनता के समर्थन के बिना कोई भी पार्टी सफल नहीं हो सकती है, और इसलिए सभी पार्टियां जनता के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने में लगी हुई हैं।